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आलसी हो रहे बाघ: आसान शिकार की तलाश में जंगल छोड़ गांव पहुंच रहे बाघ

Thu, 08 Jun 2023 12:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jun 2023 12:35 AM IST
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Tigers getting lazy: Tigers leaving the forest in search of easy prey and reaching villages
दुधवा जंगल के बाहर छुट्टा जानवरों को दौड़ता बाघ
लखीमपुर खीरी। दुधवा के बाघों का स्वभाव बदल रहा है। अब वे शिकार पर ज्यादा मेहनत करने की बजाय आसान शिकार तलाश रहे हैं। यही कारण है कि बाघ जंगल से बाहर निकल रहे हैं, जहां उन्हें छुट्टा और पालतू जानवरों के रूप में आसानी से भोजन मिल रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. दया शंकर कहते हैं कि बाघों का स्वभाव बदल रहा है उनमें आलस बढ़ रहा है। जंगली जानवर जैसे फुर्तीले हिरनों का शिकार करने के लिए बाघ को दस से बीस बार कोशिश करनी पड़ती है। इसमें उसकी 20 से 70 प्रतिशत तक ऊर्जा खर्च होती है। जबकि पालतू या छुट्टा जानवरों का शिकार करने में इन्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
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छुट्टा जानवरों का शरीर भारी होता है। यह बाघ जैसी फुर्ती से भाग नहीं पाते और बाघ इनका शिकार आसानी से कर लेता है। उनका कहना है कि बाघ जब जंगल में हिरन का शिकार करता है तो उसे 20-25 किलो मांस मिल पाता है। जबकि जंगल के बाहर गाय, बैल या सुअर का शिकार करने पर एक क्विंटल से अधिक मांस मिल जाता है, जो बाघ के लिए तीन दिन का भोजन हो जाता है।
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खेत की आदत लग गई तो जंगल पसंद नहीं आते
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के पलिया रेंज के मरौचा गांव के पास एक किशोर को निवाला बनाने वाली बाघिन को वन विभाग ने 29 नवंबर 2022 को पकड़कर रेडियो कॉलर लगाने के बाद जंगल में छोड़ दिया था। दो महीने बाद यह बाघिन फिर वापस उसी जगह आ गई थी। छह जनवरी 2023 को उसे बेहोशकर फिर जंगल में छोड़ा गया है। फिलहाल उसकी लोकेशन नेपाल में मिल रही है। ऐसे ही कई बाघों ने स्थाई रूप से गन्ने के खेतों में ही अपना बसेरा बना लिया है। डब्ल्यूडब्लयूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डॉ. मुदित गुप्ता का कहना है कि बाघों को जंगल के बाहर गन्ने के खेतों में जंगल जैसा माहौल और आसान शिकार मिलता है। इसी लिए बाघ बाहर निकल रहे हैं।
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