{"_id":"57c712784f1c1b3c362cb332","slug":"tiger-rescue-operation-lasted-six-hours","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह घंटे चला ऑपरेशन रेस्क्यू टाइगर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह घंटे चला ऑपरेशन रेस्क्यू टाइगर
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 31 Aug 2016 11:06 PM IST
विज्ञापन
बाघ
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पड्डे के सहारे बाघ हुआ ट्रैंक्विलाइज
पहली डॉट में ही हुआ अचेत
तीन सदस्यीय दल के नेतृत्व ऑपरेशन कामयाब
ट्रेंक्युलाइजर एक्सपर्ट डॉ उत्कर्ष शुक्ला, डॉ बृजेंद्र यादव और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दबीर हसन ने छह घंटे के ऑपरेशन रेस्क्यू टाइगर में खूनी बाघ को ट्रेंक्यूलाइजिंग सिस्टम से अचेत कर दबोच लिया। बाघ को दबोचने के लिए टीम ने एक पड्डे का सहारा लिया और बाघ महकमे के कटघरे में आ गया।
पीलीभीत-बस्ती मार्ग पर स्थित मैलानी रेंज के जंगल स्थित टेंढ़वा पुल से मैलानी की ओर करीब ढाई किलोमीटर दूर खरेहटा, भरिगवां, जटपुरा, महुरैना बीट जंगलों से सटे गांव छेदीपुर में तीन लोगों को निवाला बनाने के बाद बाघ की दहशत फैल गई थी। गांव वालों में आक्रोश व्याप्त हो गया था। मंगलवार की शाम को ही डीएम आकाशदीप ने प्रमुख सचिव वन से वार्ता कर बाघ को नरभक्षी घोषित कराने की सिफारिश की थी, जिस पर शासन से बाघ को मारने का ऑपरेशन चलाने का संकेत भी दे दिया गया था। इसी संकेत के बाद रात में ही बाघ को ट्रेस करने के लिए छेदीपुर के पास और भरिगवां बीट उत्तरी कटना कक्ष संख्या-एक में जंगल सीमा पर पिंजरा लगाकर पड्डा बांधा गया। डीएफओ संजय विस्वाल बताते हैं कि मॉनीटरिंग के दौरान यह ट्रेस हो चुका था कि बाघ हमला करने के बाद मुश्किल से दो सौ से तीन सौ मीटर के क्षेत्रफल में ही रह रहा है। इससे उसे पकड़ना आसान था, इसीलिए पड्डा बांधा गया। बुधवार की सुबह दस बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो बाघ पड्डा उठा ले गया था। इसके बाद तीनों सदस्यीय टीम ने हाथी पर सवार होकर बाघ को तलाश करना शुरू किया तो जंगल के भीतर मुश्किल से एक फर्लांग दूर तीन फुट ऊंची घास में बाघ बैठा दिखा। करीब दो बजकर 51 मिनट पर ट्रैंक्विलाइज सिस्टम से पहली ही डॉट बाघ को जा लगी। बाघ की दहाड़ सुनाई दी और बंद हो गई। इस पर ऑपरेशन टीम धीरे-धीरे आगे बढ़ी और यह तय कर लेने के बाद कि वह बेहोश हो गया है टीम नीचे उतरी और बाघ की पड़ताल कर उसे कैद कर लिया। इसके बाद उसे तत्काल लखनऊ जू के लिए रवाना कर दिया गया।
...तो बाघ ने तीन नहीं चार लोगों की ली थी जान
लखीमपुर। छेदीपुर में दो और भरिगवां में एक किसान की हत्या करने वाला यदि बाघ है तो निश्चय ही कपरहा कुआं गांव की किशोरी सरस्वती को निवाला बनाने वाला भी बाघ ही था। इस तरह इस बाघ ने तीन नहीं चार लोगों की जान ली थी। छेदीपुर में टीकाराम की बाघ के हमले में मौत के बाद वन विभाग ने पगमार्क देखकर यह दावा किया था कि सरस्वती को मारने वाला बाघ था जबकि टीकाराम का शिकार करने वाली बाघिन थी। इसके बाद बाबूराम और जानकी प्रसाद पर हमले की जिम्मेदार भी बाघिन ही ठहराई गई। जब बुधवार को बाघ ट्रैंकुलाइज हुआ तो वन विभाग के दावों की पोल खुल गई। अब वन विभाग पगमार्क की पहचान मेें चूक होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।
विज्ञापन
चार फुट ऊंचा और 11 फुट लंबा है बाघ
ट्रैंक्विलाइज एक्सपर्ट डॉ उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि बाघ की औसतन उम्र 20 वर्ष होती है। पकड़े गए नर बाघ की उम्र 12 वर्ष प्रतीत हो रही है। बाघ की सिर से लेकर पूंछ तक की लंबाई 11 फुट मापी गई, जबकि वह चार फुट ऊंचा है।
ऑपरेशन रेस्क्यू टाइगर में यह भी लगी टीम
मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव में ऑपरेशन रेस्क्यू टाइगर में मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव एसके शर्मा, मुख्य वन संरक्षक लखनऊ मंडल इवा शर्मा, एफडी दुधवा सुनील चौधरी, डीडी महावीर कौजलागि, डीएफओ संजय बिस्वाल।
कब क्या हुआ
समय: प्रात: 10.00 बजे : पिंजरे के पास से पड्डा गायब मिला। बाघ द्वारा खींचकर ले जाने के चिह्न पाए गए।
प्रात: 10.30 बजे : सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
दोपहर 12.00 बजे: टाइगर का डेथ वारंट फैक्स से पहुंचा।
दोपहर बाद 02.30 बजे : जंगल के अंदर घर में दिखा बाघ।
02.51 बजे : ट्रैंक्विलाइज डॉट को गन शॉट दिया, जो बाघ को जा लगी।
03.15 बजे : अचेत बाघ पिंजरा में कैद कर दिया गया।
03.30 बजे: सर्च अभियान के अन्य अधिकारियों को बुलाया गया।
04.15 बजे : लखनऊ जू के लिए रवाना कर दिया गया।
- बाघ को आदमखोर मानने से विशेषज्ञ का इंकार
- कहा कि आदमखोर होता तो पशुओं को नहीं मारता
- झुके होने पर मनुष्य को पशु समझकर कर देता था हमला
बाघ को पकड़ने के लिए आई लखनऊ की टीम में शामिल वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डॉ. मसूख चटर्जी ने बाघ को आदमखोर मानने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि लखनऊ में बाघ की पूरी स्वास्थ्य जांच हो जाने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकेगा।
डॉ. चटर्जी ने बाघ के पकड़े जाने के बाद अमर उजाला से कहा कि लगभग तीन से साढ़े तीन वर्ष के बाघ का ऊपर का दांत (केनाइन) टूटा हुआ है, हो सकता है कि बाघ इसी कारण बड़े शिकार को छोड़कर छोटे शिकार कर रहा हो, हालांकि उसने दो पड्डे भी मारे हैं, जिससे अभी कुछ कहना संभव नहीं है। अभी तक लोगों का शिकार करने वाले बाघ को मादा बताए जाने और कुछ वन अधिकारियों के उसे गर्भवती तक बताए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बाघ की हरकतों और पगमार्क से उसके फीमेल होने का शक हो रहा था। डॉ. चटर्जी ने कहा कि बाघ को आदमखोर कहना पूरी तरह से गलत है। बाघ ने अभी तक जो लोग मारे हैं, उन पर उस वक्त हमला हुआ जब वह लेटे हुए थे अथवा झुके थे। बाघ लेटे और झुके लोगों को पशु समझकर हमला कर देते हैं। बाघ आदमखोर होता तो पड्डों का शिकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि बाघ स्वस्थ पाया गया तो दुधवा के जंगल में छोड़ दिया जाएगा और यदि यदि स्वस्थ्य न हुआ तो चिड़ियाघर में रखा जाएगा।
--
तीन डॉट्स के बाद बाघ ने खोया होश
खुटार। टीम में शामिल सूत्रों ने बताया कि दोपहर बाद ढाई बजे बाघ को जंगल में घेर लिया गया। इसके बाद उसे निशाने पर लिया गया। विशेषज्ञों ने बाघ को पहला डॉट 2.45 बजे मारा। इसके बाद दूसरा डॉट् 3.07 बजे मारा, लेकिन इसके बाद भी बाघ के शरीर में हरकत जारी रहने पर 3.15 बजे तीसरा डॉट् मारा गया। इसके बाद बाघ होश खो बैठा।
----
बड़ी चूक: बाघिन बताते रहे पकड़ा गया बाघ
लखीमपुर खीरी। वन विभाग के अधिकारी टाइगर मानीटरिंग के दौरान लगातार तीन ग्रामीणों की हत्या करने वाले जानवर को बाघिन बताते रहे। पगमार्क देखकर वन अधिकारियों ने दावा किया था कि हमलावर बाघिन है। वन विभाग के अधिकारियों ने तो यहां तक दावा किया था कि बाघिन गर्भवती है, लेकिन जिसे ट्रैंक्विलाइज किया गया वो बाघ निकला। ऐसे में या तो वन विभाग सही ढंग से हमलावर जानवर की पहचान नहीं कर पाए या कहीं दूसरा बाघ तो ट्रैंक्विलाइज नहीं हो गया। यह सवाल लोगों के जेहन में घूम रहा है। उधर हटाए गए डीएफओ संजय बिस्वाल कहते हैं कि अभी तक जो पगमार्क मिले वह स्पष्ट नहीं थे, एक पगमार्क कुछ ठीक नजर आया, जो बाघिन जैसा था, जिसे देखने से ही भ्रम हुआ था। बुधवार की सुबह यह स्पष्ट हो गया था कि नर बाघ ही है।
--
डीएफओ संजय विस्वाल हटे, वाईपी शुक्ला को चार्ज
लखीमपुर खीरी। छेदीपुर की खूनी बाघ को काबू न कर पाने का खामियाजा डीएफओ साउथ संजय विस्वाल को भुगतना पड़ा। उन्हें यहां से हटाकर वन मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। उनकी जगह पर प्रतापगढ़ से आए वाईपी शुक्ला डीएफओ साउथ का कार्यभार देखेंगे। उधर एसडीओ लखीमपुर का ओबरा तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह बहराइच के एसडीओ अखिलेश पांडेय को तैनात किया गया है।
विज्ञापन
पहली डॉट में ही हुआ अचेत
तीन सदस्यीय दल के नेतृत्व ऑपरेशन कामयाब
ट्रेंक्युलाइजर एक्सपर्ट डॉ उत्कर्ष शुक्ला, डॉ बृजेंद्र यादव और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दबीर हसन ने छह घंटे के ऑपरेशन रेस्क्यू टाइगर में खूनी बाघ को ट्रेंक्यूलाइजिंग सिस्टम से अचेत कर दबोच लिया। बाघ को दबोचने के लिए टीम ने एक पड्डे का सहारा लिया और बाघ महकमे के कटघरे में आ गया।
पीलीभीत-बस्ती मार्ग पर स्थित मैलानी रेंज के जंगल स्थित टेंढ़वा पुल से मैलानी की ओर करीब ढाई किलोमीटर दूर खरेहटा, भरिगवां, जटपुरा, महुरैना बीट जंगलों से सटे गांव छेदीपुर में तीन लोगों को निवाला बनाने के बाद बाघ की दहशत फैल गई थी। गांव वालों में आक्रोश व्याप्त हो गया था। मंगलवार की शाम को ही डीएम आकाशदीप ने प्रमुख सचिव वन से वार्ता कर बाघ को नरभक्षी घोषित कराने की सिफारिश की थी, जिस पर शासन से बाघ को मारने का ऑपरेशन चलाने का संकेत भी दे दिया गया था। इसी संकेत के बाद रात में ही बाघ को ट्रेस करने के लिए छेदीपुर के पास और भरिगवां बीट उत्तरी कटना कक्ष संख्या-एक में जंगल सीमा पर पिंजरा लगाकर पड्डा बांधा गया। डीएफओ संजय विस्वाल बताते हैं कि मॉनीटरिंग के दौरान यह ट्रेस हो चुका था कि बाघ हमला करने के बाद मुश्किल से दो सौ से तीन सौ मीटर के क्षेत्रफल में ही रह रहा है। इससे उसे पकड़ना आसान था, इसीलिए पड्डा बांधा गया। बुधवार की सुबह दस बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो बाघ पड्डा उठा ले गया था। इसके बाद तीनों सदस्यीय टीम ने हाथी पर सवार होकर बाघ को तलाश करना शुरू किया तो जंगल के भीतर मुश्किल से एक फर्लांग दूर तीन फुट ऊंची घास में बाघ बैठा दिखा। करीब दो बजकर 51 मिनट पर ट्रैंक्विलाइज सिस्टम से पहली ही डॉट बाघ को जा लगी। बाघ की दहाड़ सुनाई दी और बंद हो गई। इस पर ऑपरेशन टीम धीरे-धीरे आगे बढ़ी और यह तय कर लेने के बाद कि वह बेहोश हो गया है टीम नीचे उतरी और बाघ की पड़ताल कर उसे कैद कर लिया। इसके बाद उसे तत्काल लखनऊ जू के लिए रवाना कर दिया गया।
विज्ञापन
...तो बाघ ने तीन नहीं चार लोगों की ली थी जान
लखीमपुर। छेदीपुर में दो और भरिगवां में एक किसान की हत्या करने वाला यदि बाघ है तो निश्चय ही कपरहा कुआं गांव की किशोरी सरस्वती को निवाला बनाने वाला भी बाघ ही था। इस तरह इस बाघ ने तीन नहीं चार लोगों की जान ली थी। छेदीपुर में टीकाराम की बाघ के हमले में मौत के बाद वन विभाग ने पगमार्क देखकर यह दावा किया था कि सरस्वती को मारने वाला बाघ था जबकि टीकाराम का शिकार करने वाली बाघिन थी। इसके बाद बाबूराम और जानकी प्रसाद पर हमले की जिम्मेदार भी बाघिन ही ठहराई गई। जब बुधवार को बाघ ट्रैंकुलाइज हुआ तो वन विभाग के दावों की पोल खुल गई। अब वन विभाग पगमार्क की पहचान मेें चूक होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।
विज्ञापन
चार फुट ऊंचा और 11 फुट लंबा है बाघ
ट्रैंक्विलाइज एक्सपर्ट डॉ उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि बाघ की औसतन उम्र 20 वर्ष होती है। पकड़े गए नर बाघ की उम्र 12 वर्ष प्रतीत हो रही है। बाघ की सिर से लेकर पूंछ तक की लंबाई 11 फुट मापी गई, जबकि वह चार फुट ऊंचा है।
ऑपरेशन रेस्क्यू टाइगर में यह भी लगी टीम
मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव में ऑपरेशन रेस्क्यू टाइगर में मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव एसके शर्मा, मुख्य वन संरक्षक लखनऊ मंडल इवा शर्मा, एफडी दुधवा सुनील चौधरी, डीडी महावीर कौजलागि, डीएफओ संजय बिस्वाल।
कब क्या हुआ
समय: प्रात: 10.00 बजे : पिंजरे के पास से पड्डा गायब मिला। बाघ द्वारा खींचकर ले जाने के चिह्न पाए गए।
प्रात: 10.30 बजे : सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
दोपहर 12.00 बजे: टाइगर का डेथ वारंट फैक्स से पहुंचा।
दोपहर बाद 02.30 बजे : जंगल के अंदर घर में दिखा बाघ।
02.51 बजे : ट्रैंक्विलाइज डॉट को गन शॉट दिया, जो बाघ को जा लगी।
03.15 बजे : अचेत बाघ पिंजरा में कैद कर दिया गया।
03.30 बजे: सर्च अभियान के अन्य अधिकारियों को बुलाया गया।
04.15 बजे : लखनऊ जू के लिए रवाना कर दिया गया।
- बाघ को आदमखोर मानने से विशेषज्ञ का इंकार
- कहा कि आदमखोर होता तो पशुओं को नहीं मारता
- झुके होने पर मनुष्य को पशु समझकर कर देता था हमला
बाघ को पकड़ने के लिए आई लखनऊ की टीम में शामिल वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डॉ. मसूख चटर्जी ने बाघ को आदमखोर मानने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि लखनऊ में बाघ की पूरी स्वास्थ्य जांच हो जाने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकेगा।
डॉ. चटर्जी ने बाघ के पकड़े जाने के बाद अमर उजाला से कहा कि लगभग तीन से साढ़े तीन वर्ष के बाघ का ऊपर का दांत (केनाइन) टूटा हुआ है, हो सकता है कि बाघ इसी कारण बड़े शिकार को छोड़कर छोटे शिकार कर रहा हो, हालांकि उसने दो पड्डे भी मारे हैं, जिससे अभी कुछ कहना संभव नहीं है। अभी तक लोगों का शिकार करने वाले बाघ को मादा बताए जाने और कुछ वन अधिकारियों के उसे गर्भवती तक बताए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बाघ की हरकतों और पगमार्क से उसके फीमेल होने का शक हो रहा था। डॉ. चटर्जी ने कहा कि बाघ को आदमखोर कहना पूरी तरह से गलत है। बाघ ने अभी तक जो लोग मारे हैं, उन पर उस वक्त हमला हुआ जब वह लेटे हुए थे अथवा झुके थे। बाघ लेटे और झुके लोगों को पशु समझकर हमला कर देते हैं। बाघ आदमखोर होता तो पड्डों का शिकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि बाघ स्वस्थ पाया गया तो दुधवा के जंगल में छोड़ दिया जाएगा और यदि यदि स्वस्थ्य न हुआ तो चिड़ियाघर में रखा जाएगा।
--
तीन डॉट्स के बाद बाघ ने खोया होश
खुटार। टीम में शामिल सूत्रों ने बताया कि दोपहर बाद ढाई बजे बाघ को जंगल में घेर लिया गया। इसके बाद उसे निशाने पर लिया गया। विशेषज्ञों ने बाघ को पहला डॉट 2.45 बजे मारा। इसके बाद दूसरा डॉट् 3.07 बजे मारा, लेकिन इसके बाद भी बाघ के शरीर में हरकत जारी रहने पर 3.15 बजे तीसरा डॉट् मारा गया। इसके बाद बाघ होश खो बैठा।
----
बड़ी चूक: बाघिन बताते रहे पकड़ा गया बाघ
लखीमपुर खीरी। वन विभाग के अधिकारी टाइगर मानीटरिंग के दौरान लगातार तीन ग्रामीणों की हत्या करने वाले जानवर को बाघिन बताते रहे। पगमार्क देखकर वन अधिकारियों ने दावा किया था कि हमलावर बाघिन है। वन विभाग के अधिकारियों ने तो यहां तक दावा किया था कि बाघिन गर्भवती है, लेकिन जिसे ट्रैंक्विलाइज किया गया वो बाघ निकला। ऐसे में या तो वन विभाग सही ढंग से हमलावर जानवर की पहचान नहीं कर पाए या कहीं दूसरा बाघ तो ट्रैंक्विलाइज नहीं हो गया। यह सवाल लोगों के जेहन में घूम रहा है। उधर हटाए गए डीएफओ संजय बिस्वाल कहते हैं कि अभी तक जो पगमार्क मिले वह स्पष्ट नहीं थे, एक पगमार्क कुछ ठीक नजर आया, जो बाघिन जैसा था, जिसे देखने से ही भ्रम हुआ था। बुधवार की सुबह यह स्पष्ट हो गया था कि नर बाघ ही है।
--
डीएफओ संजय विस्वाल हटे, वाईपी शुक्ला को चार्ज
लखीमपुर खीरी। छेदीपुर की खूनी बाघ को काबू न कर पाने का खामियाजा डीएफओ साउथ संजय विस्वाल को भुगतना पड़ा। उन्हें यहां से हटाकर वन मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। उनकी जगह पर प्रतापगढ़ से आए वाईपी शुक्ला डीएफओ साउथ का कार्यभार देखेंगे। उधर एसडीओ लखीमपुर का ओबरा तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह बहराइच के एसडीओ अखिलेश पांडेय को तैनात किया गया है।