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सावन के पहले सोमवार को शिवालयों में गूंजे बम-बम के जयकारे

Tue, 31 Jul 2018 01:37 AM IST
Updated Tue, 31 Jul 2018 01:37 AM IST
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सावन के पहले सोमवार को शिवालयों में गूंजे बम-बम के जयकारे
सावन के पहले सोमवार में गूंजे बम-बम के जयकारे
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विधिविधान के साथ हुआ भोलेनाथ का अभिषेक
थानेश्वर मंदिर में चल रहा असंख्यात शिवलिंग निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सावन का महीना इस बार 28 जुलाई से शुरू हो गया है, जिसके चलते शिव मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन के साथ धार्मिक आयोजन भी शुरू हो गए हैं। सावन के पहले सोमवार को अधिकांश शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं द्वारा भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा की गई। भगवान को फूलमालाओं के साथ शृंगार किया गया और दिन में मंदिरों में बम-बम के जयकारे लगाए गए। वहीं, थानेश्वर मंदिर में सावन माह के दौरान सोमवार को भी असंख्यात शिवलिंग निर्माण में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित माना जाता है, जिसके चलते सनातन धर्मियों द्वारा सावन के महीने में और खासतौर पर श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रावण मास में शिव भक्त ज्योतिर्लिंगों का दर्शन और जलाभिषेक करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त करता है तथा शिवलोक को पाता है। शिव का श्रावण में जलाभिषेक करने की एक किंवदंती बहुत प्रचलित है, जिसके अनुसार जब देवों और राक्षसों ने मिलकर अमृत प्राप्ति के लिए सागर मंथन किया तो उस मंथन समय समुद्र में से अनेक पदार्थ उत्पन्न हुए और अमृत कलश से पूर्व कालकूट विष भी निकला उसकी भयंकर ज्वाला से समस्त ब्रह्माण्ड जलने लगा इस संकट से व्यथित होकर समस्त जन भगवान शिव के पास पहुंचे और उनके समक्ष प्राथना करने की, तब सभी की प्रार्थना पर और सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में उतार लिया था और उसे वहीं अपने कंठ में अवरूद्ध कर लिया था। जिससे उनका कंठ नीला हो गया था और समुद्र मंथन से निकले हलाहल को पान करने से भगवान शिव को उस हलाहल से निकली तपन को सहन करना पड़ा। इसी के चलते मान्यता है कि वह समय श्रावण मास का समय था और उस तपन को शांत करने के लिए देवताओं ने गंगाजल से भगवान शिव का पूजन व जलाभिषेक शुरु कर दिया था, तभी से यह प्रथा और आस्था आज भी चली आ रही है। माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से भक्त उनकी कृपा के पात्र बनते हैं। इसी के चलते तब से श्रावण के महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है और सोमवार के दिन विशेष पूजा अर्चना भी की जाती है। सोमवार को शहर के मुख्य शिवालयों सीतापाठ मंदिर स्थित शिवमंदिर, बांधकालोनी स्थित श्रीसिद्घेश्वर मंदिर, चंडी माता मंदिर स्थित शिव मंदिर, देवगढ़ रोड स्थित शिवमंदिर, घंटाघर स्थित थानेश्वर मंदिर, बड़ापुरा व सरदारपुरा स्थित शिवमंदिर, चौबयाना स्थित शिवमंदिर आदि शिवालयों में श्रद्घालुओं ने भगवान भोलेनाथ का दूध दही, शहद, धी के साथ अभिषेक कर जलाभिषेक किया और भगवान शिव को बेलपत्र, दूबा, चढ़ाकर भगवान का पूजन अर्चन किया। सावन का पहला सोमवार होने के कारण शिवालयों में दिन में भगवान की पूजा के साथ बम-बम के जयकारे गूंजते रहे।
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सीतापाठ मंदिर जाने का मार्ग जर्जर, श्रद्घालु होते रहे परेशान
सीतापाठ स्थित शिवालय में भगवान शिव की विशाल पिंडी स्थित है, जहां इस समय सावन का महीना होने के कारण श्रद्घालुओं को बड़ी संख्या में आना जाना लगा रहता है। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए तालाबपुरा से सीतापाठ मंदिर जाने के लिए (सिंचाई विभाग के कार्यालय के पास) सड़क मार्ग की हालत काफी खस्ता है। यहां पैदल चलने में भी लोगों को काफी परेशानी होती है। सड़क में जगह-जगह गड्ढे व सड़क खुद जाने के कारण श्रद्धालुओं को मंदिर पहुंचने में दिक्कत होती है।
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