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शिक्षा: पाली

Sat, 07 Apr 2018 01:48 AM IST
Updated Sat, 07 Apr 2018 01:48 AM IST
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शिक्षा: पाली
बीस फीसदी ही बच्चे ही पहुंच रहे स्कूलों में
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पाली।
बिरधा ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में मात्र 20 फीसदी ही बच्चे ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। बाकी बच्चे स्कूलों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। जबकि शासन द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। जागरूकता रैलियां निकाली जा रही है।
प्राइवेट स्कूलों में बच्चे लगभग अपनी पूरी संख्या में पहुंच रहे है। इन स्कूलों की प्रबंधन समिति और अध्यापक नए प्रवेश लाने के लिए डोर टू डोर पहुंचकर अपनी उपलब्धि गिना रहे हैं। इसके विपरीत सरकारी प्राथमिक स्कूलों में कई प्राइवेट स्कूल से अच्छी सुविधाएं मुहैया हैं। इनमें तैनात अध्यापक भी पढ़ाने के मामले में महारत हासिल किए हैं। लेकिन लोग अपने बच्चों का कम ही सरकारी विद्यालयों में दाखिला दिलाते हैं। जो बच्चे दाखिला ले भी लेते वह भी स्कूल में नियमित पढ़ाई करने नहीं पहुंच रहे हैं। सरकारी स्कूलों में अध्यनरत बच्चों के अभिभावकों से बात की गई तो अधिकांशत: लोगों से यही मालूम पड़ा कि स्कूलों में ठीक से पढ़ाई नही होती। कक्षा पांचवीं में पढ़ने वाले बच्चों को ठीक से किताब पढ़ना नहीं आता। सरकार सुविधाएं तमाम दे रही हैं, लेकिन शिक्षकों की भी जिम्मेदारी बनती कि बच्चों को अच्छी तालीम दें।
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बृहस्पतिवार को कुछ स्कूलों का हाल जाना तो पाया कि कन्या पाठशाला में 109 छात्रों के सापेक्ष मात्र 14 बच्चे स्कूल में मिले। सेंट्रल बैंक के सामने वाले स्कूल में 146 के सापेक्ष 25, पीपरी के स्कूल 93 के सापेक्ष 22 छात्र ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। इसकी जानकारी खुद यहां के शिक्षकों ने दी। हालांकि शिक्षकों ने यह भी बताया कि बच्चे स्कूलों में आए इसके लिए कोशिश तो खूब की जा रही है फिर भी बच्चे नही आ रहे ।
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संकुल विद्यालय भी रहता खाली
पाली में बने संकुल जूनियर हाईस्कूल में दिखने वाली सुविधाएं अच्छे प्राइवेट स्कूल को मात देती नजर आती हैं। तीन अनुदेशकों के साथ तीन अध्यापक भी यहां अध्यापन कार्य करा रहें हैं, इसके बाद भी छात्रों की कुल संख्या 100 से कम ।

पाली को मिला एक इंग्लिश मीडियम
एक प्राथमिक स्कूल को इंग्लिश मीडियम की मान्यता भी मिल गई। विद्यालय में नये बच्चे दाखिल ले इसके लिए बड़े प्रयास करने होंगे तो साथ ही जो अभी अध्यनरत है उन पर भी बड़ी मेहनत करनी होगी ।


आंगनबाड़ी में तीन महीने से नही पोषाहार
कुपोषण दूर करने के लिए आंगनबाड़ी की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। पाली की आंगनबाड़ी में तीन माह से कोई पोषाहार नहीं आया तो कैसे जच्चा- बच्चा कुपोषण मुक्त होंगे। गर्भवती महिला टीकाकरण करा कर जा रही तो छोटे-छोटे बच्चे भी बिना पोषाहार मिले खेलकूद कर मायूस जा रहे हैं। पाली में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का यही कहना कि जनवरी से नही आया कोई पोषाहर। जबकि इनमें एक सैकड़ा बच्चे और दर्जनों गर्भवती महिलाएं अपने हक का लाभ लेने आती हैं।

इनका कहना है
विद्यालयों में हाल में ही परीक्षा संपन्न हुई है, जिसके चलते छात्र स्कूलों में कम उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। छात्रों के साथ अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। जल्द ही स्कूलों में बच्चें अपनी पूर्ण उपस्थित दर्ज कराएंगे ।
विनोद पटैरिया, खंड शिक्षा अधिकारी

शैक्षिक सत्र शुरू, नहीं हुई परीक्षा
शैक्षिक सत्र शुरू होने के साथ ‘स्कूल चलो’ अभियान शुरू हो गया है। वहीं, पाली में एक ऐसा इंग्लिश मीडियम विद्यालय है, जिसके अभी एग्जाम तक शुरू नहीं हुए। स्कूल प्रबंधन इसको लेकर चुप्पी बनाए हैं तो वहीं अभिभावक अतुल रसिया व प्रदीप जैन बता रहे कि एग्जाम न होने के चलते बच्चे पुरानी किताबें पढ़ रहे हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी है जिन्हें बाहर पढ़ने के लिए जाना है लेकिन स्कूल सुनने का नाम नही ले रहा ।

तो वहीं खबर है कि फीस न होने के चलते स्कूल एग्जाम नही करा रहा है। साथ ही विद्यालय प्रबंधन को भय सता रहा है कि कहीं उनके स्कूल के बच्चे दूसरे स्कूलों में दाखिला न ले लें। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि मामला संज्ञान में है । इस स्कूल में कक्षा आठवीं की परीक्षा हो गयी है, बाकी कक्षाओं की नहीं हुई, जिसके लिए विद्यालय से आख्या मांगी गई है।
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