{"_id":"5a85ec0e4f1c1bfe7e8b5c68","slug":"141518726158-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उड़द खरीद का साढे छब्बीस करोड़ रुपये का भुगतान अटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उड़द खरीद का साढे छब्बीस करोड़ रुपये का भुगतान अटका
Updated Fri, 16 Feb 2018 01:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उड़द खरीद का साढे़ छब्बीस करोड़ रुपये का भुगतान अटका
ललितपुर।
नेफेड की एनीएमएल कंपनी और बैंकों के बीच आपसी सहमति नहीं बनने का खामियाजा उड़द किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इस समय जिले के करीब तीन हजार एक सौ सैंतीस किसानों का भुगतान लटककर रह गया है। इसमें प्राइवेट संस्थाओं के केंद्रों से जुड़े किसानों की संख्या ज्यादा है। भुगतान के अभाव में किसानों को यहां-वहां भटकना पड़ रहा है।
शासन ने किसानों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से उड़द की खरीद कराई थी। इसमें पीसीएफ सहित कई प्राइवेट समितियों ने अपने केंद्र संचालित कर उड़द की खरीद की। अमरपुर मंडी में खोले गए केंद्र पर 359 किसानों ने अपना मॉल बेचा है। इसमें से तीन सौ अड़तालीस किसानों का दो करोड़ उन्सठ लाख बयालीस हजार रुपये का भुगतान ही हो पाया है। अवशेष किसानों का भुगतान खाता बंद होने, गलत खाते में चले जाने पर अटक गया है। वहीं, प्राइवेट समितियों के भुगतान की प्रक्रिया में नेफेड ने एनीएमएल कंपनी से हाथ मिलाया। यह कंपनी बैंकों से किसानों के खातों की लिंक मांग रही है। जिस पर बैंकों ने इसे देने में मना कर दिया है। बैंकों का कहना है कि वह आरटीजीएस के माध्यम से किसानों का भुगतान करने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस पर एनीएमएल तैयार नहीं है, ऐसे में किसानों का भुगतान लटककर रह गया है। इस तरह अब तक कुल तीन हजार पांच सौ बारह में से तीन सौ 75 किसानों को ही भुगतान मिल सका है। वर्तमान में 26 करोड़ उन्सठ लाख छिहत्तर हजार रुपये का भुगतान अभी होना बाकी है। नियमता किसानों का भुगतान चौबीस घंटे के अंदर होना चाहिए था। बता दें कि 31 जनवरी तक उड़द खरीद हुई। इस हिसाब से पंद्रह दिन भुगतान लेट हो गया है।
इन संस्थाओं ने खरीदा उड़द
पीसीएफ, चैंपियन, किसान बहुद्देशीय, आर्यावर्त उपभोक्ता, बुंदेलखंड, भाग्योदय समितियों ने उड़द को खरीदा। प्राइवेट समितियों को ये शर्ते पूरी करनी थी, जिसमें उड़द खरीद के पहले बैंक खाते में पच्चीस लाख रुपये जमा हो। प्रतिदिन खाते से निकासी होने के बाद भी दस लाख रुपये जमा रहे।
विज्ञापन
लखनऊ में चल रही वार्ता
नेफेड अधिकारियों की वार्ता लखनऊ में बैठे अफसरों से चल रही है। एक दो दिन में कोई समाधान निकलने की संभावना है।
दिव्यांशु वर्मा
जिला प्रबंधक, पीसीएफ
जांच बैठने से कइयों को उड़ी हवाइयां
एक तरफ किसानों का भुगतान नहीं हो पा रहा है तो वहीं दूसरी ओर उड़द खरीद पर शासन ने जांच बैठा दी है। जिससे कइयों के चेहरों की हवाइयां उड़ गई हैं। हालांकि, कुछ लोग कागजी कार्रवाई पूरी होने से खुद को आश्वस्त पा रहे हैं।
विज्ञापन
ललितपुर।
नेफेड की एनीएमएल कंपनी और बैंकों के बीच आपसी सहमति नहीं बनने का खामियाजा उड़द किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इस समय जिले के करीब तीन हजार एक सौ सैंतीस किसानों का भुगतान लटककर रह गया है। इसमें प्राइवेट संस्थाओं के केंद्रों से जुड़े किसानों की संख्या ज्यादा है। भुगतान के अभाव में किसानों को यहां-वहां भटकना पड़ रहा है।
शासन ने किसानों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से उड़द की खरीद कराई थी। इसमें पीसीएफ सहित कई प्राइवेट समितियों ने अपने केंद्र संचालित कर उड़द की खरीद की। अमरपुर मंडी में खोले गए केंद्र पर 359 किसानों ने अपना मॉल बेचा है। इसमें से तीन सौ अड़तालीस किसानों का दो करोड़ उन्सठ लाख बयालीस हजार रुपये का भुगतान ही हो पाया है। अवशेष किसानों का भुगतान खाता बंद होने, गलत खाते में चले जाने पर अटक गया है। वहीं, प्राइवेट समितियों के भुगतान की प्रक्रिया में नेफेड ने एनीएमएल कंपनी से हाथ मिलाया। यह कंपनी बैंकों से किसानों के खातों की लिंक मांग रही है। जिस पर बैंकों ने इसे देने में मना कर दिया है। बैंकों का कहना है कि वह आरटीजीएस के माध्यम से किसानों का भुगतान करने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस पर एनीएमएल तैयार नहीं है, ऐसे में किसानों का भुगतान लटककर रह गया है। इस तरह अब तक कुल तीन हजार पांच सौ बारह में से तीन सौ 75 किसानों को ही भुगतान मिल सका है। वर्तमान में 26 करोड़ उन्सठ लाख छिहत्तर हजार रुपये का भुगतान अभी होना बाकी है। नियमता किसानों का भुगतान चौबीस घंटे के अंदर होना चाहिए था। बता दें कि 31 जनवरी तक उड़द खरीद हुई। इस हिसाब से पंद्रह दिन भुगतान लेट हो गया है।
विज्ञापन
इन संस्थाओं ने खरीदा उड़द
पीसीएफ, चैंपियन, किसान बहुद्देशीय, आर्यावर्त उपभोक्ता, बुंदेलखंड, भाग्योदय समितियों ने उड़द को खरीदा। प्राइवेट समितियों को ये शर्ते पूरी करनी थी, जिसमें उड़द खरीद के पहले बैंक खाते में पच्चीस लाख रुपये जमा हो। प्रतिदिन खाते से निकासी होने के बाद भी दस लाख रुपये जमा रहे।
विज्ञापन
लखनऊ में चल रही वार्ता
नेफेड अधिकारियों की वार्ता लखनऊ में बैठे अफसरों से चल रही है। एक दो दिन में कोई समाधान निकलने की संभावना है।
दिव्यांशु वर्मा
जिला प्रबंधक, पीसीएफ
जांच बैठने से कइयों को उड़ी हवाइयां
एक तरफ किसानों का भुगतान नहीं हो पा रहा है तो वहीं दूसरी ओर उड़द खरीद पर शासन ने जांच बैठा दी है। जिससे कइयों के चेहरों की हवाइयां उड़ गई हैं। हालांकि, कुछ लोग कागजी कार्रवाई पूरी होने से खुद को आश्वस्त पा रहे हैं।