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बाघ की मौत से दुधवा प्रशासन सकते में, कांबिंग की
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किशनपुर सेंक्चुरी में मिला बाघ का शव ( फाइल फोटो)।
- फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। किशनपुर सेंक्चुरी में बाघ की मौत के बाद दुधवा प्रशासन सकते में है। मौत को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। यह भी चर्चा है कि कहीं बाघ शिकारियों के हत्थे तो नहीं चढ़ गया लेकिन दुधवा प्रशासन ने ऐसी किसी आशंका से इनकार किया है। आईवीआरआई बरेली से मिली रिपोर्ट में अंदरूनी तौर पर खून बहने से मौत की बात सामने आई है। इसी क्रम में सोमवार को भी दुधवा प्रशासन की ओर से जंगल में कांबिंग भी की गई लेकिन कोई संदेहास्पद वस्तु नहीं मिली।
किशनपुर सेंक्चुरी में रविवार को चलतुआ बीट में बड़ी नहर किनारे झाड़ियों में एक आठ साल के नर बाघ का शव मिला था, उसकी गर्दन में सूजन थी। जिसके चलते दुधवा प्रशासन ने संभावना जताई थी कि किसी बीमारी या फिर सेही का शिकार करते समय उसके कांटे गले में फंस जाने से बाघ की मौत हुई। बाद में बाघ के शव को पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेज दिया गया था।
यहां बता दें इससे पहले दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में एक बाघिन का शव मिला था। जिसके गले में नायलॉन की रस्सी का फंदा पड़ा था। इसके बाद किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में शिकार के लिए लगाए गए नायलॉन के फंदे में एक बाघ फंस गया था। बाघ की गर्दन से फंदा निकालने के लिए उसे ट्रैंक्युलाइज करने की काफी कोशिश की गई लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कामयाबी नहीं मिली। इस दौरान किशनपुर सेंक्चुरी में गर्दन में फंदा लिए बाघ जंगल में आज भी घूम रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व और आसपास के जंगलों में शिकार की घटनाओं में इधर एकाएक इजाफा हुआ है। हालिया घटनाओं को देखते हुए भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि किशनपुर सेंक्चुरी की चलतुआ बीट में बड़ी नहर किनारे झाड़ियों में मृत मिले बाघ के गले में रस्सी का फंदा डालकर उसे मारा गया हो लेकिन शिकारियों को शव उठाने का मौका न मिल पाया हो। इधर पिछले कुछ महीनों के अंदर यहां कई शिकारी भी पकड़े गए हैं, जिसके बाद से दुधवा प्रशासन अलर्ट है।
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दूसरे दिन भी चलाया गया सघन कॉबिंग अभियान
किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में रविवार को मिले बाघ के शव के मामले में शिकार की आशंका के चलते पार्क अधिकारियों ने सोमवार दूसरे दिन भी किशनपुर सेंक्चुरी से सटे दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन क्षेत्र में सघन कांबिंग अभियान चलाया।
किशनपुर सेंक्चुरी समेत इससे सटे दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के जंगलों में हाथियों, ट्रैक्टर, एटीपीएफ जवानों और वन कर्मियों से घटनास्थल और करीब 15 किलामीटर क्षेत्र में सघन कांबिंग कराई गई। पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर ने बताया कि दो दिन तक लगातार चलाए गए सघन कांबिंग अभियान के दौरान जंगल में खाबड़, कुड़का और नायलॉन रस्सी का फंदा लगा नहीं मिला। जिससे मृत मिले बाघ के शिकार की आशंका नहीं है। बावजूद इसके कांबिंग अभियान लगातार जारी रहेगा।
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अदरूनी तौर पर खून बहने से हुई बाघ की मौत
पोस्टमार्टम कराने के लिए बाघ के शव को लेकर सोमवार सुबह दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य संरक्षक/फील्ड निदेशक संजय पाठक आवीआरआई बरेली आए। यहां डॉ पावड़े, डॉ अशोक, दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ दया,कतर्निया घाट के डॉक्टर सर्वेश के चार डॉक्टरों का पैनल ने पोस्टमार्टम किया। संजय पाठक ने बताया कि पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सकों की टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि सीने की दोनों हड्डी के बीच पतले छेद में अंदरूनी तौर पर खून बहने से बाघ की मौत हुई। विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।
इस दौरान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के प्रतिनिधि के रूप में डब्ल्यूटीआई के डॉ सोमा, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि (एनटीसीए) और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ मुदित गुप्ता भी मौजूद रहे। संवाद
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किशनपुर सेंक्चुरी में रविवार को चलतुआ बीट में बड़ी नहर किनारे झाड़ियों में एक आठ साल के नर बाघ का शव मिला था, उसकी गर्दन में सूजन थी। जिसके चलते दुधवा प्रशासन ने संभावना जताई थी कि किसी बीमारी या फिर सेही का शिकार करते समय उसके कांटे गले में फंस जाने से बाघ की मौत हुई। बाद में बाघ के शव को पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेज दिया गया था।
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यहां बता दें इससे पहले दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में एक बाघिन का शव मिला था। जिसके गले में नायलॉन की रस्सी का फंदा पड़ा था। इसके बाद किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में शिकार के लिए लगाए गए नायलॉन के फंदे में एक बाघ फंस गया था। बाघ की गर्दन से फंदा निकालने के लिए उसे ट्रैंक्युलाइज करने की काफी कोशिश की गई लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कामयाबी नहीं मिली। इस दौरान किशनपुर सेंक्चुरी में गर्दन में फंदा लिए बाघ जंगल में आज भी घूम रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व और आसपास के जंगलों में शिकार की घटनाओं में इधर एकाएक इजाफा हुआ है। हालिया घटनाओं को देखते हुए भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि किशनपुर सेंक्चुरी की चलतुआ बीट में बड़ी नहर किनारे झाड़ियों में मृत मिले बाघ के गले में रस्सी का फंदा डालकर उसे मारा गया हो लेकिन शिकारियों को शव उठाने का मौका न मिल पाया हो। इधर पिछले कुछ महीनों के अंदर यहां कई शिकारी भी पकड़े गए हैं, जिसके बाद से दुधवा प्रशासन अलर्ट है।
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दूसरे दिन भी चलाया गया सघन कॉबिंग अभियान
किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में रविवार को मिले बाघ के शव के मामले में शिकार की आशंका के चलते पार्क अधिकारियों ने सोमवार दूसरे दिन भी किशनपुर सेंक्चुरी से सटे दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन क्षेत्र में सघन कांबिंग अभियान चलाया।
किशनपुर सेंक्चुरी समेत इससे सटे दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के जंगलों में हाथियों, ट्रैक्टर, एटीपीएफ जवानों और वन कर्मियों से घटनास्थल और करीब 15 किलामीटर क्षेत्र में सघन कांबिंग कराई गई। पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर ने बताया कि दो दिन तक लगातार चलाए गए सघन कांबिंग अभियान के दौरान जंगल में खाबड़, कुड़का और नायलॉन रस्सी का फंदा लगा नहीं मिला। जिससे मृत मिले बाघ के शिकार की आशंका नहीं है। बावजूद इसके कांबिंग अभियान लगातार जारी रहेगा।
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अदरूनी तौर पर खून बहने से हुई बाघ की मौत
पोस्टमार्टम कराने के लिए बाघ के शव को लेकर सोमवार सुबह दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य संरक्षक/फील्ड निदेशक संजय पाठक आवीआरआई बरेली आए। यहां डॉ पावड़े, डॉ अशोक, दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ दया,कतर्निया घाट के डॉक्टर सर्वेश के चार डॉक्टरों का पैनल ने पोस्टमार्टम किया। संजय पाठक ने बताया कि पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सकों की टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि सीने की दोनों हड्डी के बीच पतले छेद में अंदरूनी तौर पर खून बहने से बाघ की मौत हुई। विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।
इस दौरान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के प्रतिनिधि के रूप में डब्ल्यूटीआई के डॉ सोमा, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि (एनटीसीए) और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ मुदित गुप्ता भी मौजूद रहे। संवाद

किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में कॉबिंग करते हाथी।- फोटो : LAKHIMPUR