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Lakhimpur Kheri News: जिला अस्पताल में नहीं दवाएं... मेडिकल स्टोर से खरीद रहे मरीज
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दवा काउंटर के बाहर लगी मरीजों की भीड़। स्रोत : संवाद
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में काफी समय से कई जरूरी दवाओं का टोटा है। इससे मरीजों को मजबूरन मेडिकल स्टोर से जेब ढीली कर महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड से दवा न मिल पाने की बात कर रहा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1300 से 1500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। निशुल्क इलाज की उम्मीद पर आए इन मरीजों की आस पर जिला अस्पताल खरा नहीं उतर पा रहा है। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में अब कई जरूरी दवाओं का भी टोटा हो गया है। दवा लेने आए मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
जिला अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर मरीजों की बढ़ती संख्या से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में दवाओं का टोटा है। जिला अस्पताल दवा लेने पहुंचे सफी ने बताया कि वह आंख की दवा लेने आए हैं। पर्चे पर तो नेफाजोली एंटी एलर्जी ड्राॅप लिखा गया, लेकिन दवा काउंटर पर यह नहीं मिल सकी। मजबूरन उसे बाहर से खरीदना पड़ रहा है। वहीं फुरकान, सुनील, अर्जुन को भी कई जरूरी दवाएं नहीं मिल सकीं।
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अलग पर्ची पर डॉक्टर लिख रहे दवा
दवा लेने पहुंचे सुनील ने बताया कि वह हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास गए थे। चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने कुछ दवा पर्चे पर, जबकि आई कॉकस पी, डीएसआर, कैल्शियम, डाईक्लो क्रीम के लिए अलग से पर्ची बनाकर थमा दी। पर्ची पर लिखी दवाएं अस्पताल के बाहर बने मेडिकल स्टोर पर मिलीं, जो काफी महंगी हैं। इस तरह कई अन्य लोगों को चिकित्सकों द्वारा अलग छोटी पर्ची लिखकर दी जा रही है। यह दवाएं कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं।
इन दवाओं का है टोटा
नेफाजोली एंटी एलर्जी ड्राॅप, सांस के लिए डेरीफाइलिन, वायरल संक्रमण के लिए साईक्लोवीर, लेक्टूलोज की कमी के साथ डाइक्लो जेल अस्पताल में कम आ रहा है। रेनीटिडिन की जगह दूसरी दवा चलाई जा रही है। लेकोफाइलिन की दवा भी कम आ रही है।
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अस्पताल में कौन सी दवा कम है, इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी कर बता पाएंगे। जो दवाएं कम होंगी, उनकी मांग भेजी जाएगी।
डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1300 से 1500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। निशुल्क इलाज की उम्मीद पर आए इन मरीजों की आस पर जिला अस्पताल खरा नहीं उतर पा रहा है। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में अब कई जरूरी दवाओं का भी टोटा हो गया है। दवा लेने आए मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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जिला अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर मरीजों की बढ़ती संख्या से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में दवाओं का टोटा है। जिला अस्पताल दवा लेने पहुंचे सफी ने बताया कि वह आंख की दवा लेने आए हैं। पर्चे पर तो नेफाजोली एंटी एलर्जी ड्राॅप लिखा गया, लेकिन दवा काउंटर पर यह नहीं मिल सकी। मजबूरन उसे बाहर से खरीदना पड़ रहा है। वहीं फुरकान, सुनील, अर्जुन को भी कई जरूरी दवाएं नहीं मिल सकीं।
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अलग पर्ची पर डॉक्टर लिख रहे दवा
दवा लेने पहुंचे सुनील ने बताया कि वह हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास गए थे। चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने कुछ दवा पर्चे पर, जबकि आई कॉकस पी, डीएसआर, कैल्शियम, डाईक्लो क्रीम के लिए अलग से पर्ची बनाकर थमा दी। पर्ची पर लिखी दवाएं अस्पताल के बाहर बने मेडिकल स्टोर पर मिलीं, जो काफी महंगी हैं। इस तरह कई अन्य लोगों को चिकित्सकों द्वारा अलग छोटी पर्ची लिखकर दी जा रही है। यह दवाएं कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं।
इन दवाओं का है टोटा
नेफाजोली एंटी एलर्जी ड्राॅप, सांस के लिए डेरीफाइलिन, वायरल संक्रमण के लिए साईक्लोवीर, लेक्टूलोज की कमी के साथ डाइक्लो जेल अस्पताल में कम आ रहा है। रेनीटिडिन की जगह दूसरी दवा चलाई जा रही है। लेकोफाइलिन की दवा भी कम आ रही है।
अस्पताल में कौन सी दवा कम है, इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी कर बता पाएंगे। जो दवाएं कम होंगी, उनकी मांग भेजी जाएगी।
डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल

दवा काउंटर के बाहर लगी मरीजों की भीड़। स्रोत : संवाद