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नव वर्ष पर हुआ कवि सम्मेलन व मुशायरा
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:45 AM IST
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नववर्ष पर हुआ कवि सम्मेलन व मुशायरा
ललितपुर। कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी उर्दू अदवी संगम व सहयोगी संस्थाओं ने नव वर्ष के अवसर पर कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन श्रीराम पब्लिक कान्वेंट स्कूल रामनगर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हुकुम चंद्र पवैया व अध्यक्षता लोकतंत्र सेनानी वासुदेव सिंधि ने की। संस्था अध्यक्ष रामकृष्ण कुशवाहा ने सभी को नववर्ष की बधाई देेते हुए कहा कि नफरत की आंधियों ने कितने चिराग बुझाए हैं, फिरका परस्ती की आग ने लाखों घर जलाए हैं। अहसास हो गया जब उन्हें अपने गुनाह का, अमन की राह पे लोग फिर लौट आए हैं। रामस्वरूप नामदेव अनुरागी ने मुहब्बत का पैगाम देेते हुए कहा- नव वर्ष नया साल उम्मीदें लेेके आ गया, नफरतें मिटा दो दिल से प्यार ले के आ गया। प्रशांत श्रीवास्तव ने गीत पेश करते हुए कहा- में किसी बूंद का विखरा हुआ अरमान सा हूं, और सफर में कोई छूटा हुआ सामान सा हूं। विशन सिंह ने शेर पढ़ते हुए- हम दुनियां को हंसाते रहे, अपने गम दिल में छुपाए रहे। अन्य कवियों में सखर हिंदुस्तानी, गेंदालाल सतभैया, एमएल भटनागर, अर्पित जैन, अशोक क्रांतिकारी, दादा शिखर चंद्र मुफलिस को उनके 86 वें जन्मदिवस पर माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। साथ ही जहीर ललितपुरी, श्यामलाल, सोनियां शबनम, केके पाठक, राजाराम खटीक, ने गीत गजलों से श्रोताओं का मनमोह लिया। इस दौरान मनीषा, रेखा शर्मा, अर्चना राठौर, प्राची राठौर, आरती नामदेव, दीप्ति राठौर, जीवन झा, हरीश कुमार, पवन जैन, राकेश सुदामा देवी, ऋषि तिवारी मौजूद रहे।
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ललितपुर। कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी उर्दू अदवी संगम व सहयोगी संस्थाओं ने नव वर्ष के अवसर पर कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन श्रीराम पब्लिक कान्वेंट स्कूल रामनगर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हुकुम चंद्र पवैया व अध्यक्षता लोकतंत्र सेनानी वासुदेव सिंधि ने की। संस्था अध्यक्ष रामकृष्ण कुशवाहा ने सभी को नववर्ष की बधाई देेते हुए कहा कि नफरत की आंधियों ने कितने चिराग बुझाए हैं, फिरका परस्ती की आग ने लाखों घर जलाए हैं। अहसास हो गया जब उन्हें अपने गुनाह का, अमन की राह पे लोग फिर लौट आए हैं। रामस्वरूप नामदेव अनुरागी ने मुहब्बत का पैगाम देेते हुए कहा- नव वर्ष नया साल उम्मीदें लेेके आ गया, नफरतें मिटा दो दिल से प्यार ले के आ गया। प्रशांत श्रीवास्तव ने गीत पेश करते हुए कहा- में किसी बूंद का विखरा हुआ अरमान सा हूं, और सफर में कोई छूटा हुआ सामान सा हूं। विशन सिंह ने शेर पढ़ते हुए- हम दुनियां को हंसाते रहे, अपने गम दिल में छुपाए रहे। अन्य कवियों में सखर हिंदुस्तानी, गेंदालाल सतभैया, एमएल भटनागर, अर्पित जैन, अशोक क्रांतिकारी, दादा शिखर चंद्र मुफलिस को उनके 86 वें जन्मदिवस पर माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। साथ ही जहीर ललितपुरी, श्यामलाल, सोनियां शबनम, केके पाठक, राजाराम खटीक, ने गीत गजलों से श्रोताओं का मनमोह लिया। इस दौरान मनीषा, रेखा शर्मा, अर्चना राठौर, प्राची राठौर, आरती नामदेव, दीप्ति राठौर, जीवन झा, हरीश कुमार, पवन जैन, राकेश सुदामा देवी, ऋषि तिवारी मौजूद रहे।