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प्रशिक्षु शिक्षकों को देना होगा शपथ पत्र
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 10 Jun 2015 10:02 PM IST
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नौकरी के लिए फर्जी अंकपत्र लगाने के दर्जनों मामले पकड़े जाने के बाद शासन ने प्रशिक्षु शिक्षकों के मामले में गंभीर रुख अपनाया है। प्रशिक्षु शिक्षक चयन 2011 के तहत 72825 रिक्तियों की भर्ती में विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण कर चुके प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रपत्रों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। शासन नेेे खासकर टीईटी 2011 के वेबसाइट पर घोषित परीक्षाफल से अंकपत्रों का मिलान कराने पर जोर दिया है।
बता दें कि खीरी में छह हजार पदों के सापेक्ष अभी करीब चार हजार प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती हो चुकी है। भर्ती प्रक्रिया के बाद फर्जी प्रपत्रों के मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें टीईटी के अंकपत्रों की विश्वसनीयता को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसके बाद शासन ने कार्यभार ग्रहण कर चुके प्रशिक्षु शिक्षकों का विवरण वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। अब राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने पांच जून को आदेश जारी कर निर्धारित प्रारूप पर भिन्नता/विसंगति की स्थिति में की गई कार्रवाई और संबंधित अभ्यर्थियों का ब्योरा मांगा है। निदेशक ने एनआईसी लखनऊ और माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद की वेबसाइट पर अपलोड टीईटी 2011 परीक्षाफल से अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत किए गए अंकपत्र का मिलान कराने के निर्देश दिए हैं।
बीएसए डॉ. ओपी राय ने बताया कि प्राप्त निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जा रही है। अवशेष प्रशिक्षु शिक्षकाें के प्रपत्रों की जांच कराकर निदेशालय भेजी जाएगी।
अंकपत्र में भिन्नता पर दर्ज होगा मुकदमा
वेबसाइट पर अपलोड टीईटी 2011 के परीक्षाफल और किसी अभ्यर्थी के प्राप्तांक में भिन्नता/विसंगति पाए जाने पर विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें संबंधित अभ्यर्र्थी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।
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60 अभ्यर्थियों के खिलाफ दर्ज हो चुके मुकदमे
जिले में हाल में कराई जा रही अनुदेशक पदों की भर्ती प्रक्रिया में र्कई अभ्यर्थियों के अंकपत्र फर्जी पकड़े जा चुके हैं। बीएसए ने लखनऊ विश्वविद्यालय से जांच कराई थी, जिसके बाद अंकपत्र फर्जी पुष्टि होने पर सदर कोतवाली में दो बार में 60 अनुदेशकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चार जून 2015 को 14 अनुदेशक अभ्यर्थियों के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। जबकि 46 अनुदेशक अभ्यर्थियों के खिलाफ मई में मुकदमा दर्ज हो चुका है।
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बता दें कि खीरी में छह हजार पदों के सापेक्ष अभी करीब चार हजार प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती हो चुकी है। भर्ती प्रक्रिया के बाद फर्जी प्रपत्रों के मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें टीईटी के अंकपत्रों की विश्वसनीयता को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसके बाद शासन ने कार्यभार ग्रहण कर चुके प्रशिक्षु शिक्षकों का विवरण वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। अब राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने पांच जून को आदेश जारी कर निर्धारित प्रारूप पर भिन्नता/विसंगति की स्थिति में की गई कार्रवाई और संबंधित अभ्यर्थियों का ब्योरा मांगा है। निदेशक ने एनआईसी लखनऊ और माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद की वेबसाइट पर अपलोड टीईटी 2011 परीक्षाफल से अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत किए गए अंकपत्र का मिलान कराने के निर्देश दिए हैं।
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बीएसए डॉ. ओपी राय ने बताया कि प्राप्त निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जा रही है। अवशेष प्रशिक्षु शिक्षकाें के प्रपत्रों की जांच कराकर निदेशालय भेजी जाएगी।
अंकपत्र में भिन्नता पर दर्ज होगा मुकदमा
वेबसाइट पर अपलोड टीईटी 2011 के परीक्षाफल और किसी अभ्यर्थी के प्राप्तांक में भिन्नता/विसंगति पाए जाने पर विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें संबंधित अभ्यर्र्थी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।
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60 अभ्यर्थियों के खिलाफ दर्ज हो चुके मुकदमे
जिले में हाल में कराई जा रही अनुदेशक पदों की भर्ती प्रक्रिया में र्कई अभ्यर्थियों के अंकपत्र फर्जी पकड़े जा चुके हैं। बीएसए ने लखनऊ विश्वविद्यालय से जांच कराई थी, जिसके बाद अंकपत्र फर्जी पुष्टि होने पर सदर कोतवाली में दो बार में 60 अनुदेशकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चार जून 2015 को 14 अनुदेशक अभ्यर्थियों के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। जबकि 46 अनुदेशक अभ्यर्थियों के खिलाफ मई में मुकदमा दर्ज हो चुका है।