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दिमागी बुखार के साथ मलेरिया का प्रकोप

Sun, 20 Sep 2015 11:15 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Sun, 20 Sep 2015 11:15 PM IST
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With meningitis Outbreaks of malaria
जिले में दिमागी बुखार के साथ ही मलेरिया भी फैल गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 125 रोगी मलेरिया से पीड़ित मिले हैं। रविवार को जिला अस्पताल में सात बच्चे और भर्ती कराए गए, जिसमें से तीन को रेफर कर दिया गया। इनकी स्लाइड भी नहीं बन सकी, क्योंकि मलेरिया की स्लाइड बनाने वाली पैथालॉजी रविवार को बंद रही।
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रविवार को जिला अस्पताल के चिल्ड्रेंस वार्ड में सात बच्चे बुखार से पीड़ित भर्ती कराए गए, लेकिन छुट्टी होने के कारण इनकी कोई जांच नहीं हो सकी। गंभीर तीन बच्चों को लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया। भर्ती कराए गए बच्चों में निघासन के मझलीपुरवार निवासी रामगोपाल का चार वर्षीय पुत्री शिवानी, शारदानगर के खइयां निवासी विजय की चार वर्षीय पुत्री पिंकी, गोला के उपेंद्र सिंह के दो माह का पुत्र सार्थक, निघासन के बसैहा निवासी किशन की 10 साल की पुत्री नीतू, नीमगांव के रामबहादुर के सात साल का पुत्र शिवम और चार साल की पुत्री गुडिय़ा और मोहम्मदी के इकराम का तीन साल का पुत्र रईस शामिल हैं। इनमें शिवम, गुडिय़ा और रईस का रेफर कर दिया गया। इनकी स्लाइड तक नहीं बनाई गई। उधर मलेरिया से जंग में स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरत रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जिला मलेरिया अधिकारी को मच्छर जनित रोगों के नियंत्रण की जिम्मेदारी है। नगर पालिका परिषदों को फॉगिंग की जिम्मेदारी दी गई है। मलेरिया विभाग की आंकड़ेबाजी पर नजर डालें तो 2013 से अब तक मलेरिया के सिर्फ  673 मामले सामने आए हैं। डेंगू के आंकड़ों को विभाग छिपाने में जुटा रहता है। ये आंकड़े उन मरीजों के हैं जो स्वयं अपनी जांच कराने को पीएचसी और सीएचसी या फिर जिला मलेेरिया कार्यालय पर पहुंचे हैं। मलेरिया विभाग के कर्मचारियों ने घर-घर जाकर जो ब्लड स्लाइड बनाई, उसमें एक भी मलेरिया का मरीज नहीं मिला है।
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नोडल अधिकारी-मलेरिया विभाग एसके वर्मा ने बताया कि मलेरिया यूनिट अपना काम बखूबी कर रही है। मच्छरों को पकड़कर उनका परीक्षण भी होता है और घर घर जाकर मलेरिया रोगी चिन्हित कर स्लाइड बनाई जाती है। कुछ संसाधनों की कमी जरूर है, जिसकी लिखापढ़ी की गई है। मनेरिया का प्रकोप सामने आया है, इसलिए फांगिंग भी कराई जा रही है।
सीएमओ डॉ. वीके साहू ने बताया कि जिला अस्पताल में बुखार के सात मरीज और भर्ती हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। सभी जांचों की कार्रवाई नियमानुसार होती है। रविवार को जांच नहीं हो पाई, इसकी शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
2013 से अब तक मलेरिया के मरीज
वर्ष        ब्लड स्लाइड     मलेरिया मरीज
2013         63321               276
2014         52083               372
2015         25364               125
शहरों के विकास से फैल रहा मलेरिया
स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो शहर और कसबो में बिना प्लानिंग कॉलोनियां विकसित हो रही है, जहां पानी निकास तक की व्यवस्था नहीं होती। इससे गंदगी फैलती है। जल निकासी नहीं होने के चलते मच्छरों को पनपने के लिए मौका मिल जाता है। यही मच्छर जब आदमी को काटता है तो डेंगू और मलेरिया की बीमारी होती है।
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मच्छरों को पैदा होने से रोके
मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों से बचाव को स्वयं सुरक्षा ही सबसे आसान उपाय है। इसलिए निरोधात्मक कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक करना भी बहुत जरूरी है। मलेरिया, डेंगू, जापानी इंसेफेलाइटिस, दिमागी बुखार, चिकनगुनिया जैसी बीमारियां मच्छर से फैलती हैं। पानी के साथ-साथ आद्र्रता इनके पैदा होने में सहायता करती है इसलिए घर के अंदर और बाहर पानी को जमा न होने देघं। इससे मच्छरों की जनन को रोका जा सकता है। लोगों को सफाई रखने की जानकारी दी जानी चाहिए। गंदगी से होने वाली बीमारियो के बारे मे जागरूकता जरूरी है।
यहां पैदा होते हैं मच्छर
. मच्छर रुके हुए साफ पानी में होते हैं।
. हैंडपंप के पास पानी जमा होने से।
. बेकार पड़े टायर व बर्तनों में।
. अनुपयोगी कुओं में।
. खुली पानी की टंकियों, कूलर व फूलदान।
ऐसे बचें
. नल और हैंडपंप के पास पानी न जमा होने दें।
. तालाबा और कुएं में गम्बोजिया मछली पालें। ये मच्छर के लार्वा को खाती है।
. बुखार रोगी को मच्छरदानी में ही सुलाएं।
. शरीर के खुलें भागों में मच्छररोधी दवाएं नीम या सरसों का तेल लगाकर सोएं।
. पूरी आस्तीन के कपड़े पहन कर सोएं।
. कमरे में नीम की पत्ती का धुआं करें।
. बर्तन, टंकी को बंदकर रखें।
. कूलर, फूलदान की हर सप्ताह सफाई करें।


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