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चेयरमैन हरदेव ने कंपनी बाग एवं पुस्तकालय का कराया विकास
Updated Sat, 04 Nov 2017 01:43 AM IST
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चेयरमैन हरदेव ने संवारा था कंपनी बाग और पुस्तकालय
ललितपुर।
स्वतंत्रता सेनानी बृजनंदन किलेदार का कार्यकाल पूर्ण होने के उपरांत नगर पालिका अध्यक्ष के अगले हरदेव प्रसाद चौबे चुने गए। उन्होंने शिक्षा का विस्तार करने के साथ पेयजल, कंपनी बाग और पुस्तकालय की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया।
मुहल्ला चौबयाना दो भागों में विभाजित था। चौबयाना नंबर एक सीट से हरदेव चौबे तो चौबयाना नंबर दो सीट से नरसिंह दास कटारे निर्वाचित हुए थे। उस दौरान नगर में 17 वार्ड हुआ करते थे। वर्ष 1950 में जब पालिका के सभी मेंबर चुनकर आए तो उन्होंने चौबयाना नंबर एक के सदस्य हरदेव प्रसाद चौबे को अध्यक्ष चुना। उनका कार्यकाल दो जून 1951 को पूर्ण हो गया था। इस छोटे से कार्यकाल में उन्होंने शिक्षण संस्थाओं पर ध्यान देते हुए शिक्षा का विस्तार किया। वहीं, नगरवासियों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराई। इस संबंध में डॉ. दीपक चौबे का कहना है कि उनके दादा ने शुरुआत में कपड़े व सोने, चांदी का व्यापार किया है। इसी दौरान मुहल्लेवासियों ने उनसे चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। इस चुनाव में उन्हें शानदार जीत मिली। पालिका के मेंबरों ने भी उन्हें हाथोंहाथ लेते हुए अध्यक्ष चुन लिया। उन्होंने पालिका की आय बढ़ाने पर ध्यान दिया तो कई जनहित के कार्य किए। कंपनी बाग को संवारा गया। वहीं, पुस्तकालय के विकास में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। एक समय उनका परिवार राजनीति के केंद्र बिंदू आ गया था।
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ललितपुर।
स्वतंत्रता सेनानी बृजनंदन किलेदार का कार्यकाल पूर्ण होने के उपरांत नगर पालिका अध्यक्ष के अगले हरदेव प्रसाद चौबे चुने गए। उन्होंने शिक्षा का विस्तार करने के साथ पेयजल, कंपनी बाग और पुस्तकालय की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया।
मुहल्ला चौबयाना दो भागों में विभाजित था। चौबयाना नंबर एक सीट से हरदेव चौबे तो चौबयाना नंबर दो सीट से नरसिंह दास कटारे निर्वाचित हुए थे। उस दौरान नगर में 17 वार्ड हुआ करते थे। वर्ष 1950 में जब पालिका के सभी मेंबर चुनकर आए तो उन्होंने चौबयाना नंबर एक के सदस्य हरदेव प्रसाद चौबे को अध्यक्ष चुना। उनका कार्यकाल दो जून 1951 को पूर्ण हो गया था। इस छोटे से कार्यकाल में उन्होंने शिक्षण संस्थाओं पर ध्यान देते हुए शिक्षा का विस्तार किया। वहीं, नगरवासियों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराई। इस संबंध में डॉ. दीपक चौबे का कहना है कि उनके दादा ने शुरुआत में कपड़े व सोने, चांदी का व्यापार किया है। इसी दौरान मुहल्लेवासियों ने उनसे चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। इस चुनाव में उन्हें शानदार जीत मिली। पालिका के मेंबरों ने भी उन्हें हाथोंहाथ लेते हुए अध्यक्ष चुन लिया। उन्होंने पालिका की आय बढ़ाने पर ध्यान दिया तो कई जनहित के कार्य किए। कंपनी बाग को संवारा गया। वहीं, पुस्तकालय के विकास में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। एक समय उनका परिवार राजनीति के केंद्र बिंदू आ गया था।
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