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जिला अस्पताल में दवाएं नहीं, बाजार से खरीद रहे तीमारदार

Wed, 16 Jun 2021 11:08 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jun 2021 11:08 PM IST
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There are no medicines in the district hospital, the attendants are buying from the market
एंटीएलर्जिक से लेकर मेट्रोजिल तक का अकाल, ओआरएस भी नहीं
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लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमते ही सरकारी अस्पतालों में ओपीडी शुरू हो गई। मगर, अस्पताल में दवाओं का संकट है। ऐसे में न तो औषधि वितरण काउंटर से मरीजों को दवा मिल पा रही है और न ही वार्डों में भर्ती मरीजों को। ऐसे में तीमारदार बाजार से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हैं।
जिला अस्पताल में पिछले करीब एक माह से दवाओं का संकट बना हुआ है। न तो एंटीएलर्जिक टेबलेट हैं और न ही गंभीर हालात में आने वाले मरीजों को चढ़ाने के लिए बोतलें (आरएल, एनएस एवं डीएस)। ऐसे हालात में मरीज और उनके तीमारदारों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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आलम यह है कि अस्पताल की इमरजेंसी तक दवाओं के संकट से जूझ रही है। सांस लेने में दिक्कत होने पर दिए जाने वाला इंजेक्शन अमीनोफाइलिन, सोडाबाई कार्ब, अमीकासिन आदि नहीं है। उधर, दुर्घटना आदि में घायल मरीज के बह रहे खून को रोकने के लिए अस्पताल में इथमसिलेट इंजेक्शन तक नहीं है।
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बारिश के इस मौसम में बच्चों से लेकर बड़े तक को लूज मोशन होने लगते हैं। ऐसे में पानी की कमी न होने पाए इसलिए ओआरएस घोल पीने के सलाह दी जाती है। मगर, जिला अस्पताल में इसका भी संकट है। ऐसे में मरीज बाजार से इलेक्ट्रॉल खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
जिला अस्पताल में नहीं ये प्रमुख दवाएं
एंटीएलर्जिक, एंटी रैबीज वैक्सीन, मेट्रोजिल, अमीनोफाइलिन- सांस लेने में दिकक्त, सोडाबाई कार्ब- सांस लेने में दिकक्त, एविल, प्राइमाकार्ड- एलर्जी, ट्रामाडॉल- दर्द निवारक, इथमसिलेट- खून का बहाव रोकना, अमीकासिन-लूज मोशन सहित फ्लूड एनएस, डीएस एवं आरएल।
बेटे अखिलेश का एक्सीडेंट हो गया था। इस पर अस्पताल में भर्ती करा दिया। डॉक्टर ने इलाज भी शुरू कर दिया, लेकिन इंजेक्शन आदि बाहर से लाने पड़ रहे हैं। स्टाफ का कहना है कि जब हैं ही नहीं तो हम कहां से दें।
- राकेश कुमार, खरगापुर
भाई राहुल ने विषाक्त पदार्थ खा लिया। इस पर मंगलवार रात जिला अस्पताल के मेडिकल पुरूष वार्ड में उसे भर्ती कराया। 1400 रुपयेे के इंजेक्शन इमरजेंसी में लाकर दिए और 1900 के इंजेक्शन वार्ड में लेकर आया तब जाकर भाई को राहत मिली।

- सचिन कुमार, निवासी खरगापुर
दवाओं की आपूर्ति लखनऊ स्थित कार्पोरेशन से होती है। इसके लिए समय-समय पर डिमांड भी भेजी जाती है। मगर, सप्लाई में देर होने पर कभी मुश्किल हो जाती है। फिलहाल प्रयास रहता है कि दवाओं की कमी न होने पाए, इसलिए करीब 15 दिन का स्टॉक शेष रहने पर ही डिमांड भेज दी जाती है। साथ ही रिमाइंडर भी भेजते रहते हैं। जल्द ही जो दवाएं शार्ट हैं उनकी पूर्ति हो जाएगी।
- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस
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