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कम उम्र में विवाह होने से नहीं हो पाती लड़कियां परिपक्व
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कम उम्र में विवाह होने से नहीं हो पाती लड़कियां परिपक्व
ललितपुर। जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड लाइन ने बाल विवाह रोकथाम के लिए जन जागरूकता कार्यशाला में बाल विवाह पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि कम उम्र में विवाह करने से लड़कियां परिपक्व नहीं हो पाती है। इससे बच्चे कुपोषित पैदा होते हैं।
संरक्षण अधिकारी पंकज कुमार ने बाल विवाह पर चर्चा करते हुए बताया कि इस तरह के विवाह अक्सर अक्षय तृतीया पर किए जाते हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 06 में से 01 महिला की शादी 18 वर्ष से कम आयु में होती है। महिला कल्याण अधिकारी ममता श्रीवास ने बाल विवाह के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आमतौर पर परिवार में लड़कियों को बोझ के रूप में देखा जाता है और समाज की रूढ़िवादी परम्परा के कारण उनकी शादी जल्दी करा दी जाती है। जिला समन्वयक रागिनी ने बाल विवाह कराने वाले और उसमें शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध दंड के रूप में 02 साल का कठोर कारावास अथवा एक लाख जुर्माना या दोनो का प्रावधान है। साईं ज्योति सेवा समिति के महेश रिछारिया ने कहा कि कम उम्र में विवाह करने से लड़कियां परिपक्व नहीं हो पाती हैं। इस प्रकार का मामला आने पर पुलिस विभाग, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति, चाइल्डलाइन-1098, पुलिस हेल्पलाइन नं 100, महिला हेल्पलाइन 181 एवं जिलाधिकारी को लिखित या मौखिक रूप से सूचना दे सकते हैं। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल ने बताया बाल विवाह कानून का अनुपालन कराकर और स्वेच्छा से रोका जा सकता है। समाज में जागरुकता अभियान चलाना आवश्यक है। उत्तम सिंह चौहान, रचना सहगल, जयराम, राजाराम खटीक, राजीव दुबे, प्रियंका, विनीत कुमार, रूपेश कुमार, सुरेंद्र कुमार, लीजू जैकब, राघवेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
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ललितपुर। जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड लाइन ने बाल विवाह रोकथाम के लिए जन जागरूकता कार्यशाला में बाल विवाह पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि कम उम्र में विवाह करने से लड़कियां परिपक्व नहीं हो पाती है। इससे बच्चे कुपोषित पैदा होते हैं।
संरक्षण अधिकारी पंकज कुमार ने बाल विवाह पर चर्चा करते हुए बताया कि इस तरह के विवाह अक्सर अक्षय तृतीया पर किए जाते हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 06 में से 01 महिला की शादी 18 वर्ष से कम आयु में होती है। महिला कल्याण अधिकारी ममता श्रीवास ने बाल विवाह के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आमतौर पर परिवार में लड़कियों को बोझ के रूप में देखा जाता है और समाज की रूढ़िवादी परम्परा के कारण उनकी शादी जल्दी करा दी जाती है। जिला समन्वयक रागिनी ने बाल विवाह कराने वाले और उसमें शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध दंड के रूप में 02 साल का कठोर कारावास अथवा एक लाख जुर्माना या दोनो का प्रावधान है। साईं ज्योति सेवा समिति के महेश रिछारिया ने कहा कि कम उम्र में विवाह करने से लड़कियां परिपक्व नहीं हो पाती हैं। इस प्रकार का मामला आने पर पुलिस विभाग, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति, चाइल्डलाइन-1098, पुलिस हेल्पलाइन नं 100, महिला हेल्पलाइन 181 एवं जिलाधिकारी को लिखित या मौखिक रूप से सूचना दे सकते हैं। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल ने बताया बाल विवाह कानून का अनुपालन कराकर और स्वेच्छा से रोका जा सकता है। समाज में जागरुकता अभियान चलाना आवश्यक है। उत्तम सिंह चौहान, रचना सहगल, जयराम, राजाराम खटीक, राजीव दुबे, प्रियंका, विनीत कुमार, रूपेश कुमार, सुरेंद्र कुमार, लीजू जैकब, राघवेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
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