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कोहरे से फसलों के बचाव को कृषि विभाग सतर्क
Updated Sat, 09 Dec 2017 02:41 AM IST
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कोहरे से फसलों को हो सकता है नुकसान
ललितपुर। वर्तमान में कोहरे के कारण जहां रेल यातायात प्रभावित हुआ है, वहीं कई जनपदों में घने कोहरे के कारण आलू व अन्य सब्जियों की फसल को भी नुकसान की संभावना है। इसे देखते हुए जिला कृषि विभाग ने किसान हित में खेतों में बोयी गई चना, मटर, मसूर, राई/सरसों, गेहूं एवं सब्जियों की नियमित निगरानी करते रहने की सलाह दी है।
कृषि विभाग की ओर से जिला कृषि रक्षा अधिकारी एसएन चौधरी ने बताया है कि आलू व अन्य सब्जियों के अलावा चना, मटर, मसूर में सेमीलूपर (इल्ली), कटुआ कीट, फलीभेदक ने नियंत्रक के लिए क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई.सी. 1.5 लीटर या बीटी एक लीटर या मोनोक्रोटोफॉस 36 प्रतिशत एसएल एक लीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। राई/सरसों, मसूर, मटर, चना, गेहूं में माहू के नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट 30 ई.सी.या क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई.सी. 1.5 लीटर या मोनोक्रोटोफॉस 36 प्रतिशत एसएल एक लीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव को प्रयोग करना होगा। गेहूं की फसल में दीमक के नियंत्रण के लिए क्लोरोपाईरीफॉस बीस प्रतिशत की 2.5 लीटर मात्रा को सिंचाई के पानी के साथ प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना होगा। इसी प्रकार गेहूं, मसूर, राई, चना, मटर में गेरुई, पत्ती धब्बा रोग, तुलासिता, झुलसा रोग एवं आलू, टमाटर, मिर्च में झुलसा रोग के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की दो किलोग्राम मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव के लिए प्रयोग करना होगा। मटर में बुकनी रोग के नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत दो किलोग्राम या ट्राइडोमार्फ 80 ईसी की 500 एमएल या कार्बान्डाजिम 500 ग्राम दवा को 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव के लिए प्रयोग लाभदायक होगा। गेहूं में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए 2.4 डी.सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत की 625 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा या चौड़ी पत्ती वाले व संकरी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे बथुआ, हिरनखुरी, गेहूं का मामा, जंगली जई आदि के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत के साथ मेटसल्फ्यूरॉन मिथाइल पांच प्रतिशत की 40 ग्राम मात्रा को 300 से 400 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव कोहरे की मार से फसलों के बचाव में लाभकारी होगा।
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ललितपुर। वर्तमान में कोहरे के कारण जहां रेल यातायात प्रभावित हुआ है, वहीं कई जनपदों में घने कोहरे के कारण आलू व अन्य सब्जियों की फसल को भी नुकसान की संभावना है। इसे देखते हुए जिला कृषि विभाग ने किसान हित में खेतों में बोयी गई चना, मटर, मसूर, राई/सरसों, गेहूं एवं सब्जियों की नियमित निगरानी करते रहने की सलाह दी है।
कृषि विभाग की ओर से जिला कृषि रक्षा अधिकारी एसएन चौधरी ने बताया है कि आलू व अन्य सब्जियों के अलावा चना, मटर, मसूर में सेमीलूपर (इल्ली), कटुआ कीट, फलीभेदक ने नियंत्रक के लिए क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई.सी. 1.5 लीटर या बीटी एक लीटर या मोनोक्रोटोफॉस 36 प्रतिशत एसएल एक लीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। राई/सरसों, मसूर, मटर, चना, गेहूं में माहू के नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट 30 ई.सी.या क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई.सी. 1.5 लीटर या मोनोक्रोटोफॉस 36 प्रतिशत एसएल एक लीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव को प्रयोग करना होगा। गेहूं की फसल में दीमक के नियंत्रण के लिए क्लोरोपाईरीफॉस बीस प्रतिशत की 2.5 लीटर मात्रा को सिंचाई के पानी के साथ प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना होगा। इसी प्रकार गेहूं, मसूर, राई, चना, मटर में गेरुई, पत्ती धब्बा रोग, तुलासिता, झुलसा रोग एवं आलू, टमाटर, मिर्च में झुलसा रोग के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की दो किलोग्राम मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव के लिए प्रयोग करना होगा। मटर में बुकनी रोग के नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत दो किलोग्राम या ट्राइडोमार्फ 80 ईसी की 500 एमएल या कार्बान्डाजिम 500 ग्राम दवा को 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव के लिए प्रयोग लाभदायक होगा। गेहूं में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए 2.4 डी.सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत की 625 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा या चौड़ी पत्ती वाले व संकरी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे बथुआ, हिरनखुरी, गेहूं का मामा, जंगली जई आदि के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत के साथ मेटसल्फ्यूरॉन मिथाइल पांच प्रतिशत की 40 ग्राम मात्रा को 300 से 400 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव कोहरे की मार से फसलों के बचाव में लाभकारी होगा।
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