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चालू होने से पहले ही बंद होगा बालू खनन
Updated Thu, 29 Jun 2017 08:55 PM IST
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चालू होने से पहले ही बंद होगा बालू खनन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जुलाई की पहली तारीख से तीन महीनों के लिए नदी-नालों से किए जाने वाले बालू व मोरम आदि का खनन कार्य रोक दिया जाएगा। इसके लिए शासन ने समस्त जिलाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। ऐसा होने से उन बालू खनन कारोबारियों को नुकसान होगा, जिन्होंने हाल ही में छह माह की अल्प अविधि के लिए घाटों के परमिट लिए हैं। उनके लिए अब खनन करने के लिए मात्र तीन माह का ही समय मिलेगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने सूबे में सालों से बंद पड़े बालू के घाटों को चालू कराने की कोशिश बीते माह से शुरू कर दी है। इसके लिए सरकार ने उत्तर प्रदेश खनन नीति 2017 के तहत बालू खनन की व्यवस्था करके अधिकतम पांच वर्ष तक की समयसीमा के लिए पट्टी जारी करने की योजना बनाई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से पूर्व शासन ने छह माह की अल्प अविधि के परमिट जारी करने का फैसला लिया था। इसी क्रम में स्थानीय खनिज विभाग ने नदियों के 12 घाटों के अल्प अविधि परमिट जारी करने के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई थी। दो बार की गई ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में मात्र 04 घाटों के ही टेंडर हो सके हैं। इन चार घाटों में अब तक मात्र एक ही घाट वीर घाट के प्रपत्र विगत 16 जून को जारी हुए है और बाकी तीन घाटों घमना, बरलरगुंवा और पाचौनी घाटों के अभी तक प्रपत्र भी जारी नहीं हुए हैं। इससे पहले ही शासन ने तीन माह के लिए बालू के खनन पर रोक लगा दी है। ऐसा होने से उक्त चारों घाटों का परमिट लेने वाले कारोबारियों को खनन के लिए मात्र तीन माह का ही समय मिलेगा।
इस संबंध में प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव राजप्रताप सिंह ने निर्देश जारी कर दिए हैं कि मानसून के मद्देनजर आगामी 01 जुलाई से 30 सितंबर तक खनन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है और समस्त जिलाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। वहीं, शासनादेश में यह निर्देश दिए गए हैं कि अब बालू घाटों के परमिट दीर्घ कालीन यानी अधिकतम पांच वर्षों के लिए ही किए जाएंगे।
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प्रशासन को होना पड़ेगा मुस्तैद
एक जुलाई से बालू खनन पर तीन माह के लिए प्रतिबंध लगने के बाद खनन रोकने के लिए प्रशासन को मुस्तैद होना होगा। इसका मुख्य कारण है कि वर्तमान में जिन बालू कारोबारियों ने छह माह के लिए परमिट लिए हैं, उनके लिए तो खनन करने के लिए मात्र तीन माह का समय मिलेगा। इसके लिए वह हर कोशिश करेंगे कि खनन कार्य जारी रखें। इसके लिए खनिज विभाग के साथ-साथ जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को भी खनन का कारोबार रोकने के लिए मुस्तैदी की आवश्यकता रहेगी।
वर्जन
तीन माह तक रोका जाएगा खनन
अभी तीन घाटों के प्रपत्र जारी नहीं किए गए है, जिसकी कार्यवाही चल रही है। वहीं, शासनादेश के क्रम में तीन माह तक बालू का खनन पूरी तरह से रोका जाएगा।
- अरविंद कुमार, जिला खनिज अधिकारी, ललितपुर।
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जुलाई की पहली तारीख से तीन महीनों के लिए नदी-नालों से किए जाने वाले बालू व मोरम आदि का खनन कार्य रोक दिया जाएगा। इसके लिए शासन ने समस्त जिलाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। ऐसा होने से उन बालू खनन कारोबारियों को नुकसान होगा, जिन्होंने हाल ही में छह माह की अल्प अविधि के लिए घाटों के परमिट लिए हैं। उनके लिए अब खनन करने के लिए मात्र तीन माह का ही समय मिलेगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने सूबे में सालों से बंद पड़े बालू के घाटों को चालू कराने की कोशिश बीते माह से शुरू कर दी है। इसके लिए सरकार ने उत्तर प्रदेश खनन नीति 2017 के तहत बालू खनन की व्यवस्था करके अधिकतम पांच वर्ष तक की समयसीमा के लिए पट्टी जारी करने की योजना बनाई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से पूर्व शासन ने छह माह की अल्प अविधि के परमिट जारी करने का फैसला लिया था। इसी क्रम में स्थानीय खनिज विभाग ने नदियों के 12 घाटों के अल्प अविधि परमिट जारी करने के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई थी। दो बार की गई ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में मात्र 04 घाटों के ही टेंडर हो सके हैं। इन चार घाटों में अब तक मात्र एक ही घाट वीर घाट के प्रपत्र विगत 16 जून को जारी हुए है और बाकी तीन घाटों घमना, बरलरगुंवा और पाचौनी घाटों के अभी तक प्रपत्र भी जारी नहीं हुए हैं। इससे पहले ही शासन ने तीन माह के लिए बालू के खनन पर रोक लगा दी है। ऐसा होने से उक्त चारों घाटों का परमिट लेने वाले कारोबारियों को खनन के लिए मात्र तीन माह का ही समय मिलेगा।
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इस संबंध में प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव राजप्रताप सिंह ने निर्देश जारी कर दिए हैं कि मानसून के मद्देनजर आगामी 01 जुलाई से 30 सितंबर तक खनन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है और समस्त जिलाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। वहीं, शासनादेश में यह निर्देश दिए गए हैं कि अब बालू घाटों के परमिट दीर्घ कालीन यानी अधिकतम पांच वर्षों के लिए ही किए जाएंगे।
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प्रशासन को होना पड़ेगा मुस्तैद
एक जुलाई से बालू खनन पर तीन माह के लिए प्रतिबंध लगने के बाद खनन रोकने के लिए प्रशासन को मुस्तैद होना होगा। इसका मुख्य कारण है कि वर्तमान में जिन बालू कारोबारियों ने छह माह के लिए परमिट लिए हैं, उनके लिए तो खनन करने के लिए मात्र तीन माह का समय मिलेगा। इसके लिए वह हर कोशिश करेंगे कि खनन कार्य जारी रखें। इसके लिए खनिज विभाग के साथ-साथ जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को भी खनन का कारोबार रोकने के लिए मुस्तैदी की आवश्यकता रहेगी।
वर्जन
तीन माह तक रोका जाएगा खनन
अभी तीन घाटों के प्रपत्र जारी नहीं किए गए है, जिसकी कार्यवाही चल रही है। वहीं, शासनादेश के क्रम में तीन माह तक बालू का खनन पूरी तरह से रोका जाएगा।
- अरविंद कुमार, जिला खनिज अधिकारी, ललितपुर।