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दो हजार से ज्यादा किसानों का अटका चना, मसूर का भुगतान
Updated Sat, 21 Jul 2018 01:56 AM IST
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किसानों का अटका चना, मसूर का भुगतान
ललितपुर। खरीद बंद होने के एक बाद भी किसानों को बेची गई उपज का भुगतान नहीं किया जा सका है। इससे उनमें असंतोष पनप रहा है। वह इसकी वास्तविकता जानने के लिए सरकारी कार्यालयों में पहुंच रहे हैं। लेकिन, उन्हें यहां निराशा हाथ लग रही है। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा उन्हें गोलमोल जवाब दिया जा रहा है। जिससे समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है।
प्रदेश सरकार ने किसानों को लाभान्वित करने के लिए मूल्य समर्थन योजना लागू की। जिसके तहत गेहूं, चना व मसूर के लिए खरीद केंद्र खोले गए। पंद्रह अप्रैल को चना, मसूर की खरीद की घोषणा की गई लेकिन जिले में मई माह में इसकी खरीद शुरू हो पाई। बीस जून तक जिले में 2974 किसानों से 4886 मीट्रिक टन चना व मसूर की खरीद की गई। इसमें चना 2519.850 मीट्रिक टन एवं मसूर 2366.200 मीट्रिक टन खरीदा गया। शुरुआत में भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आई लेकिन बाद में गति मंथर हो गई। नतीजा यह हुआ कि जिन किसानों ने अपनी उपज बेची है, वे आज भी संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि 636 किसानों को 434.24 लाख रुपये के भुगतान के लिए सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं, अवशेष 2338 किसानों का 1680.13 लाख रुपये के भुगतान की प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हो पाई है। यदि इसी तरह भुगतान की लेटलतीफ प्रक्रिया चलती रही तो किसानों का गुस्सा कभी भी विभाग के प्रति फूट सकता है। इस मामले को विभागीय अफसर हल्के में ले रहे हैं। जिससे किसानों की समस्याओं का त्वरित निदान नहीं हो पा रहा है।
एनीएमएल साफ्टवेयर से होगा भुगतान
जिन किसानों ने चना, मसूर क्रय केंद्रों पर बेचा है, उनके सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसका डाटा एनीएमएल साफ्टवेयर पर अपलोड करा दिया गया है। अब लखनऊ से ही इसका भुगतान होगा।
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अनूप कुमार द्विवेदी
सहायक निबंधक सहकारी समितियां
आगे आया किसान संघ, मिले डीएम से
भारतीय किसान संघ किसानों के अटके भुगतान को कराने के लिए आगे आ गया है। शुक्रवार को संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष केहर सिंह बुंदेला की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिला। उन्होंने डीएम को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया है कि एक माह से ज्यादा का समय व्यतीत हो चुका है। भुगतान के अभाव में किसान अपना क्रेेडिट कार्ड नहीं भर पा रहे हैं। वहीं, खाद, बीज के खरीदने की भी समस्या देखी जा रही है। उन्होंने जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन पर सोहनलाल विश्वकर्मा, बाबूलाल आदि के हस्ताक्षर बने हैं।
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ललितपुर। खरीद बंद होने के एक बाद भी किसानों को बेची गई उपज का भुगतान नहीं किया जा सका है। इससे उनमें असंतोष पनप रहा है। वह इसकी वास्तविकता जानने के लिए सरकारी कार्यालयों में पहुंच रहे हैं। लेकिन, उन्हें यहां निराशा हाथ लग रही है। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा उन्हें गोलमोल जवाब दिया जा रहा है। जिससे समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है।
प्रदेश सरकार ने किसानों को लाभान्वित करने के लिए मूल्य समर्थन योजना लागू की। जिसके तहत गेहूं, चना व मसूर के लिए खरीद केंद्र खोले गए। पंद्रह अप्रैल को चना, मसूर की खरीद की घोषणा की गई लेकिन जिले में मई माह में इसकी खरीद शुरू हो पाई। बीस जून तक जिले में 2974 किसानों से 4886 मीट्रिक टन चना व मसूर की खरीद की गई। इसमें चना 2519.850 मीट्रिक टन एवं मसूर 2366.200 मीट्रिक टन खरीदा गया। शुरुआत में भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आई लेकिन बाद में गति मंथर हो गई। नतीजा यह हुआ कि जिन किसानों ने अपनी उपज बेची है, वे आज भी संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि 636 किसानों को 434.24 लाख रुपये के भुगतान के लिए सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं, अवशेष 2338 किसानों का 1680.13 लाख रुपये के भुगतान की प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हो पाई है। यदि इसी तरह भुगतान की लेटलतीफ प्रक्रिया चलती रही तो किसानों का गुस्सा कभी भी विभाग के प्रति फूट सकता है। इस मामले को विभागीय अफसर हल्के में ले रहे हैं। जिससे किसानों की समस्याओं का त्वरित निदान नहीं हो पा रहा है।
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एनीएमएल साफ्टवेयर से होगा भुगतान
जिन किसानों ने चना, मसूर क्रय केंद्रों पर बेचा है, उनके सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसका डाटा एनीएमएल साफ्टवेयर पर अपलोड करा दिया गया है। अब लखनऊ से ही इसका भुगतान होगा।
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अनूप कुमार द्विवेदी
सहायक निबंधक सहकारी समितियां
आगे आया किसान संघ, मिले डीएम से
भारतीय किसान संघ किसानों के अटके भुगतान को कराने के लिए आगे आ गया है। शुक्रवार को संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष केहर सिंह बुंदेला की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिला। उन्होंने डीएम को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया है कि एक माह से ज्यादा का समय व्यतीत हो चुका है। भुगतान के अभाव में किसान अपना क्रेेडिट कार्ड नहीं भर पा रहे हैं। वहीं, खाद, बीज के खरीदने की भी समस्या देखी जा रही है। उन्होंने जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन पर सोहनलाल विश्वकर्मा, बाबूलाल आदि के हस्ताक्षर बने हैं।