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दो बाइकों की टक्कर में दो की मौत

Fri, 28 May 2021 01:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 01:42 AM IST
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Two killed in collision between two bikes
सिसैया मोड़ के पास हुई दुर्घटना एक घायल
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मृतक वीरेंद्र की दो दिन पहले हुई थी शादी
सुंदरवल। फूलबेहड़-लखीमपुर मार्ग पर दो बाइकों की टक्कर से हुए हादसे में दो की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए। हादसे में जान गंवाने वाले मृतक वीरेंद्र की महज दो दिन पहले ही शादी हुई थी। घटना से पूरे परिवार में मच गया है।
फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के रघवापुर गांव निवासी वीरेंद्र (22) पुत्र सुशील अपने बहनोई मनोज (27) पुत्र इंद्रपाल निवासी भनवापुर के साथ अपनी मां की दवा लेने सैदापुर जा रहा था। इसी बीच दूसरी तरफ फूलबेहड़ निवासी विकास (20) पुत्र दिनेश लखीमपुर आ रहा था कि सिसैया मोड़ के पास दोनों की बाइक आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बाइकों के परखच्चे उड़ गए और तीन लोग घायल हो गए।
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राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीनों घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया, जहां वीरेंद्र और विकास की मौत हो गई। जबकि, मनोज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फूलबेहड़ प्रभारी निरीक्षक एसएन सिंह ने बताया कि सिसैया मोड़ के पास दो बाइकों में टक्कर हो गई थी, जिसमें तीन लोग घायल हुए थे। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे तीनों लोगों को अस्पताल भिजवाया, जहां दो लोगों की मौत हो गई।
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नहीं छूटी थी हाथों की मेंहदी कि देखना पड़ा यह दिन
सुंदरवल। सड़क हादसे में मौत के क्रूर पंजे में समा चुके फूलबेहड़ के रघवापुर गांव के वीरेंद्र की शादी को अभी दो दिन ही हुए थे। उसके हाथों से मेंहदी की खुशबू भी नहीं गई थी, और न ही हाथों से मेहंदी का रंग फीका पड़ा था कि सड़क हादसे में मौत हो गई। वहीं, वीरेंद्र की मौत से नई नवेली दुल्हन के सिर से पति का साया उठ गया। वीरेंद्र की बरात 24 मई को फूलबेहड़ के लखहा भूड़ गांव निवासी चतुर के घर गई थी। 25 मई को कमला देवी दुल्हन बनकर वीरेंद्र के घर आई थी और 26 मई को गौना हुआ था। पत्नी कमला सिर्फ दो दिनों की ही सुहागन रही। मौत की खबर मिलते ही दुल्हन बार बार बेहोश हो जा रही थी। वहीं, जवान लड़के की मौत की खबर से घर में चल रही खुशियां मातम में बदल गईं। दो दिन की खुशी ऐसी मनहूस बनकर आई कि पूरे गांव को रुला गई।


दस दिन पहले राजस्थान से लौटा था
सुंदरवल। वीरेंद्र शादी से दस दिन पहले ही टेड़वा राजस्थान से काम कर वापस घर आया था। वीरेंद्र की एकलौती बहन रीता ने बताया कि वीरेंद्र सिलाई का काम करता था। चार माह बाद घर अपनी शादी के लिए आया था। उन्होंने बताया कि पिता का सारा बोझ अपने सर पर उठा रखा था। वीरेंद्र पांच भाई बहनों में सबसे बड़ा था। मंझली बहन रीता की शादी पहले ही हो गई थी, जबकि सबसे छोटा भाई नितिन (12) जन्म से ही दिव्यांग है, उसे दिखाई नही देता। गरीब परिवार होने से वीरेंद्र ने राजस्थान में रहकर सिलाई का काम करने का फैसला किया था। ज्यादातर वो बाहर ही रहता था। किसी को क्या पता था कि शादी के दूसरे दिन ही सारी खुशियां मातम में बदल जाएंगी।
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