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हाथियों पर सवार वन कर्मियों की टीमें कर रहीं निगरानी
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बांकेगंज। शाकाहारी वन्यजीवों में एंथ्रेक्स नामक बीमारी की दस्तक के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व में इससे बचाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। शनिवार को अलर्ट जारी किया गया था। इसके तुरंत बाद से वन्यजीवों की निगरानी बढ़ा दी गई है। खासकर गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में हाथियों के जरिए गैंडों की निगरानी की जा रही है।
शाकाहारी वन्यजीवों में होने वाली एंथ्रेक्स बीमारी से मौत का पहला मामला बिहार के वाल्मीकि नेशनल पार्क में सामने आया था। इसी के साथ वन विभाग चौकन्ना हो गया। डीटीआर में अलर्ट जारी होने के बाद दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर और वन्यजीव प्रतिपालक एसके अमरेश के नेतृत्व में वन कर्मियों ने पेट्रोलिंग तेज कर दी है। वन कर्मी भ्रमण के दौरान मिलने वाले शाकाहारी वन्यजीवों की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व की शान कहे जाने वाली गैंडा पुनर्वासन योजना फेज 1 और फेज 2 में कुशल वन कर्मियों को हाथियों के जरिए पेट्रोलिंग में लगाया गया है, जो गैंडों की सेहत और उनकी गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि फिलहाल डीटीआर में कहीं भी किसी भी शाकाहारी वन्यजीव में एंथ्रेक्स बीमारी के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए है। बावजूद इसके वनाधिकारियों और वन कर्मियों को लगातार पेट्रोलिंग कर शाकाहारी वन्यजीवों पर नजर बनाए रखने को कहा गया है।
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शाकाहारी वन्यजीवों में होने वाली एंथ्रेक्स बीमारी से मौत का पहला मामला बिहार के वाल्मीकि नेशनल पार्क में सामने आया था। इसी के साथ वन विभाग चौकन्ना हो गया। डीटीआर में अलर्ट जारी होने के बाद दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर और वन्यजीव प्रतिपालक एसके अमरेश के नेतृत्व में वन कर्मियों ने पेट्रोलिंग तेज कर दी है। वन कर्मी भ्रमण के दौरान मिलने वाले शाकाहारी वन्यजीवों की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व की शान कहे जाने वाली गैंडा पुनर्वासन योजना फेज 1 और फेज 2 में कुशल वन कर्मियों को हाथियों के जरिए पेट्रोलिंग में लगाया गया है, जो गैंडों की सेहत और उनकी गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि फिलहाल डीटीआर में कहीं भी किसी भी शाकाहारी वन्यजीव में एंथ्रेक्स बीमारी के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए है। बावजूद इसके वनाधिकारियों और वन कर्मियों को लगातार पेट्रोलिंग कर शाकाहारी वन्यजीवों पर नजर बनाए रखने को कहा गया है।
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