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Lakhimpur Kheri News: झाड़ियों से घिरी गोला कृषि मंडी की दीवारें गईं हैं टूट... टिनशेड भी जर्जर
Thu, 11 Jun 2026 12:17 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 11 Jun 2026 12:17 AM IST
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गोला की कृषि उत्पादन मंडी समिति की टूटी पड़ी बाउंड्री वॉल। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। अलीगंज मार्ग स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति गोला में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली अब कृषि कारोबार को प्रभावित करने लगी है। करीब 33 एकड़ क्षेत्र में फैली यह मंडी किसानों और व्यापारियों के लिए प्रमुख केंद्र है, लेकिन यहां टूटी चहारदीवारी, जर्जर दुकानें, क्षतिग्रस्त नीलामी चबूतरे और झाड़ियों से घिरा परिसर अव्यवस्थाओं की तस्वीर पेश कर रहा है।
मंडी का उद्घाटन 19 अप्रैल 1986 को हुआ था। अमीरनगर, संसारपुर, अलीगंज, राजगंज, बांकेगंज सहित करीब 20 किलोमीटर क्षेत्र के किसान यहां अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। जनपद के अलावा पड़ोसी जनपदों के किसान भी मंडी में व्यापार करते हैं। खाद्यान्न के साथ यहां फल और सब्जियों की थोक खरीद-फरोख्त भी होती है।
मंडी परिसर में 92 दुकानें तथा खाद्यान्न, फल और सब्जियों के छह नीलामी चबूतरे हैं। पड़ताल में सामने आया कि कई चबूतरों के टिनशेड टूट चुके हैं, जबकि दुकानों की छतें जर्जर हैं।
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बरसात के मौसम में इससे किसानों और व्यापारियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मंडी की चहारदीवारी कई स्थानों पर टूटी हुई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। परिसर में उगी घनी झाड़ियां भी समस्या बढ़ा रही हैं। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि इससे हानिकारक जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है और उपज को सुरक्षित रखना चुनौती बन जाता है।
मंडी समिति में कर्मचारियों के लिए तीन श्रेणियों में 15 आवास बने हैं। वर्षों से मरम्मत न होने के कारण ये भवन जर्जर हो चुके हैं। आवासों की छतों का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है और दरवाजों के पल्ले भी खराब हो चुके हैं। कर्मचारियों को इन्हीं आवासों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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मंडी का उद्घाटन 19 अप्रैल 1986 को हुआ था। अमीरनगर, संसारपुर, अलीगंज, राजगंज, बांकेगंज सहित करीब 20 किलोमीटर क्षेत्र के किसान यहां अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। जनपद के अलावा पड़ोसी जनपदों के किसान भी मंडी में व्यापार करते हैं। खाद्यान्न के साथ यहां फल और सब्जियों की थोक खरीद-फरोख्त भी होती है।
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मंडी परिसर में 92 दुकानें तथा खाद्यान्न, फल और सब्जियों के छह नीलामी चबूतरे हैं। पड़ताल में सामने आया कि कई चबूतरों के टिनशेड टूट चुके हैं, जबकि दुकानों की छतें जर्जर हैं।
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बरसात के मौसम में इससे किसानों और व्यापारियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मंडी की चहारदीवारी कई स्थानों पर टूटी हुई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। परिसर में उगी घनी झाड़ियां भी समस्या बढ़ा रही हैं। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि इससे हानिकारक जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है और उपज को सुरक्षित रखना चुनौती बन जाता है।
मंडी समिति में कर्मचारियों के लिए तीन श्रेणियों में 15 आवास बने हैं। वर्षों से मरम्मत न होने के कारण ये भवन जर्जर हो चुके हैं। आवासों की छतों का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है और दरवाजों के पल्ले भी खराब हो चुके हैं। कर्मचारियों को इन्हीं आवासों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

गोला की कृषि उत्पादन मंडी समिति की टूटी पड़ी बाउंड्री वॉल। संवाद

गोला की कृषि उत्पादन मंडी समिति की टूटी पड़ी बाउंड्री वॉल। संवाद

गोला की कृषि उत्पादन मंडी समिति की टूटी पड़ी बाउंड्री वॉल। संवाद