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Lakhimpur Kheri News: आठ के बजाय एक ड्रेजिंग मशीन से हो रहा काम, टूटेगा मुख्यमंत्री का वादा
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पलियाकलां। क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए शुरू कराया गया शारदा नदी में ड्रेजिंग व चैनेलाइजेशन का कार्य लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22.23 करोड़ की लागत के इस कार्य के 12 जून तक पूरा होने का भरोसा दिया था। दूसरी ओर जिस तरह काम हो रहा उससे उनका वादा पूरा होता नहीं दिख रहा। इसका कारण है कि आठ ड्रेजिंग मशीनों के बजाय केवल एक ड्रेजिंग मशीन लगाकर कार्य हो रहा है।
पलिया शारदा नदी में पुल संख्या 97 की अपस्ट्रीम में पांच किलोमीटर व डाउनस्ट्रीम में दो किलोमीटर समेत कुल सात किलोमीटर की ड्रेजिंग व चैनेलाइजेशन का कार्य चल रहा है। पूर्व में बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज के पास हुए ड्रेजिंग कार्य की तर्ज पर मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। 22.23 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में टेंडर देने के बाद कार्य शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन को दिया गया। इसके बाद टेंडर के मुताबिक 250 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा बालू की ड्रेजिंग करने वाली आठ ड्रेजिंग मशीनों को लगाया जाना था, लेकिन कार्य शुरू होने के बाद से केवल एक ड्रेजिंग मशीन के सहारे की कार्य काम जा रहा है। कई लाख क्यूबिक मीटर बालू की ड्रेजिंग की जानी है, लेकिन पोकलेन मशीन, मडपंप और ट्रैक्टर-ट्राॅलियों का सहारा लेकर ड्रेजिंग व चैनेलाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इससे जहां कार्य पूरा होने में समय लगेगा, वहीं बाढ़ से निजात मिलेगी कि नहीं, इस पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
बीती 26 अप्रैल को यहां पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्य के 12 जून तक पूरा होने की बात कही थी, लेकिन जिस तरह कार्य किया जा रहा है, उससे निर्धारित समय सीमा पर पूरा नहीं हो पाएगा। इससे क्षेत्र की जनता भी बाढ़ को लेकर डरने लगी है। इस कार्य पर पलिया विधायक रोमी साहनी ने भी सवाल उठाते हुए डीएम को पत्र भेजा था, जिसमें कार्य ठीक प्रकार न होने पर कार्यदायी संस्था का भुगतान रोके जाने की मांग भी की थी।
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मुख्य अभियंता ने भी की लीपापोती
बीती नौ मई को शारदा नदी में चल रहे ड्रेजिंग व चैनेलाइजेशन कार्य का जायजा लेने बरेली से शारदा के मुख्य अभियंता एचएन सिंह भी आए थे। उन्होंने यहां ड्रेजिंग कार्य का निरीक्षण किया था। इसमें उन्होंने बताया कि नदी में छोटे-बड़े 25 ड्रेजर कार्य कर रहे हैं, जबकि मौके पर केवल एक ड्रेजर और बाकी मडपंप लगे हुए मिले थे। खानापूरी करने के बाद कार्य सही होने की बात कह वह यहां से रवाना हो गए थे, जिसका लोगों ने विरोध भी किया था।
व्यापारियों ने जताया रोष
पलिया के शारदा नदी में चल रहे ड्रेजिंग कार्य का पलिया के व्यापारियों ने भी विरोध जताया है। व्यापारियों का कहना है कि कार्य सही ढंग से नहीं हो रहा है और पलिया में फिर से बाढ़ आने के आसार बने हुए हैं। नगर व्यापार मंडल पलिया के अध्यक्ष अनूप मिश्रा ने कहा कि आठ मशीनों को लगाया जाना चाहिए था, लेकिन मौके पर केवल एक मशीन से कार्य हो रहा है। अन्य व्यापारियों ने भी विरोध जताया है।
26 लाख क्यूबिक मीटर बालू की होनी है ड्रेजिंग
अधिकारियों की मानें तो ड्रेजिंग कार्य में करीब 26 लाख क्यूबिक मीटर बालू की ड्रेजिंग होनी है और यह बालू दोनों तरफ लगाकर नदी में पानी का रास्ता बनाया जाना है। यह 26 लाख क्यूबिक मीटर बालू केवल एक ड्रेजिंग मशीन से निर्धारित समय में निकालना मुश्किल है और इसके लिए अन्य ड्रेजिंग मशीनों की आवश्यकता है लेकिन फिर भी केवल एक ड्रेजिंग मशीन से कार्य कर खानापूरी करने का कार्य विभाग द्वारा किया जा रहा है।
मानकों के अनुसार हो कार्य : रोमी साहनी
पलिया विधायक रोमी साहनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 22 करोड़ का दिया गया था। टेंडर में लिखी हुई शर्तों के अनुसार ही सारे मानक पूरे होने के बाद कार्य होना चाहिए। शर्तों के अनुसार ही उनको यह प्रोजेक्ट और करोड़ों रुपये मिले हैं तो उन्हीं मानकों के अनुसार कार्य करें ताकि पलिया की जनता को बाढ़ से निजात मिल सके।
मामले की जानकारी विभागीय अफसरों से की जाएगी। अगर कोई लापरवाही बरती जा रही है, उसकी भी जवाबदेही तय की जाएगी। -अभिषेक कुमार, सीडीओ
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पलिया शारदा नदी में पुल संख्या 97 की अपस्ट्रीम में पांच किलोमीटर व डाउनस्ट्रीम में दो किलोमीटर समेत कुल सात किलोमीटर की ड्रेजिंग व चैनेलाइजेशन का कार्य चल रहा है। पूर्व में बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज के पास हुए ड्रेजिंग कार्य की तर्ज पर मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। 22.23 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में टेंडर देने के बाद कार्य शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन को दिया गया। इसके बाद टेंडर के मुताबिक 250 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा बालू की ड्रेजिंग करने वाली आठ ड्रेजिंग मशीनों को लगाया जाना था, लेकिन कार्य शुरू होने के बाद से केवल एक ड्रेजिंग मशीन के सहारे की कार्य काम जा रहा है। कई लाख क्यूबिक मीटर बालू की ड्रेजिंग की जानी है, लेकिन पोकलेन मशीन, मडपंप और ट्रैक्टर-ट्राॅलियों का सहारा लेकर ड्रेजिंग व चैनेलाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इससे जहां कार्य पूरा होने में समय लगेगा, वहीं बाढ़ से निजात मिलेगी कि नहीं, इस पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
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बीती 26 अप्रैल को यहां पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्य के 12 जून तक पूरा होने की बात कही थी, लेकिन जिस तरह कार्य किया जा रहा है, उससे निर्धारित समय सीमा पर पूरा नहीं हो पाएगा। इससे क्षेत्र की जनता भी बाढ़ को लेकर डरने लगी है। इस कार्य पर पलिया विधायक रोमी साहनी ने भी सवाल उठाते हुए डीएम को पत्र भेजा था, जिसमें कार्य ठीक प्रकार न होने पर कार्यदायी संस्था का भुगतान रोके जाने की मांग भी की थी।
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मुख्य अभियंता ने भी की लीपापोती
बीती नौ मई को शारदा नदी में चल रहे ड्रेजिंग व चैनेलाइजेशन कार्य का जायजा लेने बरेली से शारदा के मुख्य अभियंता एचएन सिंह भी आए थे। उन्होंने यहां ड्रेजिंग कार्य का निरीक्षण किया था। इसमें उन्होंने बताया कि नदी में छोटे-बड़े 25 ड्रेजर कार्य कर रहे हैं, जबकि मौके पर केवल एक ड्रेजर और बाकी मडपंप लगे हुए मिले थे। खानापूरी करने के बाद कार्य सही होने की बात कह वह यहां से रवाना हो गए थे, जिसका लोगों ने विरोध भी किया था।
व्यापारियों ने जताया रोष
पलिया के शारदा नदी में चल रहे ड्रेजिंग कार्य का पलिया के व्यापारियों ने भी विरोध जताया है। व्यापारियों का कहना है कि कार्य सही ढंग से नहीं हो रहा है और पलिया में फिर से बाढ़ आने के आसार बने हुए हैं। नगर व्यापार मंडल पलिया के अध्यक्ष अनूप मिश्रा ने कहा कि आठ मशीनों को लगाया जाना चाहिए था, लेकिन मौके पर केवल एक मशीन से कार्य हो रहा है। अन्य व्यापारियों ने भी विरोध जताया है।
26 लाख क्यूबिक मीटर बालू की होनी है ड्रेजिंग
अधिकारियों की मानें तो ड्रेजिंग कार्य में करीब 26 लाख क्यूबिक मीटर बालू की ड्रेजिंग होनी है और यह बालू दोनों तरफ लगाकर नदी में पानी का रास्ता बनाया जाना है। यह 26 लाख क्यूबिक मीटर बालू केवल एक ड्रेजिंग मशीन से निर्धारित समय में निकालना मुश्किल है और इसके लिए अन्य ड्रेजिंग मशीनों की आवश्यकता है लेकिन फिर भी केवल एक ड्रेजिंग मशीन से कार्य कर खानापूरी करने का कार्य विभाग द्वारा किया जा रहा है।
मानकों के अनुसार हो कार्य : रोमी साहनी
पलिया विधायक रोमी साहनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 22 करोड़ का दिया गया था। टेंडर में लिखी हुई शर्तों के अनुसार ही सारे मानक पूरे होने के बाद कार्य होना चाहिए। शर्तों के अनुसार ही उनको यह प्रोजेक्ट और करोड़ों रुपये मिले हैं तो उन्हीं मानकों के अनुसार कार्य करें ताकि पलिया की जनता को बाढ़ से निजात मिल सके।
मामले की जानकारी विभागीय अफसरों से की जाएगी। अगर कोई लापरवाही बरती जा रही है, उसकी भी जवाबदेही तय की जाएगी। -अभिषेक कुमार, सीडीओ