फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   धर्म: रक्षाबंधन पर लगा चंद्रग्रहण, मंदिरों में नहीं हुई शाम कीआरती

धर्म: रक्षाबंधन पर लगा चंद्रग्रहण, मंदिरों में नहीं हुई शाम कीआरती

Wed, 09 Aug 2017 01:12 AM IST
Updated Wed, 09 Aug 2017 01:12 AM IST
विज्ञापन
धर्म: रक्षाबंधन पर लगा चंद्रग्रहण, मंदिरों में नहीं हुई शाम कीआरती
रक्षाबंधन पर लगा चंद्रग्रहण, मंदिरों में नहीं हुई आरती
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। रक्षाबंधन पर रात्रि में चंद्रग्रहण पड़ने के कारण सोमवार को मंदिरों के कपाट दोपहर में ही बंद हो जाने से शाम की आरती नहीं हुई। दूसरे दिन 16 घंटे बाद भगवान ब्रह्म मुहूर्त में निद्रा से जागे तो मंदिरों के कपाट खोले गए और गंगाजल से मंदिरों का शुद्धिकरण कर भगवान का आकर्षक भव्य श्रृंगार कर पूजन अर्चन किया गया।
इस बार जहां रक्षाबंधन का पर्व मनाने के लिए मात्र कुछ ही घंटे का शुभ मुहूर्त रहा, वहीं भगवान की पूजा अर्चना पर भी ग्रह नक्षत्रों का प्रभाव देखने को मिला। भद्रा होने के चलते रक्षाबंधन का मुहूर्त सोमवार को 10.42 बजे से शुरु हुआ और इसी दिन रात्रि को 10.52 बजे से चंद्रग्रहण पड़ने के करीब नौ घंटे पूर्व यानि दोपहर में डेढ़ बजे से सूतक लग गया। शास्त्रियों के अनुसार चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण से पूर्व सूतक काल लग जाता है और इस सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं होता है। इस सूतक काल में अपवित्रता से बचने के लिए भगवान शयन को चले जाते हैं और चंद्रग्रहण का प्रभाव खत्म होने के बाद ही वह शयन त्यागते हैं। ज्योतिषाचार्य महेश मिश्र ने बताया कि ग्रहण पड़ने के 18 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है और ग्रहण के छह महीने तक इसका प्रभाव रहता है। उन्होंने बताया कि जिस नक्षत्र में ग्रहण पड़ता है उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं होता है। सूतक काल में असुचिता यानि अपवित्रता के चलते देव दर्शन नहीं किए जाते हैं। इसी लिए सूतक काल शुरूहोने से पूर्व ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और माना जाता है। इस सूतक काल में भगवान भी शयन को चले जाते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद ही मंदिरों के कपाट देव दर्शन को खोले जाते हैं। यही वजह है कि ग्रहण के बाद मंदिरों की साफ-सफाई करने के साथ ही भगवान का स्नान ध्यान करने के बाद पोषाक बदलकर नया श्रृंगार करने के बाद भी पूजन अर्चन किया जाता है। सोमवार को रक्षाबंधन के दिन ग्रहण का सूतक लगने के चलते दोपहर साढ़े बारह बजे पूजन अर्चन करने के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। इसके बाद रात्रि में 10.52 बजे से रात्रि 12.48 बजे तक ग्रहण पड़ा। इसके बाद अगले दिन मंगलवार को ब्रह्मम मुहूर्त में ही मंदिरों के कपाट खोलकर भगवान का स्नान ध्यान कराया गया और नई पोषाकों के साथ भव्य श्रंगार करने के उपरांत पूजन अर्चन और आरती की गई।
विज्ञापन

---------------

श्रद्धालुओं ने बनाए 15 लाख पार्थिव शिवलिंग
ललितपुर। श्रीसिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण व श्रीरूद्रमहायज्ञ आयोजन में मंगलवार को श्रद्धालुओं ने 15 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण किया। इससे पूर्व श्रीरूद्रमहायज्ञ का पंचांग पूजन व पीठ पूजन किया गया। पीठ पूजन व पंचांग पूजन यज्ञाचार्य पं बाबूलाल शास्त्री सहित वैदिक ब्राह्माणों ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके उपरांत शिवमहापुराण की कथा सुनाते हुए चंडी पीठाधीश्वराचार्य चंद्रेश्वर गिरि ने कहा कि आप सभी रोग-शोक से रहित कल्याण मय भगवान शिव का स्मरण करके पुराणप्रवर शिवपुराण की, जो वेद के सार- तत्व से प्रकट हुआ। शिवपुराण में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य इन तीनों का प्रीतिपूर्वक गान किया गया है और वेदांत वैद्य सद्वस्तु का विशेष रुप से वर्णन है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed