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Lakhimpur Kheri News: जंगल में पानी, वन्यजीवों के सामने ठिकाने का संकट
Sun, 27 Sep 2026 11:20 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 27 Sep 2026 11:20 PM IST
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दुधवा के घास मैदान में ऊंचे स्थान पर मौजूद बारासिंगा हिरन। स्त्रोत- वन विभाग।
लखीमपुर/बांकेगंज। लगातार बारिश से दुधवा टाइगर रिजर्व के निचले इलाकों में जलभराव हो गया है। इससे बाघ, तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों के सामने सुरक्षित ठिकाने का संकट खड़ा हो गया है। पानी भरने से वन्यजीव ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में उनके आबादी के करीब पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
दुधवा के वेटलैंड्स के आसपास भी जलभराव हो गया है। ये क्षेत्र शाकाहारी वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पानी भरने से वन्यजीवों को ऊंचे स्थानों की ओर जाना पड़ा है। जलाशयों का पानी कम होने के बाद ही इनके वापस लौटने की संभावना है। जंगल के निचले इलाकों में पानी भरने से वन्यजीव आबादी से सटे गन्ने के खेतों की ओर जा सकते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ गया है। खेतों की देखरेख के दौरान किसानों का बाघ या तेंदुए से सामना हो सकता है। यह स्थिति इंसानों और वन्यजीवों दोनों के लिए सुरक्षित नहीं है।
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हिरनों के सामने भी संकट
जलभराव के कारण हिरन समेत अन्य शाकाहारी वन्यजीवों के जंगल से बाहर आने का खतरा बढ़ गया है। इससे उनके शिकार की आशंका भी बढ़ सकती है। जंगल का पानी उतरने के बाद घास के सड़ने और सूखने से शाकाहारी वन्यजीवों के सामने चारे का संकट भी खड़ा हो सकता है।
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लगातार कई दिनों की बारिश से जंगल के निचले इलाकों में पानी भर गया है। वन्यजीवों ने ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन विभाग की टीमों को मुस्तैद कर दिया गया है।
-डाॅ. एच. राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
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दुधवा के वेटलैंड्स के आसपास भी जलभराव हो गया है। ये क्षेत्र शाकाहारी वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पानी भरने से वन्यजीवों को ऊंचे स्थानों की ओर जाना पड़ा है। जलाशयों का पानी कम होने के बाद ही इनके वापस लौटने की संभावना है। जंगल के निचले इलाकों में पानी भरने से वन्यजीव आबादी से सटे गन्ने के खेतों की ओर जा सकते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ गया है। खेतों की देखरेख के दौरान किसानों का बाघ या तेंदुए से सामना हो सकता है। यह स्थिति इंसानों और वन्यजीवों दोनों के लिए सुरक्षित नहीं है।
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हिरनों के सामने भी संकट
जलभराव के कारण हिरन समेत अन्य शाकाहारी वन्यजीवों के जंगल से बाहर आने का खतरा बढ़ गया है। इससे उनके शिकार की आशंका भी बढ़ सकती है। जंगल का पानी उतरने के बाद घास के सड़ने और सूखने से शाकाहारी वन्यजीवों के सामने चारे का संकट भी खड़ा हो सकता है।
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लगातार कई दिनों की बारिश से जंगल के निचले इलाकों में पानी भर गया है। वन्यजीवों ने ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन विभाग की टीमों को मुस्तैद कर दिया गया है।
-डाॅ. एच. राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व