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Lakhimpur Kheri News: उल्ल नदी में नहाने गए दो दोस्तों की डूबने से मौत
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म़तक शेखर का फाइल फोटो-संवाद
लखीमपुर खीरी। भीषण गर्मी के बीच रविवार सुबह उल्ल नदी के सेठ घाट पर नहाने गए दो दोस्तों की डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने गोताखोरों को बुलाकर नदी में तलाश शुरू कराई। काफी देर के बाद गोताखोरों ने दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें रुक चुकी थीं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मोहल्ला कृष्णानगर निर्मल नगर निवासी संतोष का पुत्र प्रिंस (14) अपने दोस्त शेखर (15) पुत्र राजेश गौतम के साथ रविवार सुबह करीब 11 बजे सेठ घाट पर नहाने गया था। कुछ देर तक दोनों पानी में उछल कूद करते हुए देखे गए। नहाते वक्त दोनों गहरे पानी में चले गए डूब गए।
आसपास के लोगों का कहना था कि दोनों अक्सर नदी में नहाने के लिए आते जाते थे। गर्मी होने के चलते नदी के आसपास लोगों की संख्या न के बराबर थी। इसलिए बच्चों के डूबने की जानकारी तुरंत किसी को नहीं हो सकी। आसपास के लोगों ने बच्चों के कपड़े नदी किनारे देखे तो हादसे का अंदेशा जाहिर कर पुलिस को सूचना दी।
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घटना स्थल पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने बच्चों की तलाश ग्रामीणों और गोताखोरों से शुरू कराई। करीब आधे घंटे बाद गोताखोरों ने दोनों बच्चों को ढूंढ़ निकाला। सूचना पर बच्चों के परिजन भी पहुंच गए। परिजन बच्चों को लेकर जिला अस्पताल मोतीपुर पहुंचे, जहां पर डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया है।
परिजनों ने बच्चों का पोस्टमार्टम कराने के मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है। परिजनों ने देर शाम दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। कोतवाली प्रभारी अंबर सिंह ने बताया कि डूबने से दोनों बच्चों की मौत हुई है।
खनन बना हादसे की मुख्य वजह
खनन माफिया उल्ल नदी से बड़ी मात्रा में बालू निकालते हैं। कई बार नदी के बीचोबीच से बालू निकाली जाती है। इससे नदी में गहरे गड्ढे हो गए हैं। नदी में नहाने वाले लोगों को इन गड्ढों का एहसास न होने की वजह से वह हादसे का शिकार हो जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे भी इन्हीं गड्ढों को समझ नहीं पाए और दोनों की जान चली गई।
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मोहल्ला कृष्णानगर निर्मल नगर निवासी संतोष का पुत्र प्रिंस (14) अपने दोस्त शेखर (15) पुत्र राजेश गौतम के साथ रविवार सुबह करीब 11 बजे सेठ घाट पर नहाने गया था। कुछ देर तक दोनों पानी में उछल कूद करते हुए देखे गए। नहाते वक्त दोनों गहरे पानी में चले गए डूब गए।
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आसपास के लोगों का कहना था कि दोनों अक्सर नदी में नहाने के लिए आते जाते थे। गर्मी होने के चलते नदी के आसपास लोगों की संख्या न के बराबर थी। इसलिए बच्चों के डूबने की जानकारी तुरंत किसी को नहीं हो सकी। आसपास के लोगों ने बच्चों के कपड़े नदी किनारे देखे तो हादसे का अंदेशा जाहिर कर पुलिस को सूचना दी।
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घटना स्थल पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने बच्चों की तलाश ग्रामीणों और गोताखोरों से शुरू कराई। करीब आधे घंटे बाद गोताखोरों ने दोनों बच्चों को ढूंढ़ निकाला। सूचना पर बच्चों के परिजन भी पहुंच गए। परिजन बच्चों को लेकर जिला अस्पताल मोतीपुर पहुंचे, जहां पर डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया है।
परिजनों ने बच्चों का पोस्टमार्टम कराने के मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है। परिजनों ने देर शाम दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। कोतवाली प्रभारी अंबर सिंह ने बताया कि डूबने से दोनों बच्चों की मौत हुई है।
खनन बना हादसे की मुख्य वजह
खनन माफिया उल्ल नदी से बड़ी मात्रा में बालू निकालते हैं। कई बार नदी के बीचोबीच से बालू निकाली जाती है। इससे नदी में गहरे गड्ढे हो गए हैं। नदी में नहाने वाले लोगों को इन गड्ढों का एहसास न होने की वजह से वह हादसे का शिकार हो जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे भी इन्हीं गड्ढों को समझ नहीं पाए और दोनों की जान चली गई।

म़तक शेखर का फाइल फोटो-संवाद