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‘असत्य मानव निर्मित और सनातन है सत्य ’
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 10 Feb 2017 10:39 PM IST
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सामूहिक पाठ
- फोटो : अमर उजाला
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स्थायी प्रकल्प गीता संकल्प यात्रा कार्यक्रम में बोले श्रीराम
सामाजिक संस्था सौजन्या के स्थायी प्रकल्प गीता संकल्प यात्रा के पाठ चार का सामूहिक पाठ श्रीराम सिंह की अध्यक्षता में हुआ। श्रीराम सिंह ने पाठ की विशद व्याख्या करते हुए कहा कि असत्य मानव द्वारा निर्मित है लेकिन सत्य सनातन है। अधर्म के बढ़ने पर भगवान खुद को प्रकट करते रहते है।
उन्होंने बताया भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस पाठ में कहा है कि चातुर्वर्ण मेरे द्वारा सृजित है। वर्णाश्रम के बारे में डॉ. उमा कटियार ने विशेष संदर्भ का उल्लेख किया। पठन-पाठन, शोध, ज्ञान विज्ञान का खोजी ब्राह्मण, साहस, शौर्य, सुरक्षा और जिम्मेदारी का वहन करने वाला क्षत्रिय अपनी पूरी उर्जा, धन संचय, धनवृद्धि, लोगों के कल्याण के लिए धन वितरण आदि का व्यवस्थापक वैश्य वर्ण और हर तरह की सेवा प्रदाता वर्ण शूद्र है जिसे सेवा कर्म ही अभीष्ट है। पूरी पृथ्वी पर इस तरह के संचालक हैं बेेशक उन्हें अलग-अलग भूभागों में अलग नामों से पुकारा जाता है। कार्यक्रम का संचालन सुनीता निगम ने किया।
डॉ. केके श्रीवास्तव ने पाठ के आधार पर अपने विचार प्रकट किए। यज्ञदत्त मिश्र ने वीर रस का काव्य पाठ किया। सभा में कर्नल सीपी मिश्र, प्रभा तिवारी, अर्चना मिश्रा, राज कुमार त्रिवेदी, चंद्र शेखर मिश्र समेत नियमित गीता संचालक मंडल के लोग मौजूद रहे।
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सामाजिक संस्था सौजन्या के स्थायी प्रकल्प गीता संकल्प यात्रा के पाठ चार का सामूहिक पाठ श्रीराम सिंह की अध्यक्षता में हुआ। श्रीराम सिंह ने पाठ की विशद व्याख्या करते हुए कहा कि असत्य मानव द्वारा निर्मित है लेकिन सत्य सनातन है। अधर्म के बढ़ने पर भगवान खुद को प्रकट करते रहते है।
उन्होंने बताया भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस पाठ में कहा है कि चातुर्वर्ण मेरे द्वारा सृजित है। वर्णाश्रम के बारे में डॉ. उमा कटियार ने विशेष संदर्भ का उल्लेख किया। पठन-पाठन, शोध, ज्ञान विज्ञान का खोजी ब्राह्मण, साहस, शौर्य, सुरक्षा और जिम्मेदारी का वहन करने वाला क्षत्रिय अपनी पूरी उर्जा, धन संचय, धनवृद्धि, लोगों के कल्याण के लिए धन वितरण आदि का व्यवस्थापक वैश्य वर्ण और हर तरह की सेवा प्रदाता वर्ण शूद्र है जिसे सेवा कर्म ही अभीष्ट है। पूरी पृथ्वी पर इस तरह के संचालक हैं बेेशक उन्हें अलग-अलग भूभागों में अलग नामों से पुकारा जाता है। कार्यक्रम का संचालन सुनीता निगम ने किया।
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डॉ. केके श्रीवास्तव ने पाठ के आधार पर अपने विचार प्रकट किए। यज्ञदत्त मिश्र ने वीर रस का काव्य पाठ किया। सभा में कर्नल सीपी मिश्र, प्रभा तिवारी, अर्चना मिश्रा, राज कुमार त्रिवेदी, चंद्र शेखर मिश्र समेत नियमित गीता संचालक मंडल के लोग मौजूद रहे।
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