{"_id":"596fbd4d4f1c1bc1378b46bc","slug":"191500495181-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बगैर लाइसेंस के मीट बेचना पड़ेगा महंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बगैर लाइसेंस के मीट बेचना पड़ेगा महंगा
Updated Thu, 20 Jul 2017 01:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बगैर लाइसेंस के मीट बेचना पड़ेगा महंगा
ललितपुर।
जिले में लाइसेंस के बगैर मीट बेचना व्यवसायियों को महंगा पड़ेगा। न्यायालय ने ऐसे व्यवसायियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। बीते दिनों एडीएम की न्यायालय ने लाइसेंस नहीं पाए जाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश बड़ापुरा के एक व्यवसायी को सुनाया है।
योगी सरकार ने मीट की अवैध बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे व्यवसायियों पर लाइसेंस लेने का दबाव बढ़ गया है। बीते माहों में मीट व्यवसायियों ने लाइसेंस के नवीनीकरण और नये लाइसेंस के लिए नगर पालिका परिषद में आवेदन किया था। एक माह बाद भी व्यवसायियों के न तो नये लाइसेंस बन सके हैं और न ही पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण हो सका है। इसकी प्रमुख वजह शासन से अभी तक नगर पालिका परिषद को दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हो पाए हैं। वहीं, जिले में स्लाटर हाउस की कमी भी लाइसेंस जारी होने में अवरोधक का काम कर रही है। जिस स्थान पर कभी स्लाटर हाउस हुआ करता था, वहां अब कब्रिस्तान है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ने पूर्व में इसे खुलवाने के लिए जमीन की तलाश की है, जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। उधर, मीट व्यवसायी शाहिद कुरैशी का कहना है कि पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन भरा है। कई अन्य व्यवसायियों ने भी आवेदन किया है। नगर पालिका परिषद की ओर से देरी हो रही है। व्यवसायी लाइसेंस कराने के लिए तैयार हैं। मु. हनीफ का कहना है कि रमजान के समय लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। उस समय नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ने शासन से कोई आदेश आने तक ठहर जाने के लिए कहा था। करीब एक महीन हो गया है, लाइसेंस का मामला जस का तस है। इधर, अपर जिलाधिकारी की न्यायालय ने एक पुराने मामले की सुनवाई करते हुए बड़ापुरा निवासी नदीम कुरैशी उर्फ बाला को बगैर लाइसेंस का दोषी मानते हुए उसे पांच हजार का जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया है। एक अन्य व्यवसायी का मामला एडीएम की न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में मीट व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
ये हैं मानक
मंदिर से 100 मीटर की दूरी हो, दुकान पूरी तरह कवर्ड व फ्रीजर हो, दुकानें बस्ती से बाहर हो, स्लाटर हाउस हो, पशु वध से पहले स्वास्थ्य परीक्षण मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से कराया गया हो। जो व्यवसायी इन मानकों को पूरा करेगा, उनका ही लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन जारी किया जाएगा।
विज्ञापन
नपा के पास केवल एनओसी का अधिकार
वर्ष 2011 के बाद से नगर पालिका परिषद के पास जमीन उपयुक्त है या नहीं, इसकी एनओसी जारी करने का अधिकार रह गया है। अब खाद्य और औषधि विभाग के पास लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी आ गई है। इतना ही नहीं, शासन ने आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी है।
किसी को जारी नहीं लाइसेंस
नगर में किसी भी व्यवसायी को मीट बिक्री का लाइसेंस जारी नहीं है। छोटे दुकानदारों का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है तो बड़े दुकानदारों को लाइसेंस दिए जाते हैं। जो व्यवसायी दुकानों पर पशु वध कर रहे हैं वह गलत है। स्लाटर हाउस के अलावा पशुओं को नहीं काटा जा सकता है।
सूरेलाल
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ललितपुर।
विज्ञापन
ललितपुर।
जिले में लाइसेंस के बगैर मीट बेचना व्यवसायियों को महंगा पड़ेगा। न्यायालय ने ऐसे व्यवसायियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। बीते दिनों एडीएम की न्यायालय ने लाइसेंस नहीं पाए जाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश बड़ापुरा के एक व्यवसायी को सुनाया है।
योगी सरकार ने मीट की अवैध बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे व्यवसायियों पर लाइसेंस लेने का दबाव बढ़ गया है। बीते माहों में मीट व्यवसायियों ने लाइसेंस के नवीनीकरण और नये लाइसेंस के लिए नगर पालिका परिषद में आवेदन किया था। एक माह बाद भी व्यवसायियों के न तो नये लाइसेंस बन सके हैं और न ही पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण हो सका है। इसकी प्रमुख वजह शासन से अभी तक नगर पालिका परिषद को दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हो पाए हैं। वहीं, जिले में स्लाटर हाउस की कमी भी लाइसेंस जारी होने में अवरोधक का काम कर रही है। जिस स्थान पर कभी स्लाटर हाउस हुआ करता था, वहां अब कब्रिस्तान है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ने पूर्व में इसे खुलवाने के लिए जमीन की तलाश की है, जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। उधर, मीट व्यवसायी शाहिद कुरैशी का कहना है कि पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन भरा है। कई अन्य व्यवसायियों ने भी आवेदन किया है। नगर पालिका परिषद की ओर से देरी हो रही है। व्यवसायी लाइसेंस कराने के लिए तैयार हैं। मु. हनीफ का कहना है कि रमजान के समय लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। उस समय नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ने शासन से कोई आदेश आने तक ठहर जाने के लिए कहा था। करीब एक महीन हो गया है, लाइसेंस का मामला जस का तस है। इधर, अपर जिलाधिकारी की न्यायालय ने एक पुराने मामले की सुनवाई करते हुए बड़ापुरा निवासी नदीम कुरैशी उर्फ बाला को बगैर लाइसेंस का दोषी मानते हुए उसे पांच हजार का जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया है। एक अन्य व्यवसायी का मामला एडीएम की न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में मीट व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
विज्ञापन
ये हैं मानक
मंदिर से 100 मीटर की दूरी हो, दुकान पूरी तरह कवर्ड व फ्रीजर हो, दुकानें बस्ती से बाहर हो, स्लाटर हाउस हो, पशु वध से पहले स्वास्थ्य परीक्षण मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से कराया गया हो। जो व्यवसायी इन मानकों को पूरा करेगा, उनका ही लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन जारी किया जाएगा।
विज्ञापन
नपा के पास केवल एनओसी का अधिकार
वर्ष 2011 के बाद से नगर पालिका परिषद के पास जमीन उपयुक्त है या नहीं, इसकी एनओसी जारी करने का अधिकार रह गया है। अब खाद्य और औषधि विभाग के पास लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी आ गई है। इतना ही नहीं, शासन ने आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी है।
किसी को जारी नहीं लाइसेंस
नगर में किसी भी व्यवसायी को मीट बिक्री का लाइसेंस जारी नहीं है। छोटे दुकानदारों का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है तो बड़े दुकानदारों को लाइसेंस दिए जाते हैं। जो व्यवसायी दुकानों पर पशु वध कर रहे हैं वह गलत है। स्लाटर हाउस के अलावा पशुओं को नहीं काटा जा सकता है।
सूरेलाल
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ललितपुर।