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माननीय! निधि पूरी खर्च हो रही पर विकास पूरा नजर नहीं आ रहा
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लखीमपुर खीरी। योगी सरकार में तीन साल में दूसरी बार विधायक निधि में वृद्धि की गई है। इससे पहले 2018-19 में राशि डेढ़ से बढ़ाकर दो करोड़ की गई थी। वहीं अब इसे तीन करोड़ कर दिया गया है। विकास कार्यों पर विधायक निधि का पैसा खर्च करने के मामले में जिले के विधायक गण आगे हैं। ये अलग बात है कि जितना पैसा खर्च हुआ, उतना विकास नजर नहीं आता। अभी तक विधायक निधि में जो भी राशि आई, उसे छह विधायकों ने पूरी खर्च कर दी है। बस मोहम्मदी और पलिया विधायक इसमें पीछे रह गए।
योगी सरकार के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने वाले हैं। तीन साल के कार्यकाल में नौ में से आठ विधायकों को 5.50-5.50 करोड़ की धनराशि मिल चुकी है। इसके साथ ही जीएसटी के लिए 40-40 लाख रुपये मिले हैं तो ब्याज से भी राशि बढ़ी है। विधायक निधि खर्च करने में गोला विधायक अरविंद गिरि और धौरहरा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी 5.97-5.97 करोड़ रुपये खर्च करके पहले नंबर पर हैं। इसी तरह श्रीनगर विधायक मंजू त्यागी ने 5.96 करोड़, सदर विधायक योगेश वर्मा ने 5.82 करोड़, कस्ता विधायक सौरभ सिंह ने 5.60 करोड़, एमएलसी शशांक यादव ने 5.62 करोड़ रुपये खर्च किए हैैं। जबकि मोहम्मदी विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह 4.50 करोड़ रुपये खर्च करके पीछे हैं। इनसे कुछ आगे पलिया विधायक रोमी साहनी ने 4.90 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। निघासन के तत्कालीन विधायक रामकुमार वर्मा की मौत होने के बाद उनके बेटे शशांक वर्मा ने वर्ष 2019 में हुए उपचुनाव में जीत हासिल की थी, जिससे यहां एक वर्ष दो करोड़ की धनराशि नहीं मिल पाई। इस वर्ष विधायक शशांक ने 1.80 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। डीआरडीए के पीडी रामकृपाल चौधरी ने बताया है कि विधायक निधि से सड़क और नाली निर्माण के अलावा, पशु आश्रयगृह, स्टील यात्री शेड, बाउंड्रीवाल निर्माण कराया गया है।
जनपद में आठ विधायक और एक एमएलसी हैं, जिन्हें वर्ष 2020-21 में अब तीन-तीन करोड़ यानी कुल 27 करोड़ रुपये अपने क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के लिए मिलेंगे। यहां बता दें अब तक एक साल में विधायक को दो करोड़ रुपये मिलते थे, जिसमें 75 फीसदी धनराशि विधायक स्वयं खर्च करते हैं, जबकि 25 फीसदी धनराशि का उपयोग प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर किए जाने का प्रावधान है, लेकिन प्रभारी मंत्री विधायक निधि खर्च में हस्तक्षेप नहीं करते। हालांकि प्रभारी मंत्री कहीं अंत में कोई काम न बता दें, इसलिए उतनी रकम बाद में फैसला लेने के लिए छोड़ दी जाती है।
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जनता को कम, करीबियों को ज्यादा फायदा
विधायक डीआरडीए के माध्यम से ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) के जरिए विधायक निधि से काम कराने पर ज्यादा जोर देते हैं। आरईडी में विधायक निधि के काम लेने वाले ज्यादातर ठेकेदार माननीयों के ही हैं। राजनीतिक दबाव में आरईडी के इंजीनियर उनकी ओर नजर उठाकर नहीं देखते हैं। वे अधिकतर काम अपनी मनमर्जी से घटिया सामग्री लगाकर किसी तरह पूरा करके उसका पेमेंट करा लेते हैं।
1998-99 में 25 लाख से हुई विधायक निधि की शुरुआत
विधायक निधि की शुरुआत वर्ष 1998-99 में 25 लाख से हुई थी, जो 1999-2000 में 50 लाख कर दी गई। 2000-01 से 2003-04 तक 75 लाख रुपये दिए गए। 2004-05 से 2006-07 तक विधायकों को एक करोड़ रुपये प्रति वर्ष दिए गए। वर्ष 2007-08 से 2011-12 तक 125 लाख, 2012-13 से 2017-18 तक 1.50 करोड़, वर्ष 2018-19 से 2019-20 तक दो करोड़ रुपये दिए गए।
विधायक निधि से जनता की मांग के अनुरूप विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। सीसी रोड, नाली और स्कूलों में बाउंड्रीवाल बनवाई गई हैं। विधायक निधि बढ़ने से ज्यादा गांवों को लाभान्वित किया जा सकेगा।
-बाला प्रसाद अवस्थी, विधायक धौरहरा
50 लाख की लागत से सीएचसी का कायाकल्प कराया जा रहा है। इससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर मिलेंगी। विधायक निधि में वृद्धि होने से इसका फायदा आम जनता तक पहुंचेगा।
-अरविंद गिरि, विधायक गोला
मेरी विधायक निधि से प्रत्येक वर्ग के हित में कार्य किए जा रहे हैं। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है। क्षेत्र में सर्वांगीण विकास कार्य कराने में बढ़ी हुई निधि सहायक होगी।
-योगेश वर्मा, विधायक, सदर
विधायक निधि से सड़कों समेत विभिन्न कार्य कराए गए हैं। कुछ काम चल रहे हैं। विधायक निधि का समय रहते उपयोग किया जा रहा है। आगे भी शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्य कराए जाएंगे।
-मंजू त्यागी, विधायक, श्रीनगर
विधायक निधि का गांवों के विकास में प्रयोग किया जा रहा है। जल्द ही शेष धनराशि का खर्च कर लिया जाएगा। कुछ कामों के प्रस्ताव पाइप लाइन में हैैं। निधि में वृद्धि होने से विधायकों को ज्यादा काम कराने में मदद मिलेगी।
-लोकेंद्र प्रताप सिंह, विधायक मोहम्मदी
निधि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में किया जा रहा है। गांवों में सड़क-नाली बनवाई जा रही है और कुछ पुलिया भी बनवाई हैं। शेष धनराशि से शीघ्र काम पूरे कराए जाएंगे।
-रोमी साहनी, विधायक, पलिया
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योगी सरकार के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने वाले हैं। तीन साल के कार्यकाल में नौ में से आठ विधायकों को 5.50-5.50 करोड़ की धनराशि मिल चुकी है। इसके साथ ही जीएसटी के लिए 40-40 लाख रुपये मिले हैं तो ब्याज से भी राशि बढ़ी है। विधायक निधि खर्च करने में गोला विधायक अरविंद गिरि और धौरहरा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी 5.97-5.97 करोड़ रुपये खर्च करके पहले नंबर पर हैं। इसी तरह श्रीनगर विधायक मंजू त्यागी ने 5.96 करोड़, सदर विधायक योगेश वर्मा ने 5.82 करोड़, कस्ता विधायक सौरभ सिंह ने 5.60 करोड़, एमएलसी शशांक यादव ने 5.62 करोड़ रुपये खर्च किए हैैं। जबकि मोहम्मदी विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह 4.50 करोड़ रुपये खर्च करके पीछे हैं। इनसे कुछ आगे पलिया विधायक रोमी साहनी ने 4.90 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। निघासन के तत्कालीन विधायक रामकुमार वर्मा की मौत होने के बाद उनके बेटे शशांक वर्मा ने वर्ष 2019 में हुए उपचुनाव में जीत हासिल की थी, जिससे यहां एक वर्ष दो करोड़ की धनराशि नहीं मिल पाई। इस वर्ष विधायक शशांक ने 1.80 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। डीआरडीए के पीडी रामकृपाल चौधरी ने बताया है कि विधायक निधि से सड़क और नाली निर्माण के अलावा, पशु आश्रयगृह, स्टील यात्री शेड, बाउंड्रीवाल निर्माण कराया गया है।
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जनपद में आठ विधायक और एक एमएलसी हैं, जिन्हें वर्ष 2020-21 में अब तीन-तीन करोड़ यानी कुल 27 करोड़ रुपये अपने क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के लिए मिलेंगे। यहां बता दें अब तक एक साल में विधायक को दो करोड़ रुपये मिलते थे, जिसमें 75 फीसदी धनराशि विधायक स्वयं खर्च करते हैं, जबकि 25 फीसदी धनराशि का उपयोग प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर किए जाने का प्रावधान है, लेकिन प्रभारी मंत्री विधायक निधि खर्च में हस्तक्षेप नहीं करते। हालांकि प्रभारी मंत्री कहीं अंत में कोई काम न बता दें, इसलिए उतनी रकम बाद में फैसला लेने के लिए छोड़ दी जाती है।
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जनता को कम, करीबियों को ज्यादा फायदा
विधायक डीआरडीए के माध्यम से ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) के जरिए विधायक निधि से काम कराने पर ज्यादा जोर देते हैं। आरईडी में विधायक निधि के काम लेने वाले ज्यादातर ठेकेदार माननीयों के ही हैं। राजनीतिक दबाव में आरईडी के इंजीनियर उनकी ओर नजर उठाकर नहीं देखते हैं। वे अधिकतर काम अपनी मनमर्जी से घटिया सामग्री लगाकर किसी तरह पूरा करके उसका पेमेंट करा लेते हैं।
1998-99 में 25 लाख से हुई विधायक निधि की शुरुआत
विधायक निधि की शुरुआत वर्ष 1998-99 में 25 लाख से हुई थी, जो 1999-2000 में 50 लाख कर दी गई। 2000-01 से 2003-04 तक 75 लाख रुपये दिए गए। 2004-05 से 2006-07 तक विधायकों को एक करोड़ रुपये प्रति वर्ष दिए गए। वर्ष 2007-08 से 2011-12 तक 125 लाख, 2012-13 से 2017-18 तक 1.50 करोड़, वर्ष 2018-19 से 2019-20 तक दो करोड़ रुपये दिए गए।
विधायक निधि से जनता की मांग के अनुरूप विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। सीसी रोड, नाली और स्कूलों में बाउंड्रीवाल बनवाई गई हैं। विधायक निधि बढ़ने से ज्यादा गांवों को लाभान्वित किया जा सकेगा।
-बाला प्रसाद अवस्थी, विधायक धौरहरा
50 लाख की लागत से सीएचसी का कायाकल्प कराया जा रहा है। इससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर मिलेंगी। विधायक निधि में वृद्धि होने से इसका फायदा आम जनता तक पहुंचेगा।
-अरविंद गिरि, विधायक गोला
मेरी विधायक निधि से प्रत्येक वर्ग के हित में कार्य किए जा रहे हैं। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है। क्षेत्र में सर्वांगीण विकास कार्य कराने में बढ़ी हुई निधि सहायक होगी।
-योगेश वर्मा, विधायक, सदर
विधायक निधि से सड़कों समेत विभिन्न कार्य कराए गए हैं। कुछ काम चल रहे हैं। विधायक निधि का समय रहते उपयोग किया जा रहा है। आगे भी शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्य कराए जाएंगे।
-मंजू त्यागी, विधायक, श्रीनगर
विधायक निधि का गांवों के विकास में प्रयोग किया जा रहा है। जल्द ही शेष धनराशि का खर्च कर लिया जाएगा। कुछ कामों के प्रस्ताव पाइप लाइन में हैैं। निधि में वृद्धि होने से विधायकों को ज्यादा काम कराने में मदद मिलेगी।
-लोकेंद्र प्रताप सिंह, विधायक मोहम्मदी
निधि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में किया जा रहा है। गांवों में सड़क-नाली बनवाई जा रही है और कुछ पुलिया भी बनवाई हैं। शेष धनराशि से शीघ्र काम पूरे कराए जाएंगे।
-रोमी साहनी, विधायक, पलिया