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विश्व को एक सूत्र में पिरोती है संस्कृत
लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 16 Jun 2015 10:46 PM IST
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संस्कृत पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरोती है इसकी वैज्ञानिकता एवं मधुरता के आगे पूरी दुनिया नत मस्तक है। व्यक्तित्व का विकास संस्कृत बोलने से स्वयं ही हो जाता है। यह बात नवभारत पब्लिक स्कूल में संस्कृत प्रशिक्षण वर्ग के समापन के मौके पर मुख्य अतिथि असिस्टेंट सेल्स टैक्स कमिश्नर अमित कुमार पाठक ने कही।
शिविर के समापन अवसर पर विशिष्ट अतिथि सुरेश चंद गुप्ता ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। यहां संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री पृथ्वीराज ने कहा कि संस्कृत भारती कोई संस्था नहीं बल्कि एक आंदोलन है। इसके माध्यम से दुनिया में एक करोड़ से अधिक लोगों ने संस्कृत बोलनी सीखी है। यहां संस्कृत भारती के विभाग संयोजक डॉ. ओमकार दुबे ने कहा कि संस्कृत अपनी मात्र भाषा है जब कोई बच्चा पैदा होता है तो पहले संस्कृत का शब्द ही बोलता है। बाद में अन्य कोई भाषा सीखता है। उन्होंने बताया कि इस शिविर में 102 लोगों ने संस्कृत बोलने का प्रशिक्षण लिया। शिविर के समापन पर अतिथियों का स्वागत हरिप्रकाश त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विभाग प्रचारक, अमरनाथ, प्रबंधक स्वर्णसिंह कंबोज, नंद्र किशोर अग्रवाल, अवनीश गुप्ता, कृपाशंकर मिश्र, जिला प्रचारक तुलसीराम, आचार्य संजय मिश्र, नरेश चंद्र गुप्ता सहित तमाम लोग उपस्थित थे।
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शिविर के समापन अवसर पर विशिष्ट अतिथि सुरेश चंद गुप्ता ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। यहां संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री पृथ्वीराज ने कहा कि संस्कृत भारती कोई संस्था नहीं बल्कि एक आंदोलन है। इसके माध्यम से दुनिया में एक करोड़ से अधिक लोगों ने संस्कृत बोलनी सीखी है। यहां संस्कृत भारती के विभाग संयोजक डॉ. ओमकार दुबे ने कहा कि संस्कृत अपनी मात्र भाषा है जब कोई बच्चा पैदा होता है तो पहले संस्कृत का शब्द ही बोलता है। बाद में अन्य कोई भाषा सीखता है। उन्होंने बताया कि इस शिविर में 102 लोगों ने संस्कृत बोलने का प्रशिक्षण लिया। शिविर के समापन पर अतिथियों का स्वागत हरिप्रकाश त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विभाग प्रचारक, अमरनाथ, प्रबंधक स्वर्णसिंह कंबोज, नंद्र किशोर अग्रवाल, अवनीश गुप्ता, कृपाशंकर मिश्र, जिला प्रचारक तुलसीराम, आचार्य संजय मिश्र, नरेश चंद्र गुप्ता सहित तमाम लोग उपस्थित थे।
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