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सुराग लगा लेकिन हत्थे नहीं चढ़ा बाघ
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किशनपुर सेंक्चुरी में सर्च अभियान चलाते डीडी,साथ में वनाधिकारी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव ) से बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति मिलने के बाद गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लगाए जंगल में घूम रहे बाघ को तलाशने के लिए जारी सघन अभियान में वन विभाग को आंशिक सफलता मिली है। जंगल में लगे कैमरों में एक बार फिर बाघ की तस्वीर ट्रैप होने के साथ पगचिह्न भी दिखाई पड़े हैं। सर्च अभियान में लगी एक टीम को बाघ दिखाई भी पड़ा, लेकिन बार-बार वह आंखों से ओझल हो रहा है। जिसके चलते उसे ट्रैंक्युलाइज करने में दिक्कत आ रही हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में एक हफ्ते पहले शिकारियों के लगाए फंदे को तोड़कर भागा बाघ अब तक अपनी गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिये जंगल में घूम रहा है। बाघ की जान बचाने के लिए प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव ) ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति तीन दिन पहले जारी कर दी थी। तब से अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में टाइगर सर्च अभियान लगातार जारी है। इस बीच गुरुवार को इस बाघ की तस्वीरें फिर कैमरे में ट्रैप हुई हैं। इसके साथ ही उसके पगचिह्न भी दिखाई दिए हैं। इससे जल्दी ही बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की उम्मीद बंधी है, लेकिन अब तक सर्च टीमें बाघ को निशाने पर नहीं ले सकी हैं। जिसके चलते उसे ट्रैंक्युलाइज करने में दिक्कत आ रही हैं। वनाधिकारियों का मानना है कि यदि बाघ की गर्दन से जल्दी फंदा न निकाला गया तो झाड़ियों में रस्सी के फंस जाने से गर्दन में फंदा कस सकता है। जिससे बाघ की मौत भी हो सकती है। इसलिए उसे सुरक्षित करने के लिए जल्दी से जल्दी उसे ट्रैंक्युलाइज करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
किशनपुर सेंक्चुरी में गर्दन में रस्सी का फंदा लिये जंगल में घूम रहे बाघ की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है लेकिन घने जंगल और झाड़ियों में छिपे होने की वजह से अभी वह आंखों से ओझल है। उम्मीद है कि जल्दी ही उसे ट्रैंक्युलाइज कर फंदे से मुक्ति दिलाई जा सकेगी। - डॉ अनिल कुमार पटेल, प्रभारी उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क / डीडी, डीटीआर,बफरजोन।
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दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में एक हफ्ते पहले शिकारियों के लगाए फंदे को तोड़कर भागा बाघ अब तक अपनी गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिये जंगल में घूम रहा है। बाघ की जान बचाने के लिए प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव ) ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति तीन दिन पहले जारी कर दी थी। तब से अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में टाइगर सर्च अभियान लगातार जारी है। इस बीच गुरुवार को इस बाघ की तस्वीरें फिर कैमरे में ट्रैप हुई हैं। इसके साथ ही उसके पगचिह्न भी दिखाई दिए हैं। इससे जल्दी ही बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की उम्मीद बंधी है, लेकिन अब तक सर्च टीमें बाघ को निशाने पर नहीं ले सकी हैं। जिसके चलते उसे ट्रैंक्युलाइज करने में दिक्कत आ रही हैं। वनाधिकारियों का मानना है कि यदि बाघ की गर्दन से जल्दी फंदा न निकाला गया तो झाड़ियों में रस्सी के फंस जाने से गर्दन में फंदा कस सकता है। जिससे बाघ की मौत भी हो सकती है। इसलिए उसे सुरक्षित करने के लिए जल्दी से जल्दी उसे ट्रैंक्युलाइज करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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किशनपुर सेंक्चुरी में गर्दन में रस्सी का फंदा लिये जंगल में घूम रहे बाघ की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है लेकिन घने जंगल और झाड़ियों में छिपे होने की वजह से अभी वह आंखों से ओझल है। उम्मीद है कि जल्दी ही उसे ट्रैंक्युलाइज कर फंदे से मुक्ति दिलाई जा सकेगी। - डॉ अनिल कुमार पटेल, प्रभारी उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क / डीडी, डीटीआर,बफरजोन।
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गर्दन में रस्सी का फंदा लेकर जंगल में घूम रहे बाघ की कैमरे में ट्रैप हुई तस्वीर। संवाद- फोटो : LAKHIMPUR