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Lakhimpur Kheri News: तीन दिन की बारिश में महीनों की मेहनत पर फिरा पानी
Sun, 27 Sep 2026 11:25 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 27 Sep 2026 11:25 PM IST
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रामू मुखिया के खेत में लगी धान की गिरी फसल। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिले में तीन दिनों से तेज हवा के साथ हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में धान, गन्ना, केला, उड़द, बाजरा, तिल, मूंग, मक्का, मूंगफली समेत कई फसलें गिर गई हैं। कई खेतों में पानी भर गया है।
पानी में डूबी फसलों के सड़ने और फंगस लगने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि दो दिनों में पानी निकल जाए तो फसलों को बचाया जा सकता है। जलभराव बना रहा तो नुकसान बढ़ने का अनुमान है।
जिले में 6.56 लाख से अधिक किसान हैं। करीब 6.34 लाख हेक्टेयर में खेती होती है। इनमें सबसे अधिक 3.64 लाख हेक्टेयर में गन्ना और 1.04 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। भारी बारिश और जलभराव से दलहनी व सब्जियों की फसलों पर भी असर पड़ा है। पानी में डूबी सब्जियों और दलहनी फसलों में सड़न व फंगस का खतरा बढ़ गया है।
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कृषि विभाग के अनुसार, धान की पकी फसलों को नुकसान होगा। कच्ची दूधिया वाली बाली के धान पर विशेष असर नहीं होगा। फसलों के नुकसान के आकलन के लिए रविवार को राजस्व और कृषि विभाग की टीमों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वे शुरू कर दिया।
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से जल्द खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करने की अपील की है। लगातार जलभराव से सड़न और फंगस बढ़ने की आशंका है। मितौली, बरवर, मोहम्मदी, मैगलगंज, गोला, अमीरनगर आदि क्षेत्रों में भी किसान फसल नुकसान से परेशान हैं।
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खरीफ फसलों का रकबा एक नजर में
धान : 1.04 लाख हेक्टेयर
गन्ना : 3.64 लाख हेक्टेयर
उड़द : 1,200 हेक्टेयर
बाजरा : 4,600 हेक्टेयर
तिल : 590 हेक्टेयर
ज्वार : 500 हेक्टेयर
मूंग : 72 हेक्टेयर
मक्का: 7,200 हेक्टेयर
मूंगफली: 2,700 हेक्टेयर
केला: 3,115 हेक्टेयर
लौकी: 245 हेक्टेयर
भिंडी: 245 हेक्टेयर
टमाटर: 470 हेक्टेयर
फूलगोभी: 412 हेक्टेयर
धनिया: 255 हेक्टेयर
हरी मिर्च: 212 हेक्टेयर
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72 घंटे में दें टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना
जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा कराने वाले किसान 72 घंटे के अंदर 14447 नंबर पर शिकायत दर्ज करा दें। समय सीमा में सूचना मिलने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। व्यक्तिगत स्तर पर फसल क्षति की सूचना मिलने पर कृषि, राजस्व विभाग और संबंधित बीमा कंपनी की संयुक्त टीम नुकसान का आकलन करेंगी। दावा संबंधी अभिलेख और विवरण सुरक्षित रखें, ताकि दावा निस्तारण में परेशानी न हो।
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कटान-बाढ़ के बाद अब बारिश ने किसानों की तोड़ी कमर
धौरहरा/निघासन/मितौली। धाैरहरा के कफारा के किसान अभिषेक ने बताया कि एक एकड़ केला और चार एकड़ अधपका धान गिर गया। मूड़ी के किसान दीपू सिंह, दुर्गापुर पड़री निवासी मुन्ना अवस्थी, ईसानगर के मिथिलेश मिश्र, महरिया के राजू गौतम और शंभूदयाल ने मुआवजे की मांग की है। ईसानगर के किसान राजू गौतम और हरीश अवस्थी ने कहा कि कटान, बाढ़ के बाद अब बारिश आफत बनकर आई है। किसान जयशंकर मिश्रा और संगम लाल मिश्रा ने कहा कि बारिश से केला, गन्ना, मक्का और उड़द गिर गई हैं। निघासन में सिंगाही के तुलसीराम, रामनारायण, अंबिका प्रसाद, राम कैलास, श्रीप्रकाश वर्मा आदि किसानों ने कहा कि उनके केले को नुकसान हुआ है। रामू वर्मा ने कहा कि उनका धान गिर गया। एसडीएम यदुवीर सिंह ने बताया कि फसल नुकसान का सर्वे शुरू करा दिया है।
मितौली में बबौना, खुर्दा, कचियानी, ओदारा, रानीबेहड़ कस्ता, महमदपुर, अवधपुर, भीखमपुर समेत कई गांवों में जलभराव से फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद
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किसानों से अपील है कि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा न रहने दें। जलनिकासी की व्यवस्था करने से नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। रविवार को कई क्षेत्रों का भ्रमण किया है। किसानों को फसल बचाव के प्रति जागरूक किया है। सभी विकास खंडों से टीमें भी लगाई हैं, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके।
-गिरीश चंद्र, उपकृषि निदेशक
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पानी में डूबी फसलों के सड़ने और फंगस लगने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि दो दिनों में पानी निकल जाए तो फसलों को बचाया जा सकता है। जलभराव बना रहा तो नुकसान बढ़ने का अनुमान है।
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जिले में 6.56 लाख से अधिक किसान हैं। करीब 6.34 लाख हेक्टेयर में खेती होती है। इनमें सबसे अधिक 3.64 लाख हेक्टेयर में गन्ना और 1.04 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। भारी बारिश और जलभराव से दलहनी व सब्जियों की फसलों पर भी असर पड़ा है। पानी में डूबी सब्जियों और दलहनी फसलों में सड़न व फंगस का खतरा बढ़ गया है।
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कृषि विभाग के अनुसार, धान की पकी फसलों को नुकसान होगा। कच्ची दूधिया वाली बाली के धान पर विशेष असर नहीं होगा। फसलों के नुकसान के आकलन के लिए रविवार को राजस्व और कृषि विभाग की टीमों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वे शुरू कर दिया।
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से जल्द खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करने की अपील की है। लगातार जलभराव से सड़न और फंगस बढ़ने की आशंका है। मितौली, बरवर, मोहम्मदी, मैगलगंज, गोला, अमीरनगर आदि क्षेत्रों में भी किसान फसल नुकसान से परेशान हैं।
खरीफ फसलों का रकबा एक नजर में
धान : 1.04 लाख हेक्टेयर
गन्ना : 3.64 लाख हेक्टेयर
उड़द : 1,200 हेक्टेयर
बाजरा : 4,600 हेक्टेयर
तिल : 590 हेक्टेयर
ज्वार : 500 हेक्टेयर
मूंग : 72 हेक्टेयर
मक्का: 7,200 हेक्टेयर
मूंगफली: 2,700 हेक्टेयर
केला: 3,115 हेक्टेयर
लौकी: 245 हेक्टेयर
भिंडी: 245 हेक्टेयर
टमाटर: 470 हेक्टेयर
फूलगोभी: 412 हेक्टेयर
धनिया: 255 हेक्टेयर
हरी मिर्च: 212 हेक्टेयर
72 घंटे में दें टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना
जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा कराने वाले किसान 72 घंटे के अंदर 14447 नंबर पर शिकायत दर्ज करा दें। समय सीमा में सूचना मिलने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। व्यक्तिगत स्तर पर फसल क्षति की सूचना मिलने पर कृषि, राजस्व विभाग और संबंधित बीमा कंपनी की संयुक्त टीम नुकसान का आकलन करेंगी। दावा संबंधी अभिलेख और विवरण सुरक्षित रखें, ताकि दावा निस्तारण में परेशानी न हो।
कटान-बाढ़ के बाद अब बारिश ने किसानों की तोड़ी कमर
धौरहरा/निघासन/मितौली। धाैरहरा के कफारा के किसान अभिषेक ने बताया कि एक एकड़ केला और चार एकड़ अधपका धान गिर गया। मूड़ी के किसान दीपू सिंह, दुर्गापुर पड़री निवासी मुन्ना अवस्थी, ईसानगर के मिथिलेश मिश्र, महरिया के राजू गौतम और शंभूदयाल ने मुआवजे की मांग की है। ईसानगर के किसान राजू गौतम और हरीश अवस्थी ने कहा कि कटान, बाढ़ के बाद अब बारिश आफत बनकर आई है। किसान जयशंकर मिश्रा और संगम लाल मिश्रा ने कहा कि बारिश से केला, गन्ना, मक्का और उड़द गिर गई हैं। निघासन में सिंगाही के तुलसीराम, रामनारायण, अंबिका प्रसाद, राम कैलास, श्रीप्रकाश वर्मा आदि किसानों ने कहा कि उनके केले को नुकसान हुआ है। रामू वर्मा ने कहा कि उनका धान गिर गया। एसडीएम यदुवीर सिंह ने बताया कि फसल नुकसान का सर्वे शुरू करा दिया है।
मितौली में बबौना, खुर्दा, कचियानी, ओदारा, रानीबेहड़ कस्ता, महमदपुर, अवधपुर, भीखमपुर समेत कई गांवों में जलभराव से फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद
किसानों से अपील है कि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा न रहने दें। जलनिकासी की व्यवस्था करने से नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। रविवार को कई क्षेत्रों का भ्रमण किया है। किसानों को फसल बचाव के प्रति जागरूक किया है। सभी विकास खंडों से टीमें भी लगाई हैं, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके।
-गिरीश चंद्र, उपकृषि निदेशक

रामू मुखिया के खेत में लगी धान की गिरी फसल। संवाद

रामू मुखिया के खेत में लगी धान की गिरी फसल। संवाद