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यूरिया नदारद, किसानों में हाहाकार
लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 16 Dec 2014 06:20 PM IST
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रबी सीजन में किसानों को खाद आपूर्ति करने के मामले में शासन-प्रशासन एक बार फिर नाकाम साबित हुआ है। गेहूं की फसल में डालने के लिए यूरिया खाद की मांग अचानक बढ़ गई है, लेकिन जनपद की 132 पैक्स समितियों में यूरिया उपलब्ध नहीं है। जबकि डीएम गौरव दयाल ने नौ दिसंबर 2014 को शासन को डीओ (अर्र्धशासकीय पत्र) भेजकर दिसंबर 2014 में 21,274 मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड करते हुए उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग की थी। अब अधिकारी रेलवे कंजेशन की बात कह रहे हैैं, जिससे रैक नहीं लग पाई है।
पिछले तीन दिनों में हुई अच्छी बारिश के बाद गेहूं में यूरिया खाद डालने के लिए किसान समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। बताते चलें कि अमर उजाला ने सात दिसंबर 2014 को जिले में ‘यूरिया की किल्लत’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले को प्रमुखता से उठाया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने नौ दिसंबर 2014 को डीओ लेटर लिखा था। इस पत्र के माध्यम से डीएम ने जनपद में किसानों को यूरिया की नियमित आपूर्ति के लिए दिसंबर में 21,274 मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड की थी।
करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी जिले में यूरिया खाद की आपूर्ति नहीं हुई है। गौरतलब यह भी हैै कि इस बार प्रशासन ने रबी सीजन में खाद आपूर्ति के लिए ठोस रणनीति नहीं तैयार की थी, जिससे दिसंबर के पहले सप्ताह में ही बफर गोदाम खाली हो चुका था। रही सही कसर ऐन मौके पर यूरिया आपूर्ति न होने से पूरी हो गई। पैक्स समितियों से बैरंग लौट रहे किसानों में त्राहि-त्राहि मची है, क्योंकि अन्य एजेंसियों के बिक्री केंद्रों पर भी खाद उपलब्ध नहीं हैै।
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सहायक निबंधक (सहकारिता) आरके सिंह ने कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष 37 फीसदी यूरिया मिल सकी है। पिछली रैक पांच दिसंबर को लगी थी, जिसमें 1500 मीट्रिक टन यूरिया मिली थी। इसके बाद रेलवे कंजेशन के चलते रैक नहीं लग सकी है। इफको से लगातार संपर्क में हूं, उम्मीद है कि जल्द ही रैक लग जाएगी।
ड्राफ्ट जमा होने के बावजूद नहीं मिल रही खाद
जंगलवाली साधन सहकारी समिति धौरहरा के सचिव लालता प्रसाद ने बताया कि 10 दिन पहले बैंक ड्राफ्ट जमा किया था, लेकिन अभी तक खाद नहीं मिली है। मैनापुर कफारा सहकारी समिति के सचिव मनोज कुमार ने बताया कि 15 दिन से खाद उपलब्ध नहीं है। ऐसा हाल जिले की समस्त समितियों पर है।
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पिछले तीन दिनों में हुई अच्छी बारिश के बाद गेहूं में यूरिया खाद डालने के लिए किसान समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। बताते चलें कि अमर उजाला ने सात दिसंबर 2014 को जिले में ‘यूरिया की किल्लत’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले को प्रमुखता से उठाया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने नौ दिसंबर 2014 को डीओ लेटर लिखा था। इस पत्र के माध्यम से डीएम ने जनपद में किसानों को यूरिया की नियमित आपूर्ति के लिए दिसंबर में 21,274 मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड की थी।
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करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी जिले में यूरिया खाद की आपूर्ति नहीं हुई है। गौरतलब यह भी हैै कि इस बार प्रशासन ने रबी सीजन में खाद आपूर्ति के लिए ठोस रणनीति नहीं तैयार की थी, जिससे दिसंबर के पहले सप्ताह में ही बफर गोदाम खाली हो चुका था। रही सही कसर ऐन मौके पर यूरिया आपूर्ति न होने से पूरी हो गई। पैक्स समितियों से बैरंग लौट रहे किसानों में त्राहि-त्राहि मची है, क्योंकि अन्य एजेंसियों के बिक्री केंद्रों पर भी खाद उपलब्ध नहीं हैै।
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सहायक निबंधक (सहकारिता) आरके सिंह ने कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष 37 फीसदी यूरिया मिल सकी है। पिछली रैक पांच दिसंबर को लगी थी, जिसमें 1500 मीट्रिक टन यूरिया मिली थी। इसके बाद रेलवे कंजेशन के चलते रैक नहीं लग सकी है। इफको से लगातार संपर्क में हूं, उम्मीद है कि जल्द ही रैक लग जाएगी।
ड्राफ्ट जमा होने के बावजूद नहीं मिल रही खाद
जंगलवाली साधन सहकारी समिति धौरहरा के सचिव लालता प्रसाद ने बताया कि 10 दिन पहले बैंक ड्राफ्ट जमा किया था, लेकिन अभी तक खाद नहीं मिली है। मैनापुर कफारा सहकारी समिति के सचिव मनोज कुमार ने बताया कि 15 दिन से खाद उपलब्ध नहीं है। ऐसा हाल जिले की समस्त समितियों पर है।