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Lakhimpur Kheri News: पक्षकारों ने सर्किल रेट से चार गुना ज्यादा मुआवजा मांगा
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तहसील सभागार में कारिडोर निर्माण में भूमि अधिकरण को लेकर पक्षकारों से वार्ता करते एसडीएम।
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी कॉरिडोर निर्माण की सर्वे रिपोर्ट पर शासन-प्रशासन की मुहर लगने के बाद अधिग्रहण की कार्रवाई को लेकर एसडीएम ने पक्षकारों के साथ बैठक की। वहीं पक्षकारों ने सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा और पुनः सर्वे कराए जाने की मांग की।
छोटीकाशी कॉरिडोर की मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा के बाद से करीब एक वर्ष होने को है। इस दौरान तहसील जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक के अधिकारियों की कई टीमें आईं और गईं। पैमाइश, नक्शा, अधिग्रहण को लेकर महीनों सर्वे हुए। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 46 भवन जद में आए हैं। अब इन भवनों के पक्षकारों से सहमति पत्र न मिल पाने से अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि करीब 10 पक्षकारों ने अपने सहमति पत्र दे भी दिए हैं।
बृहस्पतिवार को तहसील सभागार में एसडीएम रत्नाकर मिश्रा, तहसीलदार विनोद कुमार गुप्ता, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की मौजूदगी में पक्षकारों के साथ भूमि अधिग्रहण को लेकर बैठक की गई। बैठक में पक्षकार विनय केडिया, अरुण कुमार आदि ने कहा कि कॉरिडोर के लिए जो भूमि अधिग्रहित की जा रही हैं, उसका मुआवजा सर्किल रेट का 2 गुना ही दिया जा रहा है। जबकि उक्त भूमि की कीमत बहुत अधिक है। इसलिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों का मुआवजा चार गुना दिलाया जाए। भवनों का सर्वे दोबारा कराया जाय।
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सर्किल रेट से दूना मिलेगा मुआवजा
छोटी काशी कॉरिडोर परिक्षेत्र में मुख्य मार्ग के किनारे की भूमि का सर्किल रेट राजस्व विभाग द्वारा 16800 रुपया प्रति वर्ग मीटर, और अंदर की भूमि का सर्किल रेट 9000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित है। भूमि अधिग्रहण में सर्किल रेट के गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। सूत्रों के अनुसार जो भवन सरकारी नजूल की जमीन पर बने हैं उन पक्षकारों को केवल भवन का मुआवजा मिलेगा। एसडीएम ने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित दर पर ही प्रतिकर दिए जाने की व्यवस्था है। शहरी क्षेत्र में डीएम द्वारा निर्धारित सर्किल रेट का दोगुना अनुमानित है, वही देय होगा।
6731 वर्ग मीटर भूमि की जानी है अधिग्रहीत
धर्मशालाओं सहित 46 भवनों से 6731 वर्ग मीटर भूमि अधिग्रहित की जानी है। अधिकारियों ने पक्षकारों से सहमति पत्र, दावा और आपत्ति एवं भूमि स्वामित्व संबंधी अभिलेख मांगे हैं।
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छोटीकाशी कॉरिडोर की मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा के बाद से करीब एक वर्ष होने को है। इस दौरान तहसील जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक के अधिकारियों की कई टीमें आईं और गईं। पैमाइश, नक्शा, अधिग्रहण को लेकर महीनों सर्वे हुए। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 46 भवन जद में आए हैं। अब इन भवनों के पक्षकारों से सहमति पत्र न मिल पाने से अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि करीब 10 पक्षकारों ने अपने सहमति पत्र दे भी दिए हैं।
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बृहस्पतिवार को तहसील सभागार में एसडीएम रत्नाकर मिश्रा, तहसीलदार विनोद कुमार गुप्ता, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की मौजूदगी में पक्षकारों के साथ भूमि अधिग्रहण को लेकर बैठक की गई। बैठक में पक्षकार विनय केडिया, अरुण कुमार आदि ने कहा कि कॉरिडोर के लिए जो भूमि अधिग्रहित की जा रही हैं, उसका मुआवजा सर्किल रेट का 2 गुना ही दिया जा रहा है। जबकि उक्त भूमि की कीमत बहुत अधिक है। इसलिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों का मुआवजा चार गुना दिलाया जाए। भवनों का सर्वे दोबारा कराया जाय।
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सर्किल रेट से दूना मिलेगा मुआवजा
छोटी काशी कॉरिडोर परिक्षेत्र में मुख्य मार्ग के किनारे की भूमि का सर्किल रेट राजस्व विभाग द्वारा 16800 रुपया प्रति वर्ग मीटर, और अंदर की भूमि का सर्किल रेट 9000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित है। भूमि अधिग्रहण में सर्किल रेट के गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। सूत्रों के अनुसार जो भवन सरकारी नजूल की जमीन पर बने हैं उन पक्षकारों को केवल भवन का मुआवजा मिलेगा। एसडीएम ने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित दर पर ही प्रतिकर दिए जाने की व्यवस्था है। शहरी क्षेत्र में डीएम द्वारा निर्धारित सर्किल रेट का दोगुना अनुमानित है, वही देय होगा।
6731 वर्ग मीटर भूमि की जानी है अधिग्रहीत
धर्मशालाओं सहित 46 भवनों से 6731 वर्ग मीटर भूमि अधिग्रहित की जानी है। अधिकारियों ने पक्षकारों से सहमति पत्र, दावा और आपत्ति एवं भूमि स्वामित्व संबंधी अभिलेख मांगे हैं।