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शिक्षा: मनमानी फीस वसूलने पर गवानी होगी स्कूल की मान्यता
Updated Thu, 03 May 2018 01:48 AM IST
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मनमानी फीस वसूलने पर गवानी होगी स्कूल की मान्यता
पहले बार में एक लाख, दूसरे बार में पांच लाख और तीसरी बार में निरस्त होगी मान्यता
फीस बढ़ाने के लिए समिति से लेनी होगी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश 2018 को प्रभारी ढंग से लागू करने के लिए डीएम मानवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के समस्त वित्तविहीन मान्यता प्राप्त, अंग्रेजी माध्यम, सीबीएसई, आईसीएसई के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की बैठक हुई।
इस बैठक में डीएम ने समस्त प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को ड्रेस, किताब आदि किसी निश्चित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य न करें। इसके साथ ही अध्यादेश में दिए निर्देशों का अनुपालन करें। यदि कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया अध्यादेश उन सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा, जिनका वार्षिक शुल्क 20 हजार रुपये से अधिक है। इसके दायरे में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आइसीएसई व अन्य बोर्ड से मान्यता प्राप्त संबद्ध स्कूल सहित वे विद्यालय भी आएंगे, जिन्हें अल्पसंख्यक दर्जा हासिल है। यह व्यवस्था प्री-स्कूलों पर लागू नहीं होगी। निजमी स्कूल पांच साल से पहले विद्यार्थियों की यूनीफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। यदि निजी स्कूल पांच साल से पहले ऐसा करते हैं तो उन्हें मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित मंडलीय शुल्क नियामक समिति से मंजूरी लेनी होगी। फीस वृद्धि का यह फॉर्मूला शैक्षिक सत्र 2018-19 से लागू होगा। इसके लिए सत्र 2015-16 को आधार वर्ष माना गया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित अध्यादेश में यह व्यवस्था है कि स्कूल को अगले शैक्षिक सत्र की शुरुआत से 60 दिन पहले आगामी सत्र में प्रस्तावित फीस को अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित कर उसे सार्वजनिक करना होगा। सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया कि 10 मई 2018 तक विद्यालय की वेब साइड बनाकर उसमें फीस का विवरण, ड्रेस आदि का विवरण अपलोड करना सुनिश्चित करें। बैठक में सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व प्रबंधक उपस्थित रहे।
शुल्क के मानक कर दिए गए तय
पहली बार यह व्यवस्था लागू होने पर स्कूल को शैक्षिक सत्र की शुरुआत के 30 दिनों के अंदर फीस को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा। छात्रों से वसूली जाने वाली फीस को दो वर्गों में बांटा गया है। संभावित और वैकल्पिक शुल्क संघटक। संभावित शुल्क संघटक के तहत विवरण पुस्तिका व पंजीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और संयुक्त वार्षिक ट्यूशन फीस शामिल होगी। स्कूल छात्रों से विवरण पुस्तिका और पंजीकरण शुल्क सिर्फ प्रवेश के समय ले सकेंगे। प्रवेश शुल्क स्कूल में दाखिले के समय सिर्फ एक बार लिया जाएगा। छात्रों से कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा। वैकल्पिक शुल्क संघटक के तहत विभिन्न क्रियाकलापों और स्कूल की ओर से दी गईं सुविधाओं के लिए देय शुल्क शामिल होगा जिसे जमा करना बाध्यकारी नहीं होगा। इसमें आवागमन, बोर्डिंग व भोजन की सुविधाओं, शैक्षिक भ्रमण, स्थानीय दौरा तथा अन्य क्रियाकलापों के लिए निर्धारित शुल्क शामिल होगा। जो छात्र यह सुविधा लेना चाहेंगे, उनके अभिभावकों को उसके लिए तय फीस देनी होगी। प्रत्येक फीस के लिए छात्रों को रसीद दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय का एक कोष होगा जिसमें छात्रों को दी गईं सुविधाओं के लिए उनसे प्राप्त धनराशि और स्कूल परिसर में आयोजित व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय शामिल होगी। व्यावसायिक गतिविधियों से प्राप्त होने वाली आय स्कूल के खाते में जमा की जाएगी, प्रबंध समिति ट्रस्ट के खाते में नहीं। फीस को लेकर स्कूल के छात्रों व उनके अभिभावकों तथा अभिभावक संघ की शिकायतों के निस्तारण के लिए मंडलायनुक्त की अध्यक्षता में मंडलीय शुल्क विनियामक समिति गठित की जाएगी। जिसे सिविल व अपीलीय अदालत की शक्तियां प्राप्त होंगी। अधिसूचित फीस से अधिक लिये गए शुल्क को छात्र को वापस करने के निर्देश के साथ समिति को स्कूल प्रबंधन को आर्थिक दंड देने का अधिकार होगा। समिति के फैसले से असंतुष्ट स्कूल प्रबंध समिति निर्णय प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर राज्य स्ववित्त पोषित विद्यालय प्राधिकरण को अपील कर सकते हैं। अध्यादेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए हर मंडल में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में मंडलीय शुल्क नियामक समिति गठित होगी। समिति प्रावधान के पहली बार उल्लंघन पर 1 लाख रु. और दूसरी बार उल्लंघन पर 5 लाख रु.का जुर्माना लगाएगी। तीसरी बार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता वापस ली जाएगी।
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पहले बार में एक लाख, दूसरे बार में पांच लाख और तीसरी बार में निरस्त होगी मान्यता
फीस बढ़ाने के लिए समिति से लेनी होगी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश 2018 को प्रभारी ढंग से लागू करने के लिए डीएम मानवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के समस्त वित्तविहीन मान्यता प्राप्त, अंग्रेजी माध्यम, सीबीएसई, आईसीएसई के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की बैठक हुई।
इस बैठक में डीएम ने समस्त प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को ड्रेस, किताब आदि किसी निश्चित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य न करें। इसके साथ ही अध्यादेश में दिए निर्देशों का अनुपालन करें। यदि कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया अध्यादेश उन सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा, जिनका वार्षिक शुल्क 20 हजार रुपये से अधिक है। इसके दायरे में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आइसीएसई व अन्य बोर्ड से मान्यता प्राप्त संबद्ध स्कूल सहित वे विद्यालय भी आएंगे, जिन्हें अल्पसंख्यक दर्जा हासिल है। यह व्यवस्था प्री-स्कूलों पर लागू नहीं होगी। निजमी स्कूल पांच साल से पहले विद्यार्थियों की यूनीफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। यदि निजी स्कूल पांच साल से पहले ऐसा करते हैं तो उन्हें मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित मंडलीय शुल्क नियामक समिति से मंजूरी लेनी होगी। फीस वृद्धि का यह फॉर्मूला शैक्षिक सत्र 2018-19 से लागू होगा। इसके लिए सत्र 2015-16 को आधार वर्ष माना गया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित अध्यादेश में यह व्यवस्था है कि स्कूल को अगले शैक्षिक सत्र की शुरुआत से 60 दिन पहले आगामी सत्र में प्रस्तावित फीस को अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित कर उसे सार्वजनिक करना होगा। सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया कि 10 मई 2018 तक विद्यालय की वेब साइड बनाकर उसमें फीस का विवरण, ड्रेस आदि का विवरण अपलोड करना सुनिश्चित करें। बैठक में सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व प्रबंधक उपस्थित रहे।
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शुल्क के मानक कर दिए गए तय
पहली बार यह व्यवस्था लागू होने पर स्कूल को शैक्षिक सत्र की शुरुआत के 30 दिनों के अंदर फीस को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा। छात्रों से वसूली जाने वाली फीस को दो वर्गों में बांटा गया है। संभावित और वैकल्पिक शुल्क संघटक। संभावित शुल्क संघटक के तहत विवरण पुस्तिका व पंजीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और संयुक्त वार्षिक ट्यूशन फीस शामिल होगी। स्कूल छात्रों से विवरण पुस्तिका और पंजीकरण शुल्क सिर्फ प्रवेश के समय ले सकेंगे। प्रवेश शुल्क स्कूल में दाखिले के समय सिर्फ एक बार लिया जाएगा। छात्रों से कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा। वैकल्पिक शुल्क संघटक के तहत विभिन्न क्रियाकलापों और स्कूल की ओर से दी गईं सुविधाओं के लिए देय शुल्क शामिल होगा जिसे जमा करना बाध्यकारी नहीं होगा। इसमें आवागमन, बोर्डिंग व भोजन की सुविधाओं, शैक्षिक भ्रमण, स्थानीय दौरा तथा अन्य क्रियाकलापों के लिए निर्धारित शुल्क शामिल होगा। जो छात्र यह सुविधा लेना चाहेंगे, उनके अभिभावकों को उसके लिए तय फीस देनी होगी। प्रत्येक फीस के लिए छात्रों को रसीद दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय का एक कोष होगा जिसमें छात्रों को दी गईं सुविधाओं के लिए उनसे प्राप्त धनराशि और स्कूल परिसर में आयोजित व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय शामिल होगी। व्यावसायिक गतिविधियों से प्राप्त होने वाली आय स्कूल के खाते में जमा की जाएगी, प्रबंध समिति ट्रस्ट के खाते में नहीं। फीस को लेकर स्कूल के छात्रों व उनके अभिभावकों तथा अभिभावक संघ की शिकायतों के निस्तारण के लिए मंडलायनुक्त की अध्यक्षता में मंडलीय शुल्क विनियामक समिति गठित की जाएगी। जिसे सिविल व अपीलीय अदालत की शक्तियां प्राप्त होंगी। अधिसूचित फीस से अधिक लिये गए शुल्क को छात्र को वापस करने के निर्देश के साथ समिति को स्कूल प्रबंधन को आर्थिक दंड देने का अधिकार होगा। समिति के फैसले से असंतुष्ट स्कूल प्रबंध समिति निर्णय प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर राज्य स्ववित्त पोषित विद्यालय प्राधिकरण को अपील कर सकते हैं। अध्यादेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए हर मंडल में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में मंडलीय शुल्क नियामक समिति गठित होगी। समिति प्रावधान के पहली बार उल्लंघन पर 1 लाख रु. और दूसरी बार उल्लंघन पर 5 लाख रु.का जुर्माना लगाएगी। तीसरी बार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता वापस ली जाएगी।
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