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बसंत में भी नहीं आई पार्क में फूलों की बहार
Updated Thu, 22 Feb 2018 01:52 AM IST
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बसंत में भी नहीं आई पार्क में बहार
ललितपुर। ऋतुराज बसंत में जहां पीडब्ल्यूडी सर्किट हाउस विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से लदा हुआ है। वहीं, शहर के बीचोबीच स्थित चंद्रशेखर उद्यान पार्क में वीरानी छाई हुई है। पार्क में एक दो को छोड़कर लगभग सभी बगियों को तैयार नहीं किया जा सका है। यही नहीं, फूल से घर को सजाने के शौकीनों को भी मायूसी हाथ लग रही है।
बसंत सीजन को ऋतुओं का राजा कहा गया है। इस मौसम में लगभग हर पेड़, पौधे में फूल लद जाते हैं। जहां निगाह पहुंचती है, वहां फूल दिखाई देते हैं। पीडब्ल्यूडी सर्किट हाउस व निजी नर्सरियों में फूल खिले हुए हैं। लेकिन, शहर के चंद्रशेखर उद्यान पार्क में बहार नदारत हैं। यहां एक दो बगियां में सीजनल पौधों में फूल खिले दिख रहे हैं, जबकि अधिकांश क्षेत्रफल सूना सा नजर आ रहा है। इसके गवाह खाली पड़े गमले हैं। जिन गमलों में फूलों के पौधे होना चाहिए थे, वे एक किनारे खाली पड़े हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्क के प्रबंध तंत्र ने विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधों को बेचने के लिए सूची लगाई है। इनमें गुलाब कलकतिया, गुड़हल, बोगनबिलिया, पाम देशी, अशोक देशी, ऐरिका पाम, बोतल पाम, अशोक पेंडुला, सावनी, क्रोटन व मौसमी फूलों की पौध प्रति सैकड़ा के हिसाब से बिक्री के लिए रखी गई है, लेकिन सूची में दर्शाए अधिकतर पौधे पार्क से गायब हैं। सच्चाई यह है कि पार्क के प्रबंध तंत्र ने इन्हें तैयार ही नहीं किया है। जिन पौधों को तैयार किया उनमें से अधिकांश पौध रखरखाव के अभाव में खराब हो गई है। इसकी मिट्टी ढेर में तब्दील हो गई है। इसके अलावा कचरे में शराब की बोतलें मिल रही हैं। बुधवार को जो कचरा एकत्रित हुआ। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए प्रबंध तंत्र ने पार्क के खोलने के समय में भारी कटौती कर दी है, जिसमें सुबह दस बजे के बाद शाम पांच बजे तक पार्क को बंद रखा जाता है। इसके पीछे तर्क है कि दोपहर के समय पार्क में मनचले व शराब खोर बैठे रहते हैं, जिससे पार्क को दोपहर में बंद रखने का फैसला किया है। इसका विपरीत असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है। वह मन बहलाने के लिए पार्क पहुंचते हैं तो यहां उन्हें पार्क बंद मिलता है। इसके अलावा शहर में कोई ऐसा स्थल नहीं है, जहां लोग दो पल सुकुन के गुजार सके। इसके बाद भी जिम्मेदार मौन बने हुए हैं।
मजदूरी नहीं मिलने पर ठहरते थे पार्क में
चंद्रशेखर उद्यान पार्क को कंपनी बाग के नाम से भी पहचाना जाता है। इससे लोगों का जुड़ाव बना हुआ है। लोग पार्क में बैठने के लिए खुद व खुद खिंचे चले आते हैं। श्रमिक वर्ग का व्यक्ति तब पार्क में ठहरता है, जब उसे काम नहीं मिलता है तो दो पल सुकुन के गुजारने के लिए बैठ जाते हैं। इसमें भी पार्क के अधिकारियों को आपत्ति है। इस तरह का बर्ताव मजदूर वर्ग के प्रति ठीक नहीं है।
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हरीराम
पार्क में बैठकर निकाल दी जिदंगी
92 वें वर्ष की आयु हो रही है। कंपनी बाग कभी लोगों के लिए बंद नहीं किया गया। जब इस पार्क का रखरखाव नगर पालिका करती थी तो यहां अमरूद के पेड़ व विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधे लग रहते थे। अब न तो बगियों में फूल दिखते हैं और न ही घास की कटाई। वर्तमान समय ऐसा आ गया कि पार्क अब बुजुर्गों के लिए नहीं रहा। जो वृद्ध पार्क आते थे वे अब घर में घुसकर ही रह गए हैं।
रामस्वरूप
वृद्ध
टहलने वाले उखाड़ लेते फूलों के पौधे
जो महिला पुरुष सुबह शाम टहलने के लिए आते हैं, उनमें से कई बगिया में लगे फूलों के पौधे उखाड़कर घर ले जाते हैं। जहां तक बिक्री के लिए पौधे नहीं हैं तो अब गर्मी के सीजन के हिसाब से पौधों की बुवाई कर दी है।
सुघर सिंह
जिला उद्यान अधिकारी
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ललितपुर। ऋतुराज बसंत में जहां पीडब्ल्यूडी सर्किट हाउस विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से लदा हुआ है। वहीं, शहर के बीचोबीच स्थित चंद्रशेखर उद्यान पार्क में वीरानी छाई हुई है। पार्क में एक दो को छोड़कर लगभग सभी बगियों को तैयार नहीं किया जा सका है। यही नहीं, फूल से घर को सजाने के शौकीनों को भी मायूसी हाथ लग रही है।
बसंत सीजन को ऋतुओं का राजा कहा गया है। इस मौसम में लगभग हर पेड़, पौधे में फूल लद जाते हैं। जहां निगाह पहुंचती है, वहां फूल दिखाई देते हैं। पीडब्ल्यूडी सर्किट हाउस व निजी नर्सरियों में फूल खिले हुए हैं। लेकिन, शहर के चंद्रशेखर उद्यान पार्क में बहार नदारत हैं। यहां एक दो बगियां में सीजनल पौधों में फूल खिले दिख रहे हैं, जबकि अधिकांश क्षेत्रफल सूना सा नजर आ रहा है। इसके गवाह खाली पड़े गमले हैं। जिन गमलों में फूलों के पौधे होना चाहिए थे, वे एक किनारे खाली पड़े हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्क के प्रबंध तंत्र ने विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधों को बेचने के लिए सूची लगाई है। इनमें गुलाब कलकतिया, गुड़हल, बोगनबिलिया, पाम देशी, अशोक देशी, ऐरिका पाम, बोतल पाम, अशोक पेंडुला, सावनी, क्रोटन व मौसमी फूलों की पौध प्रति सैकड़ा के हिसाब से बिक्री के लिए रखी गई है, लेकिन सूची में दर्शाए अधिकतर पौधे पार्क से गायब हैं। सच्चाई यह है कि पार्क के प्रबंध तंत्र ने इन्हें तैयार ही नहीं किया है। जिन पौधों को तैयार किया उनमें से अधिकांश पौध रखरखाव के अभाव में खराब हो गई है। इसकी मिट्टी ढेर में तब्दील हो गई है। इसके अलावा कचरे में शराब की बोतलें मिल रही हैं। बुधवार को जो कचरा एकत्रित हुआ। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए प्रबंध तंत्र ने पार्क के खोलने के समय में भारी कटौती कर दी है, जिसमें सुबह दस बजे के बाद शाम पांच बजे तक पार्क को बंद रखा जाता है। इसके पीछे तर्क है कि दोपहर के समय पार्क में मनचले व शराब खोर बैठे रहते हैं, जिससे पार्क को दोपहर में बंद रखने का फैसला किया है। इसका विपरीत असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है। वह मन बहलाने के लिए पार्क पहुंचते हैं तो यहां उन्हें पार्क बंद मिलता है। इसके अलावा शहर में कोई ऐसा स्थल नहीं है, जहां लोग दो पल सुकुन के गुजार सके। इसके बाद भी जिम्मेदार मौन बने हुए हैं।
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मजदूरी नहीं मिलने पर ठहरते थे पार्क में
चंद्रशेखर उद्यान पार्क को कंपनी बाग के नाम से भी पहचाना जाता है। इससे लोगों का जुड़ाव बना हुआ है। लोग पार्क में बैठने के लिए खुद व खुद खिंचे चले आते हैं। श्रमिक वर्ग का व्यक्ति तब पार्क में ठहरता है, जब उसे काम नहीं मिलता है तो दो पल सुकुन के गुजारने के लिए बैठ जाते हैं। इसमें भी पार्क के अधिकारियों को आपत्ति है। इस तरह का बर्ताव मजदूर वर्ग के प्रति ठीक नहीं है।
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पार्क में बैठकर निकाल दी जिदंगी
92 वें वर्ष की आयु हो रही है। कंपनी बाग कभी लोगों के लिए बंद नहीं किया गया। जब इस पार्क का रखरखाव नगर पालिका करती थी तो यहां अमरूद के पेड़ व विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधे लग रहते थे। अब न तो बगियों में फूल दिखते हैं और न ही घास की कटाई। वर्तमान समय ऐसा आ गया कि पार्क अब बुजुर्गों के लिए नहीं रहा। जो वृद्ध पार्क आते थे वे अब घर में घुसकर ही रह गए हैं।
रामस्वरूप
वृद्ध
टहलने वाले उखाड़ लेते फूलों के पौधे
जो महिला पुरुष सुबह शाम टहलने के लिए आते हैं, उनमें से कई बगिया में लगे फूलों के पौधे उखाड़कर घर ले जाते हैं। जहां तक बिक्री के लिए पौधे नहीं हैं तो अब गर्मी के सीजन के हिसाब से पौधों की बुवाई कर दी है।
सुघर सिंह
जिला उद्यान अधिकारी