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Lakhimpur Kheri News: कटान का कहर, डर में कट रहे दिन-रात
Sun, 17 Aug 2025 11:21 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 17 Aug 2025 11:21 PM IST
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शारदा का जलस्तर बढ़ने के बाद श्रीनगर गांव के किनारे बहता पानी। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिले की कई क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हैं। शारदा नदी का जलस्तर घटने के बाद कटान तेज हो गया है। इससे निघासन क्षेत्र के ग्रामीण सामान समेटकर घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर अस्थायी बसेरा बना रहे हैं। ऐसे में उनके सामने तमाम तरह की परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं।
बच्चों की पढ़ाई से लेकर खाना और पशुओं के चारे का संकट खड़ा है। निघासन के ग्रंट नंबर 12 गांव के रमेश, जयपाल, ब्रजबिहारी, जयेश पाल, श्रवण, अमर सिंह, भगवानी, धनावती, कमलेश, राजाराम समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ का पानी लगातार घरों को काट रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई मकान ढहने की कगार पर पहुंच गए हैं।
मजबूरी में लोग श्रीनगर बंधे पर घास-फूंस के छप्पर और त्रिपाल डालकर शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों का जीवन अब पूरी तरह से खानाबदोश जैसा हो गया है। न छत का ठिकाना है और न ही कोई स्थायी व्यवस्था। बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है।
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फिलहाल सभी परिवार अपनी-अपनी व्यवस्था से जैसे-तैसे खाना बना रहे हैं, लेकिन राशन खत्म होने के बाद बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्रशासनिक मदद अब तक उन्हें नहीं मिली है। अगर जल्द ही राहत और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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बच्चों की पढ़ाई से लेकर खाना और पशुओं के चारे का संकट खड़ा है। निघासन के ग्रंट नंबर 12 गांव के रमेश, जयपाल, ब्रजबिहारी, जयेश पाल, श्रवण, अमर सिंह, भगवानी, धनावती, कमलेश, राजाराम समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ का पानी लगातार घरों को काट रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई मकान ढहने की कगार पर पहुंच गए हैं।
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मजबूरी में लोग श्रीनगर बंधे पर घास-फूंस के छप्पर और त्रिपाल डालकर शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों का जीवन अब पूरी तरह से खानाबदोश जैसा हो गया है। न छत का ठिकाना है और न ही कोई स्थायी व्यवस्था। बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है।
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फिलहाल सभी परिवार अपनी-अपनी व्यवस्था से जैसे-तैसे खाना बना रहे हैं, लेकिन राशन खत्म होने के बाद बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्रशासनिक मदद अब तक उन्हें नहीं मिली है। अगर जल्द ही राहत और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।