{"_id":"5a4d3a064f1c1b0b788b64f8","slug":"171515010566-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह ग्राम पंचायतों में रोजगार से दूर मनरेगा श्रमिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह ग्राम पंचायतों में रोजगार से दूर मनरेगा श्रमिक
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छह ग्राम पंचायतों में रोजगार से दूर मनरेगा श्रमिक
ललितपुर। जिले में रबी फसल की बुवाई व सिंचाई पूरी होने के साथ ही श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। वर्तमान में अभी छह ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम प्रारंभ नहीं हो पाए हैं।
जिले में एक लाख से ज्यादा कार्डधारक हैं, जिनमें से अब तक 48862 कार्डधारकों को रोजगार ही दिलाया जा सका है। इसकी वजह ग्राम पंचायतों में नियमित काम नहीं चल पा रहे हैं। वर्तमान में भी कुल चार सौ सोलह में से चार सौ दस ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। ब्लाक मड़ावरा की ग्राम पंचायत वनगुवां, वारचौन, धवा, गुढ़ा बुजुर्ग, जखौरा में ग्राम पंचायत छिपाई, बिरधा में मैरतीकलां में अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। इस मामले में ब्लाक बार, तालबेहट व महरौनी अव्वल चल रहे हैं। इन ब्लाकों की सभी ग्राम पंचायतों में काम प्रारंभ होने की बात कही जा रही है। वहीं, रबी फसल की बुवाई व सिंचाई का काम पूरा होते ही कृषि से जुड़े मजदूरों के सामने रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है। जनपद मुख्यालय पर लग रही मजदूरों की भीड़ देखकर इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यदि इसी तरह मनरेगा की स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में श्रमिकों के सामने रोजगार का भीषण संकट खड़ा हो सकता है।
काम प्रारंभ कराने के हो रहे प्रयास
जिले की सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत काम प्रारंभ कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिन ग्राम पंचायतों में अभी तक काम शुरू नहीं हुए हैं, वहां काम चालू कराया जाएगा।
विज्ञापन
जय सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार
समय से पहले की गई बांध की बाई नहर बंद
सिंचाई अफसर बोले, जामनी बांध में पानी हुआ कम
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जामनी बांध की नहरें बंद होने से क्षेत्र के दर्जनों किसानों के सामने सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई है। किसानों का आरोप है कि तय समय से पहले नहर बंद किए जाने से तमाम रकवा सिंचाई से छूट हो गया है। ऐसे में दर्जनों किसानों की फसलें सूखने की स्थिति बन गई है।
इस बार जिले में औसत से काफी कम बारिश हुई है। जिस वजह से अधिकांश बांधों में पानी का लेबल कम बना हुआ है। बीते महीनों में सिंचाई विभाग के अफसरों ने किसानों को रबी फसल के दौरान पानी देने के लिए नहर का रोस्टर जारी किया था। जिसमें जामनी बांध की बायी नहर तय समय से पहले ही बंद कर दी गई है। जिससे दर्जनों किसानों की फसलों की सिंचाई नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि सात जनवरी तक नहर का संचालन होना था। जिसके मद्देनजर कई किसान निश्चिंत होकर अपने खेत तक पानी के आने के इंतजार में बैठे थे। लेकिन, विभाग ने नहर को पहले ही बंद कर दिया। यदि नहर दुबारा नहीं खोली गई तो उनकी फसलों की सिंचाई कैसे होगी? इसको लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह जारी हुआ था विभागीय रोस्टर
रबी फसल की सिंचाई के लिए नहर खोलने का रोस्टर जारी किया गया था। जिसमें जामनी बांध की दायी नहर 31 दिसंबर 17 और बायी नहर को बंद करने का समय सात जनवरी 18 तय किया गया था। लेकिन इसे तय समय से पहले ही बंद कर दिया गया है।
बांध में हो गया पानी कम
जामनी बांध में पानी का स्तर कम हो गया है। वहीं, भविष्य में अंजली माता का मेला आयोजित होना है तो गर्मियों में पशुओं के पीने के पानी की जरूरत को देखते हुए बांध की नहर बंद कर दी गई है। वर्तमान में किसानों की सिंचाई की समस्या कहीं भी नहीं है।
बीबी सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड ललितपुर।
विज्ञापन
ललितपुर। जिले में रबी फसल की बुवाई व सिंचाई पूरी होने के साथ ही श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। वर्तमान में अभी छह ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम प्रारंभ नहीं हो पाए हैं।
जिले में एक लाख से ज्यादा कार्डधारक हैं, जिनमें से अब तक 48862 कार्डधारकों को रोजगार ही दिलाया जा सका है। इसकी वजह ग्राम पंचायतों में नियमित काम नहीं चल पा रहे हैं। वर्तमान में भी कुल चार सौ सोलह में से चार सौ दस ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। ब्लाक मड़ावरा की ग्राम पंचायत वनगुवां, वारचौन, धवा, गुढ़ा बुजुर्ग, जखौरा में ग्राम पंचायत छिपाई, बिरधा में मैरतीकलां में अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। इस मामले में ब्लाक बार, तालबेहट व महरौनी अव्वल चल रहे हैं। इन ब्लाकों की सभी ग्राम पंचायतों में काम प्रारंभ होने की बात कही जा रही है। वहीं, रबी फसल की बुवाई व सिंचाई का काम पूरा होते ही कृषि से जुड़े मजदूरों के सामने रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है। जनपद मुख्यालय पर लग रही मजदूरों की भीड़ देखकर इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यदि इसी तरह मनरेगा की स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में श्रमिकों के सामने रोजगार का भीषण संकट खड़ा हो सकता है।
विज्ञापन
काम प्रारंभ कराने के हो रहे प्रयास
जिले की सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत काम प्रारंभ कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिन ग्राम पंचायतों में अभी तक काम शुरू नहीं हुए हैं, वहां काम चालू कराया जाएगा।
विज्ञापन
जय सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार
समय से पहले की गई बांध की बाई नहर बंद
सिंचाई अफसर बोले, जामनी बांध में पानी हुआ कम
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जामनी बांध की नहरें बंद होने से क्षेत्र के दर्जनों किसानों के सामने सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई है। किसानों का आरोप है कि तय समय से पहले नहर बंद किए जाने से तमाम रकवा सिंचाई से छूट हो गया है। ऐसे में दर्जनों किसानों की फसलें सूखने की स्थिति बन गई है।
इस बार जिले में औसत से काफी कम बारिश हुई है। जिस वजह से अधिकांश बांधों में पानी का लेबल कम बना हुआ है। बीते महीनों में सिंचाई विभाग के अफसरों ने किसानों को रबी फसल के दौरान पानी देने के लिए नहर का रोस्टर जारी किया था। जिसमें जामनी बांध की बायी नहर तय समय से पहले ही बंद कर दी गई है। जिससे दर्जनों किसानों की फसलों की सिंचाई नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि सात जनवरी तक नहर का संचालन होना था। जिसके मद्देनजर कई किसान निश्चिंत होकर अपने खेत तक पानी के आने के इंतजार में बैठे थे। लेकिन, विभाग ने नहर को पहले ही बंद कर दिया। यदि नहर दुबारा नहीं खोली गई तो उनकी फसलों की सिंचाई कैसे होगी? इसको लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह जारी हुआ था विभागीय रोस्टर
रबी फसल की सिंचाई के लिए नहर खोलने का रोस्टर जारी किया गया था। जिसमें जामनी बांध की दायी नहर 31 दिसंबर 17 और बायी नहर को बंद करने का समय सात जनवरी 18 तय किया गया था। लेकिन इसे तय समय से पहले ही बंद कर दिया गया है।
बांध में हो गया पानी कम
जामनी बांध में पानी का स्तर कम हो गया है। वहीं, भविष्य में अंजली माता का मेला आयोजित होना है तो गर्मियों में पशुओं के पीने के पानी की जरूरत को देखते हुए बांध की नहर बंद कर दी गई है। वर्तमान में किसानों की सिंचाई की समस्या कहीं भी नहीं है।
बीबी सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड ललितपुर।