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औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती का प्रशिक्षण दिया
Updated Wed, 27 Jun 2018 02:44 AM IST
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औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती का प्रशिक्षण दिया
प्रशिक्षणार्थियों को बताई आधुनिक खेती की तकनीक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। पीएनबी आरसेटी ने दस दिवसीय प्रशिक्षण में 25 किसानों को औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षणार्थियों को आधुनिक खेती की तकनीक के बारे में भी विस्तार से बताया गया। औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पीएनबी के मुख्य प्रबंधक आरजे मीणा ने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। भारत की सत्तर फीसदी आबादी कृषि पर आधारित है। इसलिए किसानों का प्रशिक्षित होना आवश्यक है। यदि किसान परंपरागत खेती करें तो उसके लिए बहुत लाभदायक है। उन्होंने कहा कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती की उपज किसानों के लिए भविष्य में काफी लाभकारी होगी। प्रशिक्षणार्थियों को जो नई-नई तकनीकों की जानकारी दी, उससे वे एक सफल उद्यमी बनकर आगे बढ़ें। तकनीक कृषि सहायक तरुण जामकर ने इस प्रशिक्षण में सक्रिय सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि किसान कृषि को भरण पोषण का साधन न समझ कर इसे व्यवसाय के रूप में अपनाए, तभी उसका विकास संभव है। आरसेटी निदेशक एसएन मंडल ने कहा कि सभी किसान प्रशिक्षण में बताई गईं, तकनीक के माध्यम से खेती में बदलाव लाकर औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती अपनाएं। उन्होंने कहा कि आरसेटी बेरोजगारी दूर करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित करती है। ग्रामीण क्षेत्र के किसानों, युवाओं और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कभी भी पंजीकरण कराकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम में सफल प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ इन हाउस फैकल्टी विनोद शर्मा ने किया। इस मौके पर सुनील कुमार वच राजीव रैकवार उपस्थित रहे।
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प्रशिक्षणार्थियों को बताई आधुनिक खेती की तकनीक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। पीएनबी आरसेटी ने दस दिवसीय प्रशिक्षण में 25 किसानों को औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षणार्थियों को आधुनिक खेती की तकनीक के बारे में भी विस्तार से बताया गया। औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पीएनबी के मुख्य प्रबंधक आरजे मीणा ने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। भारत की सत्तर फीसदी आबादी कृषि पर आधारित है। इसलिए किसानों का प्रशिक्षित होना आवश्यक है। यदि किसान परंपरागत खेती करें तो उसके लिए बहुत लाभदायक है। उन्होंने कहा कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती की उपज किसानों के लिए भविष्य में काफी लाभकारी होगी। प्रशिक्षणार्थियों को जो नई-नई तकनीकों की जानकारी दी, उससे वे एक सफल उद्यमी बनकर आगे बढ़ें। तकनीक कृषि सहायक तरुण जामकर ने इस प्रशिक्षण में सक्रिय सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि किसान कृषि को भरण पोषण का साधन न समझ कर इसे व्यवसाय के रूप में अपनाए, तभी उसका विकास संभव है। आरसेटी निदेशक एसएन मंडल ने कहा कि सभी किसान प्रशिक्षण में बताई गईं, तकनीक के माध्यम से खेती में बदलाव लाकर औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती अपनाएं। उन्होंने कहा कि आरसेटी बेरोजगारी दूर करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित करती है। ग्रामीण क्षेत्र के किसानों, युवाओं और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कभी भी पंजीकरण कराकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम में सफल प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ इन हाउस फैकल्टी विनोद शर्मा ने किया। इस मौके पर सुनील कुमार वच राजीव रैकवार उपस्थित रहे।