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तीन किमी से ला रहे पीने का पानी
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घंटों बाद हैंडपंप से निकलता है पानी
ललितपुर। विकासखंड जखौरा के अंतर्गत ग्राम रोंड़ा में पेयजल समस्या गहरा गई है। गांव में लगे अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। टैंकर से भी पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। हैंडपंपों पर पानी आने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। मजबूरन ग्रामीण तीन किलोमीटर दूर से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं।
जून में कई गांवों में जल स्तर इतने नीचे पहुंच गया है कि अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। ऐसी ही स्थिति ब्लाक जखौरा के ग्राम रोंड़ा की है। जहां पर लोगों को उपयोग के लिए पानी तो दूर पीने के पानी की समस्या हो गई है। गांव में लगे अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है, तो कुछ हैंडपंप सूखे पड़े हैं। इतना ही नहीं गांव के आस-पास में बने कुओं के पानी भी जलस्तर नीचे गिर गया है। कुछ कुएं सूखे पड़े हैं। हालत यह है कि गांव सेे काफी दूरी पर लगे तीन हैंडपंपों को काफी देर चलाने के बाद 20 लीटर पानी निकलता है और कुछ ही देर में पानी आना बंद हो जाता है। फिर 30 मिनट इंतजार करने के बाद थोड़ा पानी निकलता है। इसके बाद पुन: पानी आना बंद हो जाता है। ऐसे में अधिकतर ग्रामीणों को अपनी बारी आने में दो घंटे तक का समय लग जाता है। इससे केवल पीने की व्यवस्था हो पा रही है।
मजबूरन, ग्रामीणों को गांव से लगभग दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर पहुंचकर पानी जुटाना पड़ रहा है। अधिकांश महिलाएं पूरे दिन में पानी व घर के काम से ही नहीं निपट पा रहीं है। कुछ पुरुष भी पूरा दिन पानी जुटाने में ही लगा दे रहे हैं। तब कहीं पानी मिल पा रहा है, जिससे मजदूर वर्ग के लोगों को अधिक परेशानी हो रही है। साथ ही आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके बाद भी भीषण पेयजल समस्या से जूझ रहे लोगों की समस्यों का निराकरण नहीं किया जा रहा है। गांव में
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पानी के लिए टैंकर चलाए जा रहे हैं, लेकिन इससे ग्रामीणों को कोई राहत नहीं है, क्योंकि टैंकर चहेते लोगों के घरों के सामने खड़े हो रहे हैं, जहां पहले वह लोग पानी भर लेते हैं, इसके बाद ही दूसरों का नंबर लग पाता है। जब तक नंबर आता है, पानी समाप्त हो जाता है।
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गांव में पेयजल की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए टैंकर की व्यवस्था तो की गई, लेकिन इसका लाभ गरीब तबके के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। हालत यह है कि टैंकर के आते ही अधिक भीड़ हो जाती है, जिससे कम पानी मिल पा रहा है। पानी के लिए दूर लगे हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है।
- भगत
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गांव में पानी की सुविधा के लिए टैंकर चलाए जा रहे हैं। टैंकर शुरु होने के समय लगा कि पानी के लिए अधिक परेशान नहीं होना होगा, लेकिन कुछ ही दिन बाद जब देखा की टैंकर चिह्नित स्थानों ही खड़ा किया जाता है। जहां पर लोग पाइप डालकर पानी लेते हैं।
- रामराजा
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पानी समस्या अधिक गहरा गई है। पानी के लिए सुबह से निकलने पर एक घंटा के बाद ही घर पर वापस आ पा रहे हैं। ऐसे में पानी जुटाने में अधिक पेरशानी आ रही है। साथ ही कोई अन्य कार्य नहीं हो पा रहा है।
- नीमा
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गांव में पेयजल संकट अधिक है। इसके लिए यदि गांव से नदनवारा के लिए निकली पाइप लाइन से कनेक्शन मिल जाए तो समस्या का निराकरण हो सकता है। हालांकि वर्तमान में टैंकरों से पानी दिया जा रहा है। लेकिन, अधिक आबादी के कारण पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है।
- मिठ्ठू लाल
ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत रोंड़ा
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ललितपुर। विकासखंड जखौरा के अंतर्गत ग्राम रोंड़ा में पेयजल समस्या गहरा गई है। गांव में लगे अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। टैंकर से भी पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। हैंडपंपों पर पानी आने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। मजबूरन ग्रामीण तीन किलोमीटर दूर से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं।
जून में कई गांवों में जल स्तर इतने नीचे पहुंच गया है कि अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। ऐसी ही स्थिति ब्लाक जखौरा के ग्राम रोंड़ा की है। जहां पर लोगों को उपयोग के लिए पानी तो दूर पीने के पानी की समस्या हो गई है। गांव में लगे अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है, तो कुछ हैंडपंप सूखे पड़े हैं। इतना ही नहीं गांव के आस-पास में बने कुओं के पानी भी जलस्तर नीचे गिर गया है। कुछ कुएं सूखे पड़े हैं। हालत यह है कि गांव सेे काफी दूरी पर लगे तीन हैंडपंपों को काफी देर चलाने के बाद 20 लीटर पानी निकलता है और कुछ ही देर में पानी आना बंद हो जाता है। फिर 30 मिनट इंतजार करने के बाद थोड़ा पानी निकलता है। इसके बाद पुन: पानी आना बंद हो जाता है। ऐसे में अधिकतर ग्रामीणों को अपनी बारी आने में दो घंटे तक का समय लग जाता है। इससे केवल पीने की व्यवस्था हो पा रही है।
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मजबूरन, ग्रामीणों को गांव से लगभग दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर पहुंचकर पानी जुटाना पड़ रहा है। अधिकांश महिलाएं पूरे दिन में पानी व घर के काम से ही नहीं निपट पा रहीं है। कुछ पुरुष भी पूरा दिन पानी जुटाने में ही लगा दे रहे हैं। तब कहीं पानी मिल पा रहा है, जिससे मजदूर वर्ग के लोगों को अधिक परेशानी हो रही है। साथ ही आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके बाद भी भीषण पेयजल समस्या से जूझ रहे लोगों की समस्यों का निराकरण नहीं किया जा रहा है। गांव में
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पानी के लिए टैंकर चलाए जा रहे हैं, लेकिन इससे ग्रामीणों को कोई राहत नहीं है, क्योंकि टैंकर चहेते लोगों के घरों के सामने खड़े हो रहे हैं, जहां पहले वह लोग पानी भर लेते हैं, इसके बाद ही दूसरों का नंबर लग पाता है। जब तक नंबर आता है, पानी समाप्त हो जाता है।
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गांव में पेयजल की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए टैंकर की व्यवस्था तो की गई, लेकिन इसका लाभ गरीब तबके के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। हालत यह है कि टैंकर के आते ही अधिक भीड़ हो जाती है, जिससे कम पानी मिल पा रहा है। पानी के लिए दूर लगे हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है।
- भगत
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गांव में पानी की सुविधा के लिए टैंकर चलाए जा रहे हैं। टैंकर शुरु होने के समय लगा कि पानी के लिए अधिक परेशान नहीं होना होगा, लेकिन कुछ ही दिन बाद जब देखा की टैंकर चिह्नित स्थानों ही खड़ा किया जाता है। जहां पर लोग पाइप डालकर पानी लेते हैं।
- रामराजा
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पानी समस्या अधिक गहरा गई है। पानी के लिए सुबह से निकलने पर एक घंटा के बाद ही घर पर वापस आ पा रहे हैं। ऐसे में पानी जुटाने में अधिक पेरशानी आ रही है। साथ ही कोई अन्य कार्य नहीं हो पा रहा है।
- नीमा
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गांव में पेयजल संकट अधिक है। इसके लिए यदि गांव से नदनवारा के लिए निकली पाइप लाइन से कनेक्शन मिल जाए तो समस्या का निराकरण हो सकता है। हालांकि वर्तमान में टैंकरों से पानी दिया जा रहा है। लेकिन, अधिक आबादी के कारण पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है।
- मिठ्ठू लाल
ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत रोंड़ा