{"_id":"5d0693868ebc3e43151336e1","slug":"156071205810-lalitpur-news21","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटिस के बाद भी ठेकेदार ने नहीं किया काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोटिस के बाद भी ठेकेदार ने नहीं किया काम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटिस के बाद भी ठेकेदार ने नहीं किया काम
बांसी। जिला पंचायत के ठेकेदार को रपटा की मरम्मत के लिए नोटिस दिया गया था, लेकिन समय सीमा निकल गई और कोई काम नहीं कराया गया है। जनहित संघर्ष समिति ने ठेकेदार को काली सूची में डालने की मांग की है।
ग्राम बांसी के मजरा खिरकन में खरखरी नदी पर जिला पंचायत ने वर्ष 2011 में 20 लाख रुपये की लागत से रपटा बनवाया था, लेकिन दो साल में ही रपटा के दोनों किनारे पानी में बह गए थे। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की तो जिला पंचायत ने राज्य वित्त आयोग से वर्ष 2018 में रपटा के विस्तारीकरण के लिए छह लाख रुपये स्वीकृत किए। पानी में बह गए रपटा के दोनों किनारों पर कार्य किया गया, लेकिन गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे अंतिम भुगतान होने के एक माह के अंदर ही विस्तारीकरण कार्य पानी में बह गया। ग्रामीणों की शिकायत पर जिला पंचायत ने ठेकेदार को नोटिस दिया, लेकिन इस नोटिस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आठ माह बीतने के बाद भी कोई काम नहीं हुआ तो 11 मई को जिलाधिकारी से शिकायत की गई। ठेकेदार को 16 मई को अंतिम अवसर देते हुए 15 दिन में गुणवत्ता पूर्ण कार्य कराने के लिए नोटिस दिया गया, लेकिन एक माह के बाद भी ठेकेदार ने कार्य नहीं किया। बारिश में ग्रामीणों की परेशानी बढ़ने वाली है। ऐसे में मांग की गई कि ठेकेदार के जिला पंचायत में संचालित सभी ठेके निरस्त किए जाएं और उसका नाम काली सूची में डाला जाए।
विज्ञापन
बांसी। जिला पंचायत के ठेकेदार को रपटा की मरम्मत के लिए नोटिस दिया गया था, लेकिन समय सीमा निकल गई और कोई काम नहीं कराया गया है। जनहित संघर्ष समिति ने ठेकेदार को काली सूची में डालने की मांग की है।
ग्राम बांसी के मजरा खिरकन में खरखरी नदी पर जिला पंचायत ने वर्ष 2011 में 20 लाख रुपये की लागत से रपटा बनवाया था, लेकिन दो साल में ही रपटा के दोनों किनारे पानी में बह गए थे। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की तो जिला पंचायत ने राज्य वित्त आयोग से वर्ष 2018 में रपटा के विस्तारीकरण के लिए छह लाख रुपये स्वीकृत किए। पानी में बह गए रपटा के दोनों किनारों पर कार्य किया गया, लेकिन गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे अंतिम भुगतान होने के एक माह के अंदर ही विस्तारीकरण कार्य पानी में बह गया। ग्रामीणों की शिकायत पर जिला पंचायत ने ठेकेदार को नोटिस दिया, लेकिन इस नोटिस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आठ माह बीतने के बाद भी कोई काम नहीं हुआ तो 11 मई को जिलाधिकारी से शिकायत की गई। ठेकेदार को 16 मई को अंतिम अवसर देते हुए 15 दिन में गुणवत्ता पूर्ण कार्य कराने के लिए नोटिस दिया गया, लेकिन एक माह के बाद भी ठेकेदार ने कार्य नहीं किया। बारिश में ग्रामीणों की परेशानी बढ़ने वाली है। ऐसे में मांग की गई कि ठेकेदार के जिला पंचायत में संचालित सभी ठेके निरस्त किए जाएं और उसका नाम काली सूची में डाला जाए।
विज्ञापन