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किसानों के सबसे बड़े नेता थे चौधरी चरण सिंह
Updated Sun, 24 Dec 2017 02:09 AM IST
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किसानों के सबसे बड़े नेता थे चौधरी चरण सिंह
ललितपुर।
पहलवान गुरुदीन स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय पनारी में किसान दिवस के मौके पर निबंध प्रतियोगिता कैरियर काउन्सिलिंग और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में पधारे जिला प्रोवेशन अधिकारी नरेंद्र कुमार गुप्ता, पर्यटन सहायक फिरोज इकबाल (डायमंड) तथा प्रबन्धक डॉ. सूर्यनाथ यादव ने किया।
इस अवसर पर जिला प्रोवेशन अधिकारी ने बच्चों को रोजगार प्राप्त करने के गुण सिखाएं तथा रोजगार अर्जित करने के उपाय बताऐं। सहायक सूचना अधिकारी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि एकाग्रता और चिंतनशीलता ही मनुष्य को महान बनाता है। पर्यटन सहायक फिरोज डायमंड ने बताया कि चिंतनशीलता के लिए विचार और कल्पना अति आवश्यक है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति सभ्यता और शिष्टाचार को विकसित करने के साथ-2 घूमना भी चाहिए। महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. सूर्यनाथ यादव ने किसान दिवस के महत्व को बताते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह स्वतंत्र भारत के सातवें प्रधानमंत्री थे। उन्होंने किसानों के उत्पान के लिए बहुत सारी लाभकारी योजनाएं क्रियान्वित की और किसानों की दशा को सुदढ़ बनाने के लिए अपना जन्म दिवस भी किसान दिवस के रुप में समर्पित किया। इसी क्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य डा. सूफिया ने कहा कि चौधरी चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री ही नहीं वरन संपूर्ण देश के किसानों के कल्याणकारी नेता थे। इस अवसर पर महाविद्यालय का समस्त स्टॉफ व छात्राएं उपस्थित रहीं।
वहीं पहलवान गुरुदीन प्रशिक्षण कॉलेज पनारी में भी चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन किसान दिवस के रूप में मनाया गया। इस मौके पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अलका यादव ने चौधरी चरण सिंह जी की प्रतिमा पर पुष्पार्चन कर व दीप प्रज्वलित किया। चौधरी चरण सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए प्राचार्या ने कहा कि इनका जन्म 23 दिसंबर 1902 को नूरपुर गांव जनपद गाजियाबाद में एक जाट परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी और नैतिक मूल्यों की शिक्षा अपने पिता से विरासत में मिली। आगरा विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा प्राप्त की और 1928 से गाजियाबाद में वकालत आरंभ की। 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। सन 1952 में उन्होंने जमीदार प्रथा का उन्मूलन किया तथा 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून पारित कराया। इसी क्रम में विधि प्रवक्ता आशीष अग्रवाल समेत अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस मौके पर महाविद्यालय में निवन्ध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें महाविद्यालय की छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर नारायण प्रसाद, प्रसन्न कुमार, नसीम खान, नरेंद्र सिंह, रामलखन, अनिल, जितेंद्र ताम्रकार, मनोज दुबे, सतीश सोनगिरकर, स्वतंत्र व्यास, रत्ना याज्ञिक, कामिनी, शोभाराम, गोपाल, जाहर, बालकिशन, कल्यान उपस्थित रहे।
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ललितपुर।
पहलवान गुरुदीन स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय पनारी में किसान दिवस के मौके पर निबंध प्रतियोगिता कैरियर काउन्सिलिंग और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में पधारे जिला प्रोवेशन अधिकारी नरेंद्र कुमार गुप्ता, पर्यटन सहायक फिरोज इकबाल (डायमंड) तथा प्रबन्धक डॉ. सूर्यनाथ यादव ने किया।
इस अवसर पर जिला प्रोवेशन अधिकारी ने बच्चों को रोजगार प्राप्त करने के गुण सिखाएं तथा रोजगार अर्जित करने के उपाय बताऐं। सहायक सूचना अधिकारी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि एकाग्रता और चिंतनशीलता ही मनुष्य को महान बनाता है। पर्यटन सहायक फिरोज डायमंड ने बताया कि चिंतनशीलता के लिए विचार और कल्पना अति आवश्यक है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति सभ्यता और शिष्टाचार को विकसित करने के साथ-2 घूमना भी चाहिए। महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. सूर्यनाथ यादव ने किसान दिवस के महत्व को बताते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह स्वतंत्र भारत के सातवें प्रधानमंत्री थे। उन्होंने किसानों के उत्पान के लिए बहुत सारी लाभकारी योजनाएं क्रियान्वित की और किसानों की दशा को सुदढ़ बनाने के लिए अपना जन्म दिवस भी किसान दिवस के रुप में समर्पित किया। इसी क्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य डा. सूफिया ने कहा कि चौधरी चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री ही नहीं वरन संपूर्ण देश के किसानों के कल्याणकारी नेता थे। इस अवसर पर महाविद्यालय का समस्त स्टॉफ व छात्राएं उपस्थित रहीं।
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वहीं पहलवान गुरुदीन प्रशिक्षण कॉलेज पनारी में भी चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन किसान दिवस के रूप में मनाया गया। इस मौके पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अलका यादव ने चौधरी चरण सिंह जी की प्रतिमा पर पुष्पार्चन कर व दीप प्रज्वलित किया। चौधरी चरण सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए प्राचार्या ने कहा कि इनका जन्म 23 दिसंबर 1902 को नूरपुर गांव जनपद गाजियाबाद में एक जाट परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी और नैतिक मूल्यों की शिक्षा अपने पिता से विरासत में मिली। आगरा विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा प्राप्त की और 1928 से गाजियाबाद में वकालत आरंभ की। 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। सन 1952 में उन्होंने जमीदार प्रथा का उन्मूलन किया तथा 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून पारित कराया। इसी क्रम में विधि प्रवक्ता आशीष अग्रवाल समेत अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस मौके पर महाविद्यालय में निवन्ध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें महाविद्यालय की छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर नारायण प्रसाद, प्रसन्न कुमार, नसीम खान, नरेंद्र सिंह, रामलखन, अनिल, जितेंद्र ताम्रकार, मनोज दुबे, सतीश सोनगिरकर, स्वतंत्र व्यास, रत्ना याज्ञिक, कामिनी, शोभाराम, गोपाल, जाहर, बालकिशन, कल्यान उपस्थित रहे।
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