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Lakhimpur Kheri News: दुधवा-गौरीफंटा जंगल मार्ग पर रात में आवागमन रहेगा बंद
Sat, 06 Jun 2026 11:48 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:48 PM IST
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गौरीफंटा। दुधवा पार्क प्रशासन के आदेश पर दुधवा-गौरीफंटा मार्ग के दुधवा बैरियर से डिगनिया तिराहे तक करीब 19 किलोमीटर जंगल मार्ग पर शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। इससे आम नागरिकों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। उन्हें करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ेगा।
दुधवा पार्क क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए दुधवा उपनिदेशक जगदीश आर ने यह निर्देश दिए हैं। पार्क प्रशासन का मानना है कि रात में गुजरने वाले वाहनों से वन्यजीवों के हादसे का खतरा रहता है। इस अवधि में गौरीफंटा से पलिया जाने वाले वाहनों को डिगनिया तिराहे से चंदन चौकी होकर तथा पलिया से गौरीफंटा जाने वालों को दुधवा बैरियर से वाया चंदनचौकी होकर जाना होगा।
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बफर जोन में 12 घंटे के प्रतिबंध को बताया असंगत
लखीमपुर खीरी। दुधवा-गौरीफंटा मार्ग को शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक बंद किए जाने के आदेश के विरोध में हाई कोर्ट के अधिवक्ता एसएम हैदर रिजवी ने दुधवा पार्क प्रशासन को प्रत्यावेदन सौंपा है।
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प्रत्यावेदन में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश कोर/क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट पर लागू होते हैं, जबकि दुधवा-गौरीफंटा मार्ग बफर जोन से होकर गुजरता है। यह मार्ग नेपाल सीमा, जनपद मुख्यालय और दर्जनों थारू बाहुल्य गांवों को जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि बफर जोन का उद्देश्य वन्यजीव और मानव गतिविधियों का सहअस्तित्व है। ऐसे में रात्रिकालीन यातायात को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन 12 घंटे का पूर्ण प्रतिबंध असंगत और अनुपातहीन है। आवश्यकता होने पर गति सीमा, हेडलाइट नियंत्रण और काफिला प्रबंधन जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
अधिवक्ता ने आदेश वापस लेने, वैज्ञानिक अध्ययन कराने और भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह मार्ग वास्तव में कोर एरिया में आता है तो इसे 24 घंटे के लिए बंद किया जाए।
मार्ग परिवर्तन से यात्रियों को करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी और समय भी अधिक लगेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंध शाम छह बजे के बजाय रात आठ बजे से लागू किया जाता तो कम परेशानी होती। यह व्यवस्था शनिवार से लागू कर दी गई है।
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दुधवा पार्क क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए दुधवा उपनिदेशक जगदीश आर ने यह निर्देश दिए हैं। पार्क प्रशासन का मानना है कि रात में गुजरने वाले वाहनों से वन्यजीवों के हादसे का खतरा रहता है। इस अवधि में गौरीफंटा से पलिया जाने वाले वाहनों को डिगनिया तिराहे से चंदन चौकी होकर तथा पलिया से गौरीफंटा जाने वालों को दुधवा बैरियर से वाया चंदनचौकी होकर जाना होगा।
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बफर जोन में 12 घंटे के प्रतिबंध को बताया असंगत
लखीमपुर खीरी। दुधवा-गौरीफंटा मार्ग को शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक बंद किए जाने के आदेश के विरोध में हाई कोर्ट के अधिवक्ता एसएम हैदर रिजवी ने दुधवा पार्क प्रशासन को प्रत्यावेदन सौंपा है।
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प्रत्यावेदन में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश कोर/क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट पर लागू होते हैं, जबकि दुधवा-गौरीफंटा मार्ग बफर जोन से होकर गुजरता है। यह मार्ग नेपाल सीमा, जनपद मुख्यालय और दर्जनों थारू बाहुल्य गांवों को जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि बफर जोन का उद्देश्य वन्यजीव और मानव गतिविधियों का सहअस्तित्व है। ऐसे में रात्रिकालीन यातायात को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन 12 घंटे का पूर्ण प्रतिबंध असंगत और अनुपातहीन है। आवश्यकता होने पर गति सीमा, हेडलाइट नियंत्रण और काफिला प्रबंधन जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
अधिवक्ता ने आदेश वापस लेने, वैज्ञानिक अध्ययन कराने और भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह मार्ग वास्तव में कोर एरिया में आता है तो इसे 24 घंटे के लिए बंद किया जाए।
मार्ग परिवर्तन से यात्रियों को करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी और समय भी अधिक लगेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंध शाम छह बजे के बजाय रात आठ बजे से लागू किया जाता तो कम परेशानी होती। यह व्यवस्था शनिवार से लागू कर दी गई है।