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मदरसा में बच्चों को दी खसरा और रुबेला टीका की जानकारी
Updated Tue, 23 Oct 2018 12:41 AM IST
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मदरसा में बच्चों को दी खसरा और रुबेला टीका की जानकारी
एमआर का टीका, स्वस्थ जीवन का तरीका
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। 26 नवंबर से शुरू होने वाले मीजल्स और रुबेला अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में जोरों से तैयारियां चल रही है, इसी के चलते सोमवार को मदरसा दारुल उलूम मोहम्मदीय में खसरा और रुबेला अभियान के अंतर्गत बच्चों का अभिमुखीकरण का आयोजन किया गया। इसमें मौलाना नौमन और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. हुसैन खान ने बच्चों को खसरा और रुबेला से बचाने वाले टीका के बारे जानकारी दी। जिससे वह घर जाकर अपने अभिभावकों को इस नए टीके के बारे में जागरुक कर सके।
खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान में 9 माह से 15 वर्ष तक के हर बच्चे का प्रतिरक्षण करने के लिए हर तरह के सरकारी व गैर सरकारी स्कूल, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक एवं इंटर कॉलेज, प्ले स्कूल, क्रेच, बचपन स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, स्पेशल स्कूल, मदरसा, मकतब आदि अभी तरह के स्कूल कवर किए जा रहे हैं, जिससे एक भी बच्चा इस एमआर का टीका से वंचित होकर इन बीमारियों के वायरस का शिकार न हो पाए। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. हुसैन खान ने बताया कि खसरा एक जानलेवा रोग है जो वाइरस से फैलता है। खसरा रोग के कारण बच्चों में विकलांगता हो सकती है, असमय मृत्यु हो सकती है। प्रतिवर्ष भारत में 49200 बच्चों की मृत्यु खसरा की वजह से हो जाती है। रुबेला भी वाइरस फैलने वाला संक्रामक रोग है जिसमें बुखार, मिचली, आंखों में लालपान के लक्षण दिखाई पड़ते हैं, इसके अतिरिक्त यदि गर्भावस्था के आरंभ में रुबेला वाइरस संक्रमित हो गई महिला में जन्मजात रुबेला सिंड्रोम हो सकता है जो उसके गर्भ में पालने वाले भ्रूण एवं नवजात शिशु के लिए बेहद गंभीर हो सकता है। मौलाना नौमन ने बताया कि खसरा और रुबेला ऐसी बीमारी है जिनके बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यकता होती है। देश में सरकार और चिकित्सकों की मेहनत से इस बीमारी के टीका लगाने की पहल जारी की है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में टीकाकरण अभियान चलाकर इस बीमारी से देश को मुक्ति दिलाई जाए, इसी सिलसिले में प्रदेश में यह अभियान 26 नवंबर 2018 से शुरु किया जा रहा है। उन्होंने सभी से अपील करते हुये कहा कि अपने 9 माह से 15 साल तक के सभी बच्चों को यह टीका जरूर लगवाएं। यूनिसेफ से जिला समन्वयक दिलशाद ने बताया कि बच्चों के बेहतर भविष्य और उन्हें खतरनाक, संक्रामक व जानलेवा बीमारियों से बचाने के क्रम में यह सुनिश्चित किया गया कि वर्ष 2020 तक भारत के हर 9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चे को खसरा-रुबेला का 1 टीका देकर 1 साथ 2 खतरनाक वायरस का शिकार होने से बचाया जाए। साथ ही चेचक, पोलियो व नवजात टिटनस के वायरस को भारत से खत्म करने के बाद इन दोनों जानलेवा वायरस खसरा-रुबेला को भी देश से खत्म किया जाये। जिले के 9 माह से 15 वर्ष के लगभग 4 लाख बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में 9 माह से 15 वर्ष तक के 100% बच्चों को एमआर के टीके के जरिये खसरा-रुबेला से बचाना है और इस उम्र के अधिकतर बच्चे स्कूलों में होंगे, तो प्रथम दो सप्ताह तक स्वास्थ्य विभाग की प्रशिक्षित टीमें हर स्कूल के हर बच्चे को एमआर का यह एक टीका देने को स्कूलों में योजना के अनुसार निश्चित दिवस को पहुचेंगी।
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एमआर का टीका, स्वस्थ जीवन का तरीका
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। 26 नवंबर से शुरू होने वाले मीजल्स और रुबेला अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में जोरों से तैयारियां चल रही है, इसी के चलते सोमवार को मदरसा दारुल उलूम मोहम्मदीय में खसरा और रुबेला अभियान के अंतर्गत बच्चों का अभिमुखीकरण का आयोजन किया गया। इसमें मौलाना नौमन और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. हुसैन खान ने बच्चों को खसरा और रुबेला से बचाने वाले टीका के बारे जानकारी दी। जिससे वह घर जाकर अपने अभिभावकों को इस नए टीके के बारे में जागरुक कर सके।
खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान में 9 माह से 15 वर्ष तक के हर बच्चे का प्रतिरक्षण करने के लिए हर तरह के सरकारी व गैर सरकारी स्कूल, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक एवं इंटर कॉलेज, प्ले स्कूल, क्रेच, बचपन स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, स्पेशल स्कूल, मदरसा, मकतब आदि अभी तरह के स्कूल कवर किए जा रहे हैं, जिससे एक भी बच्चा इस एमआर का टीका से वंचित होकर इन बीमारियों के वायरस का शिकार न हो पाए। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. हुसैन खान ने बताया कि खसरा एक जानलेवा रोग है जो वाइरस से फैलता है। खसरा रोग के कारण बच्चों में विकलांगता हो सकती है, असमय मृत्यु हो सकती है। प्रतिवर्ष भारत में 49200 बच्चों की मृत्यु खसरा की वजह से हो जाती है। रुबेला भी वाइरस फैलने वाला संक्रामक रोग है जिसमें बुखार, मिचली, आंखों में लालपान के लक्षण दिखाई पड़ते हैं, इसके अतिरिक्त यदि गर्भावस्था के आरंभ में रुबेला वाइरस संक्रमित हो गई महिला में जन्मजात रुबेला सिंड्रोम हो सकता है जो उसके गर्भ में पालने वाले भ्रूण एवं नवजात शिशु के लिए बेहद गंभीर हो सकता है। मौलाना नौमन ने बताया कि खसरा और रुबेला ऐसी बीमारी है जिनके बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यकता होती है। देश में सरकार और चिकित्सकों की मेहनत से इस बीमारी के टीका लगाने की पहल जारी की है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में टीकाकरण अभियान चलाकर इस बीमारी से देश को मुक्ति दिलाई जाए, इसी सिलसिले में प्रदेश में यह अभियान 26 नवंबर 2018 से शुरु किया जा रहा है। उन्होंने सभी से अपील करते हुये कहा कि अपने 9 माह से 15 साल तक के सभी बच्चों को यह टीका जरूर लगवाएं। यूनिसेफ से जिला समन्वयक दिलशाद ने बताया कि बच्चों के बेहतर भविष्य और उन्हें खतरनाक, संक्रामक व जानलेवा बीमारियों से बचाने के क्रम में यह सुनिश्चित किया गया कि वर्ष 2020 तक भारत के हर 9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चे को खसरा-रुबेला का 1 टीका देकर 1 साथ 2 खतरनाक वायरस का शिकार होने से बचाया जाए। साथ ही चेचक, पोलियो व नवजात टिटनस के वायरस को भारत से खत्म करने के बाद इन दोनों जानलेवा वायरस खसरा-रुबेला को भी देश से खत्म किया जाये। जिले के 9 माह से 15 वर्ष के लगभग 4 लाख बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में 9 माह से 15 वर्ष तक के 100% बच्चों को एमआर के टीके के जरिये खसरा-रुबेला से बचाना है और इस उम्र के अधिकतर बच्चे स्कूलों में होंगे, तो प्रथम दो सप्ताह तक स्वास्थ्य विभाग की प्रशिक्षित टीमें हर स्कूल के हर बच्चे को एमआर का यह एक टीका देने को स्कूलों में योजना के अनुसार निश्चित दिवस को पहुचेंगी।
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