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प्राचीन जल स्रोतों की नहीं कोई खैर ख्वाह

Mon, 13 May 2019 12:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 May 2019 12:48 AM IST
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प्राचीन जल स्रोतों की नहीं कोई खैर ख्वाह
प्राचीन जल स्रोतों की नहीं कोई खैरख्वाह
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ललितपुर। बदलते दौर में व्यक्ति सुविधाभोगी हो गया है। अब उसके पास कुएं से खींचकर पानी भरने का समय नहीं रहा और वह पाइप लाइन एवं हैंडपंप पर निर्भर होकर रह गया। इससे यह हुआ कि वर्षों पहले अधिकांश बनाए गए कुएं या तो कचराघर में तब्दील हो गए या फिर उनका पानी पीने योग्य ही नहीं रहा। मौजूदा दौर में पाइप लाइन से जलापूर्ति व हैंडपंप भी लोगों को परेशान करने लगे हैं, जिससे लोगों का ध्यान वापस पुराने कुओं पर आया है। पिछले दिनों नगर पालिका की बैठक में पुराने कुओं के पानी को इस्तेमाल योग्य बनाने पर चर्चा की गई। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. संजय कुमार मिश्र ने कहा था कि पूर्व से बने कुओं की सफाई कराई जाएगी। इसके बाद भी शहर के कई कुओं में कचरा भरा है। इन्हीं में से एक ललित टाकीज के सामने का कुओं है, जो अब अतिक्रमण की चपेट में है। अंदर झांकने पर उसमें कचरा नजर आता है। कमोवेश यही स्थिति पुरानी तहसील के अंदर कुएं की है। शहर के कई अन्य कुओं का पानी देखरेख के अभाव में दूषित हो गया है। स्थानीय लोग न तो उस पानी से कपड़े धो सकते हैं और न ही नहा सकते हैं। लोगों का कहना है कि शहर में करीब पचास कुएं हैं, जिनकी सफाई करा दी जाए तो पानी की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
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