{"_id":"65f758f841bd7f8010076e7e","slug":"yagya-prakash-joins-the-list-of-sanskrit-scholars-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1001-116250-2024-03-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: संस्कृत के विद्वानों की सूची में शामिल हुए यज्ञ प्रकाश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: संस्कृत के विद्वानों की सूची में शामिल हुए यज्ञ प्रकाश
विज्ञापन
यज्ञ प्रकाश बाजपेई
लखीमपुर खीरी। भीरा क्षेत्र के छोटे से गांव धर्मापुर निवासी शिक्षक के बेटे 34 वर्षीय यज्ञ प्रकाश बाजपेई अब आम युवा नहीं, बल्कि संस्कृत के विद्वानों की श्रेणी में आ गए हैं। यूपी संस्कृत संस्थान के विद्वानों की सूची में इनका नाम शामिल किया गया है। हालांकि जनपद के छह विद्वानों के नाम पहले से शामिल हैं, लेकिन वह सभी 50 साल या इससे अधिक उम्र के हैं।
यज्ञ की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही मां दुर्गा जगरानी देवी संस्कृत विद्या मंदिर में हुई। यह परंपरागत रूप से नव्य व्याकरण आचार्य हैं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ से संस्कृत व्याकरण में पीएचडी कर शोधपत्र जमा कर चुके हैं। पीएचसी की उपाधि मिलने वाली है। इनको संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। महज 34 साल की उम्र में इनकी पांच पुस्तकें शब्द ब्रह्म स्वरूप, पाणिनि व्याकरणस्य व्यावहारिकत्वम्, शब्दज्ञ तथा तत्त्वज्ञ प्रकाशित हो चुकी हैं।
इसके अलावा संस्कृत में कई लेख लिख चुके हैं। संस्कृत के प्रसार के लिए ग्रामीण, निर्धन छात्रों में निशुल्क संस्कृत शिक्षण, स्फुट काव्य लेखन और संगोष्ठी में सहभागिता की। मौजूदा समय में यज्ञ बाजपेई लखीमपुर के सनातन धर्म संस्कृत विद्यालय में आचार्य के पद सेवाएं दे रहे हैंं। यज्ञ का जन्म 20 अप्रैल 1990 में हुआ था। पिता डॉ. विनोद बाजपेई शिक्षक हैं, जो गांव में ही एक संस्कृत कॉलेज चलाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
यज्ञ की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही मां दुर्गा जगरानी देवी संस्कृत विद्या मंदिर में हुई। यह परंपरागत रूप से नव्य व्याकरण आचार्य हैं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ से संस्कृत व्याकरण में पीएचडी कर शोधपत्र जमा कर चुके हैं। पीएचसी की उपाधि मिलने वाली है। इनको संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। महज 34 साल की उम्र में इनकी पांच पुस्तकें शब्द ब्रह्म स्वरूप, पाणिनि व्याकरणस्य व्यावहारिकत्वम्, शब्दज्ञ तथा तत्त्वज्ञ प्रकाशित हो चुकी हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा संस्कृत में कई लेख लिख चुके हैं। संस्कृत के प्रसार के लिए ग्रामीण, निर्धन छात्रों में निशुल्क संस्कृत शिक्षण, स्फुट काव्य लेखन और संगोष्ठी में सहभागिता की। मौजूदा समय में यज्ञ बाजपेई लखीमपुर के सनातन धर्म संस्कृत विद्यालय में आचार्य के पद सेवाएं दे रहे हैंं। यज्ञ का जन्म 20 अप्रैल 1990 में हुआ था। पिता डॉ. विनोद बाजपेई शिक्षक हैं, जो गांव में ही एक संस्कृत कॉलेज चलाते हैं।
विज्ञापन