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नेमवि गबन व खुले पत्र पर भाजपा में आपसी खींचतान
Updated Sat, 16 Dec 2017 03:21 AM IST
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नेमवि गबन व खुले पत्र पर भाजपा में आपसी खींचतान
ललितपुर।
नेहरू महाविद्यालय गबन प्रकरण में न्यायालय द्वारा केंद्रीय मंत्री व सांसद उमा भारती के प्रतिनिधि को तलब किए जाने से सत्तारूढ़ दल में आपसी खींचतान तेज हो गई है। वहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम खुला पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने से पार्टी की अंतर्कलह भी सतह पर आ गई है।
भारतीय जनता पार्टी में पदाधिकारियों एवं असंतुष्टों के बीच एक लंबी लकीर खिंची हुई है। दोनों पक्ष कभी कभार ही मंच साझा करते हैं। इस तरह लंबे समय से शह और मात का खेल चल रहा है। जब जिला पंचायत चुनाव हुए थे तो उसके बाद ऑडियो क्लिप वायरल हो गया था। इसमें कई नेताओं की काफी किरकिरी हुई थी। अब निकाय चुनाव संपन्न हुए तो एक खुला पत्र वायरल हो गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नाम जारी हुए खुले पत्र में कहा गया कि नगर निकाय की जिले में चार सीटें हैं। इनमें तीन नगर पंचायत व एक नगर पालिका परिषद है। आरोप है कि समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह टिकटें बेच दी गई। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उम्मीदवारों के प्रति असंतोष रहा। वहीं, नगर पालिका परिषद का अध्यक्ष पद भी कम अंतर से जीत सकी। जिला पंचायत चुनाव में भी इसी तरह टिकटें बेची गई। यदि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रमुख नेताओं को नहीं हटाया गया तो ये लोग पार्टी की लुटिया डुबो देंगे। यह पत्र सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, नेहरू महाविद्यालय के गबन प्रकरण में सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे को न्यायालय ने तलब किया है। इसके बाद उनके विरोधियों ने उन्हें सोशल मीडिया पर निशाने पर ले लिया है। कई लोग फेसबुक व वाट्सऐप पर उनके खिलाफ जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। वहीं, सांसद प्रतिनिधि व जिलाध्यक्ष इसे नकारात्मक सोच बताकर इन मामलों से पल्ला झाड़ रहे हैं।
संघ प्रचारक भी हैं निशाने पर
खुले पत्र में भाजपा नेताओं के संघ प्रचारक भी निशाने पर हैं। उन पर भी संगठन को कमजोर करने के आरोप लगे हैं।
न्यायालय में है गबन का मामला
नेहरू महाविद्यालय में हुए गबन का मामला न्यायालय में है। जिसकी कानूनी प्रक्रिया चल रही है। प्रदीप चौबे
सांसद प्रतिनिधि
खुला पत्र के आरोप निराधार
खुला पत्र में जो आरोप लगाए गए हैं, वह पूरी तरह निराधार हैं। पाली के उम्मीदवार कैलाश चौरसिया भाजपा के मंडल महामंत्री हैं तो महरौनी के संजीव सर्राफ पार्टी के पदाधिकारी रह चुके हैं। वहीं, तालबेहट के हरिश्चंद्र रावत बार क्षेत्र से जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुके हैं। चुनाव उपरांत टिकट बेचने जैसे आरोपों का कोई मतलब नहीं है।
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रमेश कुमार सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा ललितपुर।
बैंक कर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर चुप्पी क्यों
नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अवधेश अग्रवाल ने अपनी एफआईआर में लिपिक पर बैंक कर्मियों की मिलीभगत से गबन का आरोप लगाया था, जिसमें लिपिक की गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन बैंक कर्मी आज भी स्वच्छंद हैं। कोर्ट में भी इनकी गिरफ्तारी की मांग नहीं की गई है जिससे कई सवालों ने जन्म ले लिया है।
नीरज जैन गौना, भाजपा के वरिष्ठ नेता
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ललितपुर।
नेहरू महाविद्यालय गबन प्रकरण में न्यायालय द्वारा केंद्रीय मंत्री व सांसद उमा भारती के प्रतिनिधि को तलब किए जाने से सत्तारूढ़ दल में आपसी खींचतान तेज हो गई है। वहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम खुला पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने से पार्टी की अंतर्कलह भी सतह पर आ गई है।
भारतीय जनता पार्टी में पदाधिकारियों एवं असंतुष्टों के बीच एक लंबी लकीर खिंची हुई है। दोनों पक्ष कभी कभार ही मंच साझा करते हैं। इस तरह लंबे समय से शह और मात का खेल चल रहा है। जब जिला पंचायत चुनाव हुए थे तो उसके बाद ऑडियो क्लिप वायरल हो गया था। इसमें कई नेताओं की काफी किरकिरी हुई थी। अब निकाय चुनाव संपन्न हुए तो एक खुला पत्र वायरल हो गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नाम जारी हुए खुले पत्र में कहा गया कि नगर निकाय की जिले में चार सीटें हैं। इनमें तीन नगर पंचायत व एक नगर पालिका परिषद है। आरोप है कि समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह टिकटें बेच दी गई। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उम्मीदवारों के प्रति असंतोष रहा। वहीं, नगर पालिका परिषद का अध्यक्ष पद भी कम अंतर से जीत सकी। जिला पंचायत चुनाव में भी इसी तरह टिकटें बेची गई। यदि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रमुख नेताओं को नहीं हटाया गया तो ये लोग पार्टी की लुटिया डुबो देंगे। यह पत्र सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, नेहरू महाविद्यालय के गबन प्रकरण में सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे को न्यायालय ने तलब किया है। इसके बाद उनके विरोधियों ने उन्हें सोशल मीडिया पर निशाने पर ले लिया है। कई लोग फेसबुक व वाट्सऐप पर उनके खिलाफ जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। वहीं, सांसद प्रतिनिधि व जिलाध्यक्ष इसे नकारात्मक सोच बताकर इन मामलों से पल्ला झाड़ रहे हैं।
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संघ प्रचारक भी हैं निशाने पर
खुले पत्र में भाजपा नेताओं के संघ प्रचारक भी निशाने पर हैं। उन पर भी संगठन को कमजोर करने के आरोप लगे हैं।
न्यायालय में है गबन का मामला
नेहरू महाविद्यालय में हुए गबन का मामला न्यायालय में है। जिसकी कानूनी प्रक्रिया चल रही है। प्रदीप चौबे
सांसद प्रतिनिधि
खुला पत्र के आरोप निराधार
खुला पत्र में जो आरोप लगाए गए हैं, वह पूरी तरह निराधार हैं। पाली के उम्मीदवार कैलाश चौरसिया भाजपा के मंडल महामंत्री हैं तो महरौनी के संजीव सर्राफ पार्टी के पदाधिकारी रह चुके हैं। वहीं, तालबेहट के हरिश्चंद्र रावत बार क्षेत्र से जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुके हैं। चुनाव उपरांत टिकट बेचने जैसे आरोपों का कोई मतलब नहीं है।
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रमेश कुमार सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा ललितपुर।
बैंक कर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर चुप्पी क्यों
नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अवधेश अग्रवाल ने अपनी एफआईआर में लिपिक पर बैंक कर्मियों की मिलीभगत से गबन का आरोप लगाया था, जिसमें लिपिक की गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन बैंक कर्मी आज भी स्वच्छंद हैं। कोर्ट में भी इनकी गिरफ्तारी की मांग नहीं की गई है जिससे कई सवालों ने जन्म ले लिया है।
नीरज जैन गौना, भाजपा के वरिष्ठ नेता