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Lakhimpur Kheri News: कैग की रिपोर्ट में मानकों पर खरी उतरीं दो नगर पंचायतें
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लखीमपुर खीरी। वैसे तो हर साल नगर पालिका और नगर पंचायतों में वित्तीय सत्र समाप्त होते ही ऑडिट का कार्य कराया जाता है, लेकिन कैग हर पांच साल में ऑडिट कराती है। इस बार कैग की रिपोर्ट में चार नगर पालिका और चार नगर पंचायतों में आय-व्यय में अनियमितताएं पाई गईं। दो नगर पंचायतें ऐसी हैं, जहां पर जांच के दौरान सभी कागजात सही मिले। खीरी टाउन और धाैरहरा पंचायत मानकों पर खरी उतरी हैं।
जिले में चार नगर पंचायत और छह नगर पंचायतों का ऑडिट कराया गया था। जिसके बाद कैग की रिपोर्ट ने नगर पालिका और नगर पंचायतों के चेयरमैन, ईओ और लेखाकार के कार्यों की कलई खोल कर रख दी है। बड़ी अनियमितताएं और सरकारी धन की फिजूलखर्ची सामने आने के बाद सभी की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। अब शासन स्तर से कार्रवाई का डर भी सताने लगा है।
जिले में दो ऐसी भी नगर पंचायतें हैं, जहां पर आडिट टीम को सब सही मिला। ऑडिट के बाद खीरी टाउन और धौरहरा नगर पंचायत को क्लीन चिट दे दी। वहीं, अन्य नगर पालिका और पंचायतों के ईओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभागीय सूत्रों की माने तो कार्यों और धन की फिजूलखर्ची को लेकर दिए गए जवाब से यदि ऑडिट टीम के सदस्य संतुष्ट नहीं होेते हैं, तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी जा सकती है।
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रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें जिले की नगर पालिका लखीमपुर में कुल 87,96,000 रुपये, नगर पालिका पलियाकलां में 1,29,13,700 रुपये, मोहम्मदी नगर पालिका में 67,23,381 रुपये व गोला गोकर्णनाथ नगर पालिका में 1,59,28,000 रुपयों के घपला व अनियमितताएं पाई गई हैं। नगर पंचायत सिंगाही में 49,10,288 रुपये, बरबर में 23,47,522 रुपये, मैलानी 53,20,125 व ओयल ढखवा नगर पंचायत में 24,78,389 रुपयों का हेराफेरी किया जाना पाया गया है।
इस तरह के कार्यों में लेखाकारों की भूमिका संदिग्ध
नगर पालिका और नगर पंचायतों में तैनात लेखाकार निर्माण कार्यों का ब्योरा अपने पास सुरक्षित रखते हैं। यदि नगर पालिका और नगर पंचायतों में लाखों रुपये की अनियमितताएं पाई गई हैं, तो कहीं न कहीं लेखाकार की भूमिका संदिग्ध है। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि यदि शासन स्तर से किसी तरह की कोई कार्रवाई होती है, तो निश्चित तौर पर पहले लेखाकार पर होगी। बाद में दूसरे अधिकारी को दोषी माना जाएगा। भले ही पालिका में होने वाले भुगतान और आय पर ईओ व अध्यक्ष के हस्ताक्षर होते हों, लेकिन लेखाकार भी इन कार्यों में अपनी अहम भूमिका निभाता है।
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जिले में चार नगर पंचायत और छह नगर पंचायतों का ऑडिट कराया गया था। जिसके बाद कैग की रिपोर्ट ने नगर पालिका और नगर पंचायतों के चेयरमैन, ईओ और लेखाकार के कार्यों की कलई खोल कर रख दी है। बड़ी अनियमितताएं और सरकारी धन की फिजूलखर्ची सामने आने के बाद सभी की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। अब शासन स्तर से कार्रवाई का डर भी सताने लगा है।
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जिले में दो ऐसी भी नगर पंचायतें हैं, जहां पर आडिट टीम को सब सही मिला। ऑडिट के बाद खीरी टाउन और धौरहरा नगर पंचायत को क्लीन चिट दे दी। वहीं, अन्य नगर पालिका और पंचायतों के ईओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभागीय सूत्रों की माने तो कार्यों और धन की फिजूलखर्ची को लेकर दिए गए जवाब से यदि ऑडिट टीम के सदस्य संतुष्ट नहीं होेते हैं, तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी जा सकती है।
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रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें जिले की नगर पालिका लखीमपुर में कुल 87,96,000 रुपये, नगर पालिका पलियाकलां में 1,29,13,700 रुपये, मोहम्मदी नगर पालिका में 67,23,381 रुपये व गोला गोकर्णनाथ नगर पालिका में 1,59,28,000 रुपयों के घपला व अनियमितताएं पाई गई हैं। नगर पंचायत सिंगाही में 49,10,288 रुपये, बरबर में 23,47,522 रुपये, मैलानी 53,20,125 व ओयल ढखवा नगर पंचायत में 24,78,389 रुपयों का हेराफेरी किया जाना पाया गया है।
इस तरह के कार्यों में लेखाकारों की भूमिका संदिग्ध
नगर पालिका और नगर पंचायतों में तैनात लेखाकार निर्माण कार्यों का ब्योरा अपने पास सुरक्षित रखते हैं। यदि नगर पालिका और नगर पंचायतों में लाखों रुपये की अनियमितताएं पाई गई हैं, तो कहीं न कहीं लेखाकार की भूमिका संदिग्ध है। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि यदि शासन स्तर से किसी तरह की कोई कार्रवाई होती है, तो निश्चित तौर पर पहले लेखाकार पर होगी। बाद में दूसरे अधिकारी को दोषी माना जाएगा। भले ही पालिका में होने वाले भुगतान और आय पर ईओ व अध्यक्ष के हस्ताक्षर होते हों, लेकिन लेखाकार भी इन कार्यों में अपनी अहम भूमिका निभाता है।