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व्यापार मंडल ने की स्वकर सूची पर रोक लगाने की मांग
Updated Sat, 11 Aug 2018 01:17 AM IST
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स्वकर सूची पर लगाएं रोक
ललितपुर। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने शुक्रवार को नगर पालिका अध्यक्ष को ज्ञापन देकर जल संस्थान को जारी स्वकर निर्धारण की सूची पर अविलंब रोक लगाए जाने की मांग की। स्वकर प्रक्रिया को नगर पालिका के सभी पार्षदों के बीच में सुनवाई कर अंतिम रूप से निस्तारित किए जाने की भी मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि नगर पालिका द्वारा जल संस्थान को जो स्वकर निर्धारण को सूची सौंपी गई है, वह असंवैधानिक है, जिसे निरस्त किया जाना जनहित में आवश्यक है। जलसंस्थान द्वारा हजारों एवं लाखों के बिल वार्डों में प्रेषित किए जा रहे हैं। इससे परिषद व बोर्ड की छवि खराब हो रही है। जो कभी भी बड़े जन आंदोलन का रुप ले सकती है। नगर पालिका द्वारा पहले अपने स्तर से स्वकर के नोटिस जारी करना चाहिए और इसे पार्षदों के बीच सुनाई कर एवं मौके की स्थिति के आधार पर कर निर्धारण का अंतिम रुप दिया जाना चाहिए था। इसके बाद सूची जारी करनी थी। यह भी बताया कि वर्ष 2011-12 में कर समिति द्वारा ग्रहकर की सुनवाई पूर्ण किए जाकर वर्ष 2015-16 तक की प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है। इसलिए वर्ष 2014 से स्वकर की वसूली की किया जाना वैधानिक नहीं है। व्यापारियों ने नगर पालिका अध्यक्षा से स्वकर निर्धारण के संबंध में नोटिस जारी कर सुनवाई कर अंतिम रुप से निस्तारित किए जाने की मांग की है। ज्ञापन पर प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र जैन मयूर, महेंद्र सतभैया, अशोक अनौरा, प्रीतम सराफ आदि के हस्ताक्षर हैं।
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ललितपुर। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने शुक्रवार को नगर पालिका अध्यक्ष को ज्ञापन देकर जल संस्थान को जारी स्वकर निर्धारण की सूची पर अविलंब रोक लगाए जाने की मांग की। स्वकर प्रक्रिया को नगर पालिका के सभी पार्षदों के बीच में सुनवाई कर अंतिम रूप से निस्तारित किए जाने की भी मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि नगर पालिका द्वारा जल संस्थान को जो स्वकर निर्धारण को सूची सौंपी गई है, वह असंवैधानिक है, जिसे निरस्त किया जाना जनहित में आवश्यक है। जलसंस्थान द्वारा हजारों एवं लाखों के बिल वार्डों में प्रेषित किए जा रहे हैं। इससे परिषद व बोर्ड की छवि खराब हो रही है। जो कभी भी बड़े जन आंदोलन का रुप ले सकती है। नगर पालिका द्वारा पहले अपने स्तर से स्वकर के नोटिस जारी करना चाहिए और इसे पार्षदों के बीच सुनाई कर एवं मौके की स्थिति के आधार पर कर निर्धारण का अंतिम रुप दिया जाना चाहिए था। इसके बाद सूची जारी करनी थी। यह भी बताया कि वर्ष 2011-12 में कर समिति द्वारा ग्रहकर की सुनवाई पूर्ण किए जाकर वर्ष 2015-16 तक की प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है। इसलिए वर्ष 2014 से स्वकर की वसूली की किया जाना वैधानिक नहीं है। व्यापारियों ने नगर पालिका अध्यक्षा से स्वकर निर्धारण के संबंध में नोटिस जारी कर सुनवाई कर अंतिम रुप से निस्तारित किए जाने की मांग की है। ज्ञापन पर प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र जैन मयूर, महेंद्र सतभैया, अशोक अनौरा, प्रीतम सराफ आदि के हस्ताक्षर हैं।
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