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Lakhimpur Kheri News: मुक्तिधाम में अव्यवस्थाओं से नहीं मुक्ति
Wed, 09 Sep 2026 11:54 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 09 Sep 2026 11:54 PM IST
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खीरी मुक्तिधाम में टीन शेड के नीचे निवास करते अघोरी। संवाद
लखीमपुर खीरी। शहर से गांव तक अंतिम संस्कार के प्रमुख स्थल मुक्तिधाम बदहाल हैं। कहीं जर्जर छतों के नीचे अंत्येष्टि हो रही है तो कहीं झाड़ियों और अव्यवस्थाओं के बीच लोग आखिरी विदाई देने के लिए मजबूर हैं।
बारिश में इन जगहों पर खतरा और बढ़ गया है। रखरखाव के अभाव में मुक्तिधामों की व्यवस्थाएं लगातार खराब होती जा रही हैं। शहर से सटे ग्राम पंचायत लखीमपुर देहात के घोसियाना/सुआगाड़ा में प्रमुख मुक्तिधाम है। शहर के करीब 80 प्रतिशत अंतिम संस्कार यहीं होते हैं। यह मुक्तिधाम ट्रस्ट संचालित करता है। दान से मिलने वाली धनराशि से व्यवस्थाएं की जाती हैं।
उल्ल नदी के किनारे बने इस मुक्तिधाम का निर्माण और सुंदरीकरण तत्कालीन विधायक डॉ. कौशल किशोर ने कराया था। इसके बाद मिलने वाली सहयोग राशि से समय-समय पर व्यवस्थाएं की जाती हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारी न होने के कारण यह मुक्तिधाम अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ता जा रहा है।
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शवदाह के लिए 15 चबूतरे हैं, लेकिन ठीक स्थिति में करीब पांच-छह ही हैं। यहां प्रतिदिन औसतन 5-7 शवों की अंत्येष्टि होती है। अंतिम संस्कार में हजारों लोगों का आना-जाना होता है। कई चबूतरों की छतें सरियों के सहारे लटक रही हैं। बारिश में लोगों पर हादसे का खतरा मंडरा रहा है।
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स्नान घर और शौचालय में जड़ा मिला ताला
मुक्तिधाम में सार्वजनिक स्नानघर और शौचालय भी बनवाया गया था। हालांकि, इसमें हमेशा ताला पड़ा रहता है। ऐसे में लोगों को पेशाब करने के लिए भी बाहर किसी अन्य जगह की तलाश करनी पड़ती है।
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ग्रामीण क्षेत्र के भी मुक्तिधाम बदहाल, खेतों में अंतिम संस्कार
बेलरायां के भिडोरी गांव में 2010 में मुक्तिधाम बनवाया गया था। परिसर से हैंडपंप, गेट और टिनशेड नदारद हैं। झाड़ियां उग आई हैं। लोगों ने रेलवे भूमि, खेत-खलिहान और नदी किनारे अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है।
मोहम्मदी क्षेत्र के गांव केहुआ, बेलहरा दुवाहा और वेला में लोग अपने खेतों में अंतिम संस्कार करते हैं। बारिश में काफी दिक्कतें होती हैं। उधर, कस्बा खीरी स्थित चोरही बगिया के मुक्तिधाम का एक टिनशेड जर्जर है, जबकि दूसरे पर कथित तौर पर एक अघोरी का कब्जा है।
कमोबेश यही स्थिति ओयल नगर पंचायत और ग्राम पंचायत में बने दोनों मुक्तिधामों की भी हैं। कई स्थानों पर झाड़ियां इतनी बढ़ गई हैं कि रास्ता तक दिखाई नहीं देता। इस बाबत ओयल नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिभा गौतम ने बताया कि दोनों मुक्तिधामों की जल्द ही साफ-सफाई कराई जाएगी।
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चबूतरे के ऊपर पड़ी छत काफी समय से कमजोर है। लोग शवदाह के लिए आते हैं। ऐसे में हादसे की आशंका बनी हुई है। खासकर बारिश में खतरा और बढ़ जाता है। जिम्मेदारों को संज्ञान लेना चाहिए।
पैकरमा, कर्मचारी, घोसियाना/सुआगाड़ा मुक्तिधाम
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सरकार को साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। जनप्रतिनिधि आते हैं तो सफाई की बात करते हैं। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। झाड़ियों की वजह से सांप-बिच्छू का खतरा बना रहता है।
-हरीनाम वर्मा, माली, घोसियाना/सुआगाड़ा मुक्तिधाम
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मुक्तिधामों की देखरेख संबंधित ग्राम पंचायत, ब्लॉक या नगर पालिका स्तर से होती है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी इन्हीं स्तरों से की जाती है। स्थितियों की समय-समय पर समीक्षा होती है। जहां भी दिक्कतें हैं, उन्हें दिखवाया जाएगा।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ
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बारिश में इन जगहों पर खतरा और बढ़ गया है। रखरखाव के अभाव में मुक्तिधामों की व्यवस्थाएं लगातार खराब होती जा रही हैं। शहर से सटे ग्राम पंचायत लखीमपुर देहात के घोसियाना/सुआगाड़ा में प्रमुख मुक्तिधाम है। शहर के करीब 80 प्रतिशत अंतिम संस्कार यहीं होते हैं। यह मुक्तिधाम ट्रस्ट संचालित करता है। दान से मिलने वाली धनराशि से व्यवस्थाएं की जाती हैं।
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उल्ल नदी के किनारे बने इस मुक्तिधाम का निर्माण और सुंदरीकरण तत्कालीन विधायक डॉ. कौशल किशोर ने कराया था। इसके बाद मिलने वाली सहयोग राशि से समय-समय पर व्यवस्थाएं की जाती हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारी न होने के कारण यह मुक्तिधाम अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ता जा रहा है।
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शवदाह के लिए 15 चबूतरे हैं, लेकिन ठीक स्थिति में करीब पांच-छह ही हैं। यहां प्रतिदिन औसतन 5-7 शवों की अंत्येष्टि होती है। अंतिम संस्कार में हजारों लोगों का आना-जाना होता है। कई चबूतरों की छतें सरियों के सहारे लटक रही हैं। बारिश में लोगों पर हादसे का खतरा मंडरा रहा है।
स्नान घर और शौचालय में जड़ा मिला ताला
मुक्तिधाम में सार्वजनिक स्नानघर और शौचालय भी बनवाया गया था। हालांकि, इसमें हमेशा ताला पड़ा रहता है। ऐसे में लोगों को पेशाब करने के लिए भी बाहर किसी अन्य जगह की तलाश करनी पड़ती है।
ग्रामीण क्षेत्र के भी मुक्तिधाम बदहाल, खेतों में अंतिम संस्कार
बेलरायां के भिडोरी गांव में 2010 में मुक्तिधाम बनवाया गया था। परिसर से हैंडपंप, गेट और टिनशेड नदारद हैं। झाड़ियां उग आई हैं। लोगों ने रेलवे भूमि, खेत-खलिहान और नदी किनारे अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है।
मोहम्मदी क्षेत्र के गांव केहुआ, बेलहरा दुवाहा और वेला में लोग अपने खेतों में अंतिम संस्कार करते हैं। बारिश में काफी दिक्कतें होती हैं। उधर, कस्बा खीरी स्थित चोरही बगिया के मुक्तिधाम का एक टिनशेड जर्जर है, जबकि दूसरे पर कथित तौर पर एक अघोरी का कब्जा है।
कमोबेश यही स्थिति ओयल नगर पंचायत और ग्राम पंचायत में बने दोनों मुक्तिधामों की भी हैं। कई स्थानों पर झाड़ियां इतनी बढ़ गई हैं कि रास्ता तक दिखाई नहीं देता। इस बाबत ओयल नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिभा गौतम ने बताया कि दोनों मुक्तिधामों की जल्द ही साफ-सफाई कराई जाएगी।
चबूतरे के ऊपर पड़ी छत काफी समय से कमजोर है। लोग शवदाह के लिए आते हैं। ऐसे में हादसे की आशंका बनी हुई है। खासकर बारिश में खतरा और बढ़ जाता है। जिम्मेदारों को संज्ञान लेना चाहिए।
पैकरमा, कर्मचारी, घोसियाना/सुआगाड़ा मुक्तिधाम
सरकार को साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। जनप्रतिनिधि आते हैं तो सफाई की बात करते हैं। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। झाड़ियों की वजह से सांप-बिच्छू का खतरा बना रहता है।
-हरीनाम वर्मा, माली, घोसियाना/सुआगाड़ा मुक्तिधाम
मुक्तिधामों की देखरेख संबंधित ग्राम पंचायत, ब्लॉक या नगर पालिका स्तर से होती है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी इन्हीं स्तरों से की जाती है। स्थितियों की समय-समय पर समीक्षा होती है। जहां भी दिक्कतें हैं, उन्हें दिखवाया जाएगा।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ

खीरी मुक्तिधाम में टीन शेड के नीचे निवास करते अघोरी। संवाद

खीरी मुक्तिधाम में टीन शेड के नीचे निवास करते अघोरी। संवाद

खीरी मुक्तिधाम में टीन शेड के नीचे निवास करते अघोरी। संवाद

खीरी मुक्तिधाम में टीन शेड के नीचे निवास करते अघोरी। संवाद