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Lakhimpur Kheri News: दो मनचलों को चार साल की कैद
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लखीमपुर खीरी। 11 साल पुराने छेड़खानी के मामले में एडीजे पॉक्सो कोर्ट से फैसला आया है। एडीजे गुलाम मुस्तफा ने दोनों नामजद आरोपियों को दोषी पाते हुए चार-चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मोहम्मदी थाने के एक गांव में रहने वाली किशोरी चार फरवरी 2014 की शाम 5:30 बजे गांव के उत्तर में स्थित तालाब पर गई थी, तभी पिपरिया कप्तान निवासी उमेश कुमार और नन्हे भैया उर्फ विजय कुमार ने उससे छेड़खानी की। बुरी तरह दांतों से काटकर जख्मी कर दिया था। पीड़िता के शोर पर प्रदीप और संजय यादव ने किशोरी को बचाया था। पीड़िता की माता ने मामले में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने जांच के बाद नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां के साथ ही डॉ. पुष्पलता और डॉ. वीके वर्मा, चंद्रभान पांडे और इंस्पेक्टर शिवचरन लाल ने अपने बयान दर्ज कराए थे।
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अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों पर जान-माल की धमकी देने और नाबालिग से छेड़खानी के अपराध को सिद्ध पाया। उन्हें चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उन पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने अपने फैसले में यह व्यवस्था दी है कि वसूल किए गए जुर्माना की रकम में से आधी रकम पीड़िता को दी जाएगी।
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मोहम्मदी थाने के एक गांव में रहने वाली किशोरी चार फरवरी 2014 की शाम 5:30 बजे गांव के उत्तर में स्थित तालाब पर गई थी, तभी पिपरिया कप्तान निवासी उमेश कुमार और नन्हे भैया उर्फ विजय कुमार ने उससे छेड़खानी की। बुरी तरह दांतों से काटकर जख्मी कर दिया था। पीड़िता के शोर पर प्रदीप और संजय यादव ने किशोरी को बचाया था। पीड़िता की माता ने मामले में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने जांच के बाद नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां के साथ ही डॉ. पुष्पलता और डॉ. वीके वर्मा, चंद्रभान पांडे और इंस्पेक्टर शिवचरन लाल ने अपने बयान दर्ज कराए थे।
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अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों पर जान-माल की धमकी देने और नाबालिग से छेड़खानी के अपराध को सिद्ध पाया। उन्हें चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उन पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने अपने फैसले में यह व्यवस्था दी है कि वसूल किए गए जुर्माना की रकम में से आधी रकम पीड़िता को दी जाएगी।