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ट्रैंकुलाइज कर पकड़ी गई जख्मी बाघिन

Thu, 19 Jan 2017 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महंगापुर।
अमर उजाला ब्यूरो महंगापुर। Updated Thu, 19 Jan 2017 11:10 PM IST
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There intercepted Trankulaij wounded tigress
बाघिन - फोटो : अमर उजाला
- वन विभाग, पार्क, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, डब्ल्यूटीआई का रहा अभियान
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- पेट और रीढ़ की हड्डी के पास घाव, इलाज के लिए भेजी जाएगी लखनऊ

 गदनियां क्षेत्र से सटे नार्थ खीरी डिवीजन के गदनिया बीट के सुहेला में बुधवार को झाड़ियों में देखे गए जख्मी बाघ को बृहस्पतिवार की शाम करीब पांच बजे ट्रैंकुलाइज कर लिया गया। वह मादा निकली और उसकी उम्र करीब डेढ़ साल बताई जा रही है। उसके पेट और रीढ़ की हड्डी के पास जख्म मिले हैं। उसे इलाज के लिए लखनऊ भेजा जाएगा। उसको पकड़ने के अभियान में वन विभाग, दुधवा पार्क, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और डब्ल्यूटीआई शामिल रही।
गौरतलब है कि नार्थ खीरी डिवीजन की पलिया वन रेंज के अंतर्गत गदनियां बीट के सुहेला इलाके के जंगल में खेत से सटी झाड़ियों के बीच एक बाघिन को जख्मी अवस्था में ग्रामीणों ने बुधवार को देखा था। उन्होंने इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी। खबर मिलते ही हड़कंप मच गया और वनदरोगा विजेंद्र सिंह समेत कई वनकर्मी मौके पर पहुंच गए थे। उसके पिछले हिस्से में जख्म नजर आ रहे थे। अंधेरा काफी हो जाने के कारण उसको निकाला नहीं जा सका था। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उच्चाधिकारियों को खबर दे देकर उसकी निगरानी शुरू कर दी थी। बृहस्पतिवार की सुबह उसको पकड़ने के इंतजाम शुरू हो गए। पहले तो पिंजड़ा लगाया गया और उसमें बकरी बांधी गई, लेकिन वह निकल कर नहीं आई। इधर मौके पर पलिया रेंजर आरके दीक्षित, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के उत्तर प्रदेश, बिहार कोआर्डिनेटर डॉ. मुदित गुप्ता, दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर महावीर कौजलगि, कर्तनियां घाट के बायोलाजिस्ट कमलेश मौर्य, फजलुर्रहमान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ परियोजनाधिकारी दबीर हसन, सहायक परियोजनाधिकारी राधेश्याम भार्गव, एसडीओ डीबी सिंह, वन दरोगा विजेंद्र कुमार, बांकेलाल आदि भी पहुंच गए। जब बाघिन पिंजड़े में नहीं आई तो उसको ट्रैंकुलाइज करने के प्रयास शुरू कर दिए गए। डब्ल्यूटीआई के डॉ. ऐरन वेशली भी पहुंच चुके थे और समाज विज्ञानी प्रेम प्रकाश पांडे ने गन में इंजेक्शन लोड कर शाम करीब पांच बजे उसे ट्रैंकुलाइज कर दिया। उसे बाहर निकाला गया, बाहर आने पर उसके पेट और रीढ़ की हड्डी पर जख्म पाए गए। वह मादा बताई गई और उसकी उम्र करीब डेढ़ साल है। अधिकारियों ने उसे इलाज के लिए लखनऊ चिड़ियाघर ले जाने का फैसला किया गया। वनाधिकारी बाघिन के जख्मों का कारण किसी नर बाघ के हमले को मान रहे हैं। उसकी जख्मों से प्रतीत माना जा रहा है। 
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वह बाघिन है और उसकी उम्र करीब डेढ़ साल होने की संभावनाएं हैं। पेट और रीढ़ की हड्डी पर जख्म पाए गए हैं। उसको इलाज के लिए लखनऊ भेजा जाएगा।- डॉ. मुदित गुप्ता, कोआर्डिनेटर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, उत्तर प्रदेश एवं बिहार
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