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तालाबंदी का शिकार दिव्यांगों का शौचालय
Updated Thu, 05 Apr 2018 01:44 AM IST
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तालाबंदी का शिकार दिव्यांगों का शौचालय
ललितपुर।
विकास भवन परिसर में तीन सालों से बंद पड़े शौचालय की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। इस मामले में एक-दूसरे की ओर गेंद उछालकर अधिकारी पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। इससे दिव्यांगों को प्रसाधन में आ रही समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में सिपड़ा योजना अंतर्गत विकास भवन परिसर में लाखों रुपये की लागत से दिव्यांगों के लिए शौचालय और रैम्प का निर्माण कराया गया था। लेकिन इसका संचालन आज तक प्रारंभ नहीं हो सका है, जिससे दिव्यांगों को सुविधा प्रदान नहीं हो पा रही है। विडंबना यह है कि विकास भवन में दिव्यांग जन विकास कार्यालय खुला हुआ है, जिसमें एक कर्मचारी पूरी तरह अपंग है। इसके बाद भी उसे सामान्य शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। विभागीय कर्मी बताते हैं कि इससे उस कर्मचारी को काफी परेशानी होती है। इसके अलावा इस कार्यालय में आए दिन दिव्यांग योजनाओं की जानकारी लेने पहुंचते हैं। इन सबके बाद भी दिव्यांगों की लगातार अनदेखी हो रही है। जब इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से जानकारी चाही तो सभी हाथ खड़े करते नजर आए।
मेरे कर्मचारी को भी होती परेशानी
शौचालय नहीं खुलने से मेरा कर्मचारी खुद परेशान है। इस संबंध में जिला विकास अधिकारी से चर्चा भी की गई।
पीयूष राय, जिला दिव्यांग जन विकास अधिकारी
प्रोवेशन विभाग ने बनवाया शौचालय
दिव्यांगों के लिए शौचालय के निर्माण की राशि प्रोवेशन विभाग ने दी है। वह ही इस बारे में कुछ बता सकते हैं।
देवेंद्र प्रताप, जिला विकास अधिकारी
मेरे विभाग से नहीं लेना देना
प्रोवेशन विभाग ने सिपड़ा नाम से कोई योजना संचालित नहीं की है। इसलिए इस शौचालय से विभाग का कोई लेना देना नहीं है।
सुरेंद्र कुमार पटेल, जिला प्रावेशन अधिकारी
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ललितपुर।
विकास भवन परिसर में तीन सालों से बंद पड़े शौचालय की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। इस मामले में एक-दूसरे की ओर गेंद उछालकर अधिकारी पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। इससे दिव्यांगों को प्रसाधन में आ रही समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में सिपड़ा योजना अंतर्गत विकास भवन परिसर में लाखों रुपये की लागत से दिव्यांगों के लिए शौचालय और रैम्प का निर्माण कराया गया था। लेकिन इसका संचालन आज तक प्रारंभ नहीं हो सका है, जिससे दिव्यांगों को सुविधा प्रदान नहीं हो पा रही है। विडंबना यह है कि विकास भवन में दिव्यांग जन विकास कार्यालय खुला हुआ है, जिसमें एक कर्मचारी पूरी तरह अपंग है। इसके बाद भी उसे सामान्य शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। विभागीय कर्मी बताते हैं कि इससे उस कर्मचारी को काफी परेशानी होती है। इसके अलावा इस कार्यालय में आए दिन दिव्यांग योजनाओं की जानकारी लेने पहुंचते हैं। इन सबके बाद भी दिव्यांगों की लगातार अनदेखी हो रही है। जब इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से जानकारी चाही तो सभी हाथ खड़े करते नजर आए।
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मेरे कर्मचारी को भी होती परेशानी
शौचालय नहीं खुलने से मेरा कर्मचारी खुद परेशान है। इस संबंध में जिला विकास अधिकारी से चर्चा भी की गई।
पीयूष राय, जिला दिव्यांग जन विकास अधिकारी
प्रोवेशन विभाग ने बनवाया शौचालय
दिव्यांगों के लिए शौचालय के निर्माण की राशि प्रोवेशन विभाग ने दी है। वह ही इस बारे में कुछ बता सकते हैं।
देवेंद्र प्रताप, जिला विकास अधिकारी
मेरे विभाग से नहीं लेना देना
प्रोवेशन विभाग ने सिपड़ा नाम से कोई योजना संचालित नहीं की है। इसलिए इस शौचालय से विभाग का कोई लेना देना नहीं है।
सुरेंद्र कुमार पटेल, जिला प्रावेशन अधिकारी